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विधानसभा में गूंजा ‘फर्जी बिल’ का मुद्दा: विधायक अटल ने सरकारी आयोजनों के खर्च पर उठाए सवाल, मंत्री बोले– जांच के बाद ही होगा भुगतान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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तखतपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से जुड़े टेंट-स्टेज बिल पर सवाल, पॉलीटेक्निक कॉलेज के नाम से 24.77 लाख के भुगतान प्रस्ताव को बताया संदिग्ध; कृषक सम्मेलन में 13 लाख के साउंड बिल पर भी जताई आपत्ति
रायपुर। विधानसभा के मानसून सत्र में शासकीय कार्यक्रमों में टेंट, स्टेज, कुर्सी, सजावट, लाइट और साउंड व्यवस्था के नाम पर प्रस्तुत किए गए बिलों का मामला जोरदार ढंग से उठा। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों में किए गए भुगतान और लंबित बिलों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कई भुगतान को संदिग्ध बताया और पूरे मामले की जांच की मांग की।
विधायक अटल श्रीवास्तव ने प्रश्नकाल के दौरान दिसंबर 2023 से जून 2026 तक बिलासपुर जिले में मुख्यमंत्री सहित विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों के आयोजन के लिए टेंट, स्टेज, कुर्सी, सजावट, लाइट एवं साउंड व्यवस्था उपलब्ध कराने वाली फर्मों, एजेंसियों और दुकानदारों को किए गए भुगतान तथा लंबित भुगतान का विस्तृत ब्यौरा मांगा।
लोक निर्माण विभाग की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि 12 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री के तखतपुर आगमन कार्यक्रम के दौरान शासकीय जेएमपी विद्यालय में टेंट, स्टेज और कुर्सी व्यवस्था के लिए बग्गा टेंट हाउस, तखतपुर द्वारा 40.49 लाख रुपये का बिल प्रस्तुत किया गया। वहीं, इसी दिन पॉलीटेक्निक कॉलेज, तखतपुर में टेंट, स्टेज और कुर्सी व्यवस्था के नाम पर जसराज टेंट एंड केटरिंग सर्विस, रायपुर द्वारा 24.77 लाख रुपये का बिल भी प्रस्तुत किया गया।
इस पर अटल श्रीवास्तव ने विधानसभा में कहा कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल जेएमपी विद्यालय में आयोजित हुआ था। ऐसे में पॉलीटेक्निक कॉलेज के नाम पर प्रस्तुत किया गया बिल पूरी तरह फर्जी और तथ्यहीन प्रतीत होता है तथा इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने एक अन्य मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रहंगी कृषक सम्मेलन में साउंड व्यवस्था के नाम पर 13 लाख रुपये का बिल प्रस्तुत किया गया है। श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि जब जिले में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे बड़े सरकारी आयोजनों में साउंड व्यवस्था पर सामान्यतः 3 से 4 लाख रुपये तक का खर्च आता है, तो एक कृषक सम्मेलन के लिए 13 लाख रुपये का बिल संदेह पैदा करता है।
विधायक ने लोक निर्माण मंत्री अरुण साव से सरकारी आयोजनों के नाम पर प्रस्तुत किए जा रहे कथित फर्जी और संदिग्ध बिलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इस पर मंत्री अरुण साव ने सदन में आश्वस्त किया कि संबंधित मामलों की पूरी जांच के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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