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विष्णु जी के राज में….₹600 करोड़ की सड़क में पहली बारिश ने खोल दी ‘भ्रष्टाचार की दरार’: 97 किमी हाईवे पर फटा डामर, धंसी सड़क…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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निर्माण की गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल,सड़क पर पहली बारिश का ‘वार’: दरारों में दफन हो रहे दावे, रतनपुर–पेंड्रा हाईवे पर निर्माण की गुणवत्ता कठघरे में
97 किमी के नेशनल हाईवे-45 प्रोजेक्ट में जगह-जगह फटी डामर की परत, धंसी सड़कें और टूटते किनारे; ग्रामीण बोले—’यह सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की दरार है’
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही एक और सड़क परियोजना पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। बिलासपुर जिले में रतनपुर से पेंड्रा तक 97 किलोमीटर लंबी नेशनल हाईवे-45 परियोजना, जिस पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, उसका निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ और कई हिस्सों में सड़क की परतें जवाब देने लगी हैं। कहीं डामर फट चुका है, कहीं सड़क धंस रही है, कहीं किनारे बह गए हैं और कई स्थानों पर 5 से 10 फीट लंबी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं।
हालात ऐसे हैं कि एक जगह सड़क की दरार में पड़ताल के दौरान रिपोर्टर का पैर तक अंदर धंस गया। यह दृश्य निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


पहली बारिश ने खोली निर्माण की परतें, करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस सड़क को वर्षों तक टिकाऊ होना था, वह पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। सड़क पर जगह-जगह उभरी दरारें और धंसते हिस्से लोगों में हादसे की आशंका बढ़ा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ दरारें नहीं हैं, बल्कि निर्माण कार्य में हुई कथित गड़बड़ियों और लापरवाही की निशानी हैं। उनका आरोप है कि मजबूत बेस तैयार करने के बजाय मिट्टी की परत पर ही डामर बिछा दिया गया, जिसके कारण बारिश के साथ सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आने लगी।
निर्माणाधीन सड़क पर हर कुछ किलोमीटर बाद बदलती दिखी तस्वीर
मैदानी पड़ताल में कई स्थानों पर सड़क के किनारे टूटे हुए मिले। कई हिस्सों में डामर की सतह चौड़ी दरारों में तब्दील हो चुकी थी। कहीं सड़क नीचे बैठती नजर आई तो कहीं बारिश का पानी किनारों को काटकर ले गया। निर्माण कार्य अभी जारी है, लेकिन जिन हिस्सों में काम पूरा बताया जा रहा है, वहां भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


कौन बना रहा है सड़क?
रतनपुर से पेंड्रा तक सड़क निर्माण का कार्य कोलकाता की कंपनी सत्य बिल्डर्स श्याम इन्फ्रा द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना नेशनल हाईवे-45 का हिस्सा है और बिलासपुर, रतनपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को जबलपुर और अमरकंटक से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर मानी जाती है।
PWD के बड़े अधिकारी और मंत्री कर चुके हैं निरीक्षण
इस परियोजना का निरीक्षण 17 जून 2026 को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश बंसल ने किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों और ठेकेदार को निर्माण में पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश दिए थे और कहा था कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा लोक निर्माण मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी इस परियोजना का निरीक्षण कर चुके हैं।
इसके बावजूद निर्माणाधीन सड़क के कई हिस्सों में पहली बारिश के बाद सामने आई तस्वीरों ने गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क निर्माण के मानक क्या कहते हैं?
सड़क निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्धारित मानकों के तहत सड़क निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण चरण उसका बेस (नींव) तैयार करना होता है।
निर्माण प्रक्रिया में पहले मिट्टी और मुरूम से मजबूत आधार बनाया जाता है। इसके बाद गिट्टी की परतों के साथ डब्ल्यूबीएम तैयार कर पर्याप्त कम्पेक्शन किया जाता है। सभी परतों की मोटाई निर्धारित मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होता है, ताकि सड़क बारिश और भारी यातायात का दबाव सह सके।
ग्रामीणों का आरोप—’मुरूम के ऊपर सीधे बिछा दिया डामर’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया। उनका कहना है कि कई हिस्सों में मजबूत बेस तैयार किए बिना मुरूम के ऊपर सीधे डामर की परत बिछा दी गई। बारिश के बाद मिट्टी धंसने लगी और उसके साथ डामर भी फट गया।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की मौजूदा स्थिति लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है यह हाईवे
रतनपुर-पेंड्रा मार्ग सिर्फ एक सामान्य सड़क नहीं बल्कि उत्तर छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में निर्माणाधीन हिस्सों में उभरी दरारें और धंसाव लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
तीन चरणों में चल रहा है निर्माण कार्य
लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता आर.के. खांबरा के अनुसार परियोजना तीन चरणों में बनाई जा रही है।
पहले चरण में रतनपुर से केंदा तक कार्य चल रहा है।
दूसरे चरण में कारीआम से केंवची तक निर्माण जारी है।
तीसरे चरण में घाटी और पहाड़ी क्षेत्र का निर्माण प्रस्तावित है, जिसके लिए निविदा प्रक्रिया जारी है।
सड़क पर आई दरारों के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति है तो विभाग मौके पर जाकर निरीक्षण करेगा।
पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में करोड़ों की परियोजना
निर्माणाधीन सड़क की मौजूदा स्थिति ने परियोजना की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर विभागीय स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखने के दावे किए गए थे, वहीं दूसरी ओर पहली ही बारिश के बाद सड़क के कई हिस्सों में उभरी दरारें, धंसाव और टूटे किनारे चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्थानीय लोग पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच और जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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