बिलासपुर। कोरोना महामारी की भयावह त्रासदी झेल चुके बिलासपुर में एक बार फिर संक्रामक बीमारी ने दस्तक दे दी है। शहर में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के एक संदिग्ध मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए मरीज का सैंपल एम्स (AIIMS) भेजा गया है। इसी बीच मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से एयर एम्बुलेंस के जरिए हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल रेफर किया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने मरीज के निवास क्षेत्र कृष्णा रेजिडेंसी, राजकिशोर नगर समेत आसपास के इलाकों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। विभागीय टीम ने घर-घर जाकर सर्वे कराया है और मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। मरीज के परिजनों के भी सैंपल लिए गए हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कोलकाता से लौटने के बाद बिगड़ी तबीयत
प्राथमिक जानकारी के अनुसार 54 वर्षीय मरीज कुछ दिन पहले कोलकाता से बिलासपुर लौटा था। वापस आने के बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। जांच में मरीज के दोनों फेफड़ों में गंभीर संक्रमण पाया गया।
डॉक्टरों के अनुसार मरीज को:
दोनों फेफड़ों में निमोनिया (Bilateral Pneumonia)
H1N1 संक्रमण
श्वसन विफलता (Respiratory Failure)
उच्च रक्तचाप (Hypertension)
की समस्या है। मरीज फिलहाल NIV (नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन) सपोर्ट पर है।
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बचाई गई कीमती जान
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों ने उसे हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल ले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद बिलासपुर यातायात पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए भारी बारिश के बीच अस्पताल से चकरभाठा एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया।
कंट्रोल रूम से मार्ग में पड़ने वाले सभी प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों को अस्थायी रूप से बंद कराया गया। प्रत्येक चौक-चौराहे पर पुलिस बल तैनात किया गया ताकि एम्बुलेंस को कहीं भी रुकना न पड़े। पुलिस के सायरन और पीए सिस्टम की आवाज सुनकर आम नागरिकों ने भी वाहनों को किनारे कर एम्बुलेंस को तत्काल रास्ता दिया। निर्धारित समय में मरीज को सुरक्षित एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से एयर एम्बुलेंस के माध्यम से हैदराबाद रवाना किया गया।
पहले भी निभा चुकी है बड़ी जिम्मेदारी
यातायात पुलिस ने इससे पहले भी इसी प्रकार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दो जुड़वा नवजात शिशुओं को एयर एम्बुलेंस से हैदराबाद पहुंचाया था। समय पर उपचार मिलने से दोनों नवजात और उनकी मां स्वस्थ होकर वापस लौटे थे। इस बार भी मरीज के परिजनों और एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने पुलिस की इस संवेदनशील पहल की सराहना की।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में भी स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले कुछ मरीज सामने आए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने घबराहट की स्थिति से बचने के लिए इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी साझा नहीं की थी। अब संदिग्ध H1N1 मरीज मिलने के बाद निगरानी और सर्वे तेज कर दिया गया है।
कृष्णा रेजिडेंसी, राजकिशोर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी जुटा रही है। जिन लोगों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें तत्काल चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी जा रही है।
कोरोना की यादें अभी ताजा, इसलिए सतर्कता जरूरी
बिलासपुर कोरोना महामारी के दौरान गंभीर हालात का सामना कर चुका है। बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज, अस्पतालों पर दबाव और ऑक्सीजन संकट जैसी परिस्थितियां शहर देख चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संक्रामक बीमारी को लेकर लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। समय पर जांच, इलाज और सावधानी ही संक्रमण को फैलने से रोक सकती है।
वर्जन
डॉ. प्रमोद तिवारी, संक्रामक रोग निवारण अधिकारी, बिलासपुर
“एक संदिग्ध H1N1 मरीज मिला है, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट यहां पॉजिटिव आई है। अंतिम पुष्टि के लिए मरीज का सैंपल एम्स भेजा गया है। मरीज के संपर्क में आए लोगों और संबंधित क्षेत्र में सर्वे एवं स्वास्थ्य जांच कराई जा रही है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करें।”
कोलकाता से लौटने के बाद बिगड़ी तबीयत, ट्रैवल हिस्ट्री पर स्वास्थ्य विभाग का फोकस
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 54 वर्षीय संदिग्ध H1N1 मरीज हाल ही में कोलकाता से बिलासपुर लौटा था। ट्रैवल हिस्ट्री को देखते हुए विभाग इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रहा है। कोलकाता से लौटने के कुछ समय बाद मरीज को तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। जांच में H1N1 संक्रमण की आशंका सामने आने पर मरीज का सैंपल पुष्टि के लिए एम्स भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग मरीज के संपर्क में आए लोगों (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) की जानकारी जुटा रहा है। मरीज के परिजनों की भी जांच की गई है और कृष्णा रेजिडेंसी, राजकिशोर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य सर्वे कराया जा रहा है, ताकि संक्रमण की किसी भी संभावित श्रृंखला का समय रहते पता लगाया जा सके।
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की सलाह
तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग करें।
हाथों की नियमित सफाई रखें।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें।
बिना सलाह के दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें।
गंभीर लक्षण होने पर जांच कराने में देरी न करें।
फिलहाल अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा दी है। ऐसे में नागरिकों से अपील है कि अफवाहों से बचें, लेकिन किसी भी प्रकार के फ्लू जैसे लक्षणों को हल्के में भी न लें।
स्वाइन फ्लू (H1N1 इन्फ्लूएंजा) क्या है?
स्वाइन फ्लू एक वायरल श्वसन संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा A (H1N1) वायरस के कारण होता है। 2009 में यह वायरस महामारी (Pandemic) के रूप में पूरी दुनिया में फैला था। अब यह मौसमी फ्लू (Seasonal Influenza) का हिस्सा माना जाता है और हर साल इसके मामले सामने आते हैं।
यह कैसे फैलता है?
संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों (Droplets) से।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से।
वायरस लगे हुए सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से।
यह बीमारी सामान्यतः सूअर का मांस खाने से नहीं फैलती।
लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं:
तेज बुखार
खांसी
गले में खराश
नाक बहना या बंद होना
शरीर और मांसपेशियों में दर्द
सिरदर्द
कमजोरी और थकान
ठंड लगना
कुछ मरीजों में उल्टी और दस्त
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
गर्भवती महिलाएं
मधुमेह, हृदय, फेफड़े या किडनी के मरीज
कमजोर प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) वाले लोग
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि मरीज में ये लक्षण हों:
सांस लेने में तकलीफ
सीने में दर्द
होंठ या चेहरा नीला पड़ना
लगातार तेज बुखार
भ्रम, बेहोशी या अत्यधिक सुस्ती
ऑक्सीजन का स्तर कम होना
जांच
RT-PCR टेस्ट सबसे विश्वसनीय जांच मानी जाती है।
आवश्यकता अनुसार डॉक्टर अन्य जांच भी करा सकते हैं।
उपचार
डॉक्टर की सलाह पर ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवा दी जाती है।
पर्याप्त आराम करें।
खूब पानी और तरल पदार्थ लें।
बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा लें।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें, क्योंकि यह वायरल बीमारी है।
बचाव
फ्लू का वार्षिक टीका (Influenza Vaccine) लगवाएं, विशेषकर जोखिम वाले लोगों को।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
बार-बार साबुन से हाथ धोएं।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें।
बीमार व्यक्ति से दूरी रखें।
लक्षण होने पर घर पर रहें और दूसरों से संपर्क कम करें।
क्या स्वाइन फ्लू जानलेवा हो सकता है?
अधिकांश मरीज उचित इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि समय पर उपचार न मिले या मरीज उच्च जोखिम वाले समूह में हो, तो निमोनिया, सांस की गंभीर समस्या और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
भारत में हर वर्ष विशेषकर बरसात और सर्दियों के मौसम में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसे समय सतर्क रहने, लक्षण होने पर जांच कराने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेने की सलाह देता है।



