Latest news

103 आवेदन… 98 खारिज! बिलासपुर की भर्ती पर विधानसभा में ‘ अटल ने डाला बाउंसर- सिस्टम में गड़बड़ी या ‘सेटिंग’ का खेल?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read


बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बिलासपुर के स्वास्थ्य विभाग की संविदा भर्ती का मामला जोरदार तरीके से गूंजा। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर पदों की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि भर्ती में बड़ी अनियमितता हुई है। विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के लिखित जवाब के बाद मामला और गर्मा गया, क्योंकि तीन पदों के लिए आए 103 आवेदनों में से 98 आवेदन निरस्त होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद विपक्ष ने पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए।
विधानसभा में उठा भर्ती का मुद्दा
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि बिलासपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर के कितने पद स्वीकृत थे, भर्ती के लिए कितने आवेदन आए और उनमें से कितने आवेदन किन कारणों से निरस्त किए गए।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने लिखित उत्तर में बताया कि एनआरसी के तहत फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर के तीन पद स्वीकृत थे। इन पदों के लिए कुल 103 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 98 आवेदन निरस्त कर दिए गए। जवाब में निरस्तीकरण का कारण यह बताया गया कि संबंधित आवेदकों ने ऑनलाइन आवेदन में शैक्षणिक योग्यता के प्राप्तांक (Marks Obtained) दर्ज नहीं किए थे।
अटल का पलटवार—’ऑनलाइन सिस्टम में ऐसा कैसे संभव?’
सरकार के जवाब के बाद अटल श्रीवास्तव ने विधानसभा में ही इस दलील पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन थी और ऑनलाइन आवेदन तब तक सबमिट ही नहीं होता, जब तक सभी अनिवार्य कॉलम नहीं भरे जाते।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आवेदन अधूरा था तो वह स्वीकार कैसे हुआ, और यदि स्वीकार हुआ तो फिर एक साथ 98 आवेदकों द्वारा एक जैसी गलती कैसे हो सकती है?
‘चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आवेदन खारिज किए गए’
अटल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि यह सामान्य तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर संदेह पैदा करने वाला मामला है। उन्होंने आशंका जताई कि स्वास्थ्य विभाग में अनियमितता कर चहेते उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त किए गए।
उनका कहना था कि तीन पदों की भर्ती में 103 में से 98 आवेदन खारिज होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है और पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
सरकारी जवाब से बढ़े सवाल
विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए लिखित जवाब के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ऑनलाइन पोर्टल अनिवार्य जानकारी के बिना आवेदन स्वीकार नहीं करता, तो फिर 98 आवेदन उसी आधार पर निरस्त कैसे कर दिए गए?
यही बिंदु अब पूरे मामले का सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बन गया है।
भर्ती प्रक्रिया पर विपक्ष का सीधा निशाना
विधानसभा में यह मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे केवल भर्ती प्रक्रिया की तकनीकी खामी नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। अटल श्रीवास्तव ने पूरे मामले को स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।