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सिम्स की नई उड़ान…चुनौतियों के बीच 150 एमबीबीएस सीटों पर एनएमसी की मुहर, डीन-एमएस की टीम ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
7 Min Read


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन, फैकल्टी की कमी और लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव जैसी चुनौतियां यदि मजबूत नेतृत्व और टीमवर्क के साथ हों तो उपलब्धियों का रास्ता नहीं रोक सकतीं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (यूजीएमईबी) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 150 एमबीबीएस सीटों के नवीनीकरण (लेटर ऑफ रिन्यूअल) को मंजूरी मिलना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, सुधार और संस्थागत प्रतिबद्धता की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति मानी जा रही है।
इस मंजूरी के साथ सिम्स में नए सत्र में 150 विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि प्रदेश का यह प्रमुख शासकीय मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय मानकों पर अपनी गुणवत्ता बनाए रखने में सफल रहा है।


देशभर में फैकल्टी की कमी, फिर भी सिम्स ने तय किया मुश्किल सफर
देश के अनेक शासकीय मेडिकल कॉलेज आज भी विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल फैकल्टी की कमी से जूझ रहे हैं। एनएमसी के मानकों के अनुरूप शिक्षकों की उपलब्धता, अधोसंरचना, मरीजों की संख्या, क्लीनिकल मटेरियल और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखना मेडिकल कॉलेजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है।
इन्हीं परिस्थितियों में सिम्स ने लगातार अपने संसाधनों को मजबूत किया। संस्थान ने फैकल्टी की उपलब्धता बढ़ाने, विभागों को सुदृढ़ करने, अस्पताल सेवाओं का विस्तार करने और विद्यार्थियों को बेहतर क्लीनिकल एक्सपोजर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया। यही कारण रहा कि राष्ट्रीय स्तर की कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद 150 सीटों का नवीनीकरण संभव हो सका।
100 से 150 सीटों तक का सफर आसान नहीं था
मेडिकल शिक्षा के जानकारों के अनुसार किसी भी मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या बढ़ाना केवल भवन निर्माण का विषय नहीं होता। इसके लिए एनएमसी के दर्जनों मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। पर्याप्त प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, अस्पताल में निर्धारित संख्या में मरीज, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, उपकरण, ट्रॉमा सेवाएं, ब्लड बैंक, ऑपरेशन थिएटर और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं सहित कई मापदंड पूरे करने होते हैं।
सिम्स ने इन सभी क्षेत्रों में लगातार सुधार करते हुए पहले सीट विस्तार का सफर तय किया और अब 150 सीटों के नवीनीकरण के साथ अपनी क्षमता को फिर राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित किया है।
डीन डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के नेतृत्व में मजबूत हुई व्यवस्था
संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के नेतृत्व में अस्पताल प्रबंधन, शैक्षणिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार के प्रयास किए गए। विभागाध्यक्षों, चिकित्सा शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से संस्थान ने निरीक्षण की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कीं।
डॉ. मूर्ति ने कहा कि 150 सीटों की मान्यता का नवीनीकरण पूरे सिम्स परिवार के लिए गर्व का विषय है। यह संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, समर्पित शिक्षकों, आधुनिक संसाधनों और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं को मिली राष्ट्रीय मान्यता है।
हर दिन हजारों मरीज, इसलिए मजबूत है मेडिकल ट्रेनिंग
सिम्स अस्पताल केवल मेडिकल कॉलेज नहीं बल्कि बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा शासकीय चिकित्सा संस्थान भी है।
यहां प्रतिदिन—
2,000 से 2,500 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं।
लगभग 900 मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहकर इलाज कराते हैं।
इतनी बड़ी मरीज संख्या मेडिकल विद्यार्थियों को व्यापक क्लीनिकल एक्सपोजर प्रदान करती है। मेडिकल शिक्षा में वास्तविक मरीजों के बीच प्रशिक्षण को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और यही सिम्स की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
आधुनिक सुविधाओं से लगातार मजबूत हो रहा संस्थान
बीते वर्षों में सिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
इनमें प्रमुख हैं—
अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं
आधुनिक ट्रॉमा सेंटर
24 घंटे संचालित ब्लड बैंक
सुपर स्पेशियलिटी विभाग
उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं
बेहतर ऑपरेशन थिएटर
आधुनिक चिकित्सा उपकरण
इन सुविधाओं का लाभ मरीजों के साथ-साथ मेडिकल विद्यार्थियों को भी मिलता है।
प्रदेश के विद्यार्थियों को अपने राज्य में मिलेगा बेहतर अवसर
150 सीटों के नवीनीकरण का सबसे बड़ा लाभ छत्तीसगढ़ के उन विद्यार्थियों को मिलेगा जो अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
एनएमसी की मंजूरी से यह सुनिश्चित हो गया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र में भी छात्रों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मेडिकल शिक्षा, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और बेहतर क्लीनिकल प्रशिक्षण उपलब्ध रहेगा।
सिर्फ मेडिकल कॉलेज नहीं, जनस्वास्थ्य का बड़ा केंद्र भी है सिम्स
सिम्स चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्व भी निभा रहा है।
संस्थान में—
थैलेसीमिया मरीजों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है।
सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जाता है।
गंभीर मरीजों को चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं मिलती हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्थान ने 10,043 यूनिट रक्त संग्रह कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की, जो प्रदेश में रक्तदान और रक्त उपलब्धता की मजबूत व्यवस्था को दर्शाती है।
एनएमसी की मंजूरी क्यों मानी जा रही है बड़ी उपलब्धि
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का निरीक्षण मेडिकल कॉलेजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता परीक्षण माना जाता है। इसमें फैकल्टी, अधोसंरचना, अस्पताल सेवाएं, मरीजों की संख्या, मेडिकल रिकॉर्ड, प्रयोगशालाएं, लाइब्रेरी, शोध गतिविधियां और शैक्षणिक व्यवस्था सहित अनेक पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है।
150 सीटों का नवीनीकरण इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि सिम्स ने इन राष्ट्रीय मानकों का सफलतापूर्वक पालन किया है।
सिम्स एक नजर में
एमबीबीएस सीटें (2026-27): 150
प्रतिदिन ओपीडी: 2,000–2,500 मरीज
भर्ती मरीज: लगभग 900
24×7 ब्लड बैंक
आधुनिक ट्रॉमा सेंटर
सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं
2025-26 रक्त संग्रह: 10,043 यूनिट
थैलेसीमिया एवं सिकल सेल मरीजों को निःशुल्क रक्त एवं उपचार
सिम्स परिवार में उत्साह
इस उपलब्धि पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, सभी विभागाध्यक्षों, चिकित्सा शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त की। संस्थान में इसे टीमवर्क, अनुशासन और लगातार किए गए सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह मान्यता सिम्स की शैक्षणिक विश्वसनीयता को और मजबूत करती है तथा प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।

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