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चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में गैर-चिकित्सकीय अधिकारी की नियुक्ति पर JDA का तीखा हमला, सरकार से आदेश तत्काल रद्द करने की मांग”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर,रायपुर। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ (JDA) ने चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में अपर संचालक (चिकित्सा शिक्षा) के पद पर राज्य प्रशासनिक सेवा के गैर-चिकित्सकीय अधिकारी की नियुक्ति का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने कहा कि यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत स्वायत्तता के हित में नहीं है।
नियुक्ति आदेश पर जताई गहरी आपत्ति
JDA ने बताया कि राज्य शासन द्वारा 7 जुलाई 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक ESTB 102(1)/414/2026-GAD-4 के तहत चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में अपर संचालक (चिकित्सा शिक्षा) के पद पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारी की पदस्थापना की गई है। संगठन ने इस निर्णय पर पुनर्विचार कर आदेश निरस्त करने की मांग की है।
चिकित्सा शिक्षा को बताया विशेषज्ञता आधारित क्षेत्र
एसोसिएशन का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा अत्यंत तकनीकी और विशेषज्ञता वाला क्षेत्र है। इस विभाग में लिए जाने वाले नीतिगत एवं प्रशासनिक निर्णय मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, इंटर्न चिकित्सकों और लाखों मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे प्रभावित करते हैं। इसलिए ऐसे पदों पर अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति आवश्यक है।
प्रदेश के सामने कई बड़ी चुनौतियां
JDA के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) से मान्यता, फैकल्टी की उपलब्धता, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना तथा मेडिकल संस्थानों का सुचारू संचालन जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इनका समाधान चिकित्सा क्षेत्र की व्यावहारिक और तकनीकी समझ रखने वाले वरिष्ठ चिकित्सक ही बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, व्यवस्था का विरोध
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी अधिकारी या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। उद्देश्य केवल चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, मेडिकल कॉलेजों के हित, चिकित्सकों के सम्मान और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।
JDA की चार प्रमुख मांगें
अपर संचालक (चिकित्सा शिक्षा) के पद पर योग्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक की नियुक्ति की जाए।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के सभी तकनीकी एवं शीर्ष पदों पर चिकित्सा विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाए।
7 जुलाई 2026 के नियुक्ति आदेश को तत्काल निरस्त कर पुनर्विचार किया जाए।
भविष्य में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले चिकित्सक संगठनों और विषय विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा एवं परामर्श किया जाए।
महासचिव डॉ. योगेश्वर जायसवाल का बयान


JDA के प्रदेश महासचिव डॉ. योगेश्वर जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल प्रशासनिक व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि भविष्य के चिकित्सकों के निर्माण और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा दायित्व है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के शीर्ष तकनीकी पदों पर ऐसे अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति होनी चाहिए, जिन्हें मेडिकल शिक्षा, क्लीनिकल कार्यप्रणाली, अस्पताल प्रबंधन और NMC के मानकों का व्यावहारिक अनुभव हो।
उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा की स्वायत्तता, गुणवत्ता और संस्थागत गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से है। संगठन ने राज्य शासन से आग्रह किया है कि मेडिकल कॉलेजों के विकास, रेजिडेंट डॉक्टरों और विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार कर योग्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

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