बिलासपुर। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में चिकित्सकों के सम्मान, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा सेवा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों ने मानवता की निस्वार्थ सेवा को चिकित्सा पेशे का सर्वोच्च धर्म बताते हुए मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को दोहराया। इस दौरान वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान किया गया, रक्तदान शिविर आयोजित हुआ और ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान भी चलाया गया।
डॉ. बिधान चंद्र राय की स्मृति में मनाया गया राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे भारत रत्न डॉ. बिधान चंद्र राय की जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष 1 जुलाई को मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह दिवस प्रत्येक चिकित्सक के लिए आत्मचिंतन और आत्ममंथन का अवसर होता है। इससे डॉक्टरों को पीड़ित मानवता की सेवा के प्रति अपने दायित्वों को और अधिक मजबूती से निभाने की प्रेरणा मिलती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
डॉक्टर्स डे के अवसर पर सिम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान ग्रामीणों को विभिन्न बीमारियों की रोकथाम, स्वच्छता, संतुलित जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व की जानकारी दी गई।
रक्तदान शिविर और वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान
कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सकों एवं अन्य लोगों ने स्वैच्छिक रक्तदान किया। इसके साथ ही संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान कर चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान को सराहा गया। चिकित्सा सेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श भी किया गया, जिसमें समाज के प्रति डॉक्टरों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।
सभी विभागों में हुआ चिकित्सकों का सम्मान
सिम्स के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि पूरे संस्थान में डॉक्टर्स डे उत्साहपूर्वक मनाया गया। सभी विभागों में चिकित्सकों का सम्मान किया गया तथा उन्हें मरीजों की बेहतर और संवेदनशील सेवा के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि डॉ. बिधान चंद्र राय का जीवन प्रत्येक डॉक्टर के लिए प्रेरणास्रोत है और उनकी सेवा भावना आज भी चिकित्सा जगत के लिए आदर्श बनी हुई है।
मरीज की जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति नहीं, उपचार सबसे पहली प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों ने कहा कि डॉक्टर के लिए मरीज की जाति, धर्म, वर्ग या आर्थिक स्थिति का कोई महत्व नहीं होता। उनका पहला और सबसे बड़ा उद्देश्य मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराकर स्वस्थ करना होता है। इसी विश्वास और सेवा भावना से डॉक्टर और मरीज के बीच मजबूत संबंध स्थापित होता है तथा समाज में चिकित्सा पेशे के प्रति सम्मान बना रहता है।
स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता बनाने की अपील
इस अवसर पर डॉ. ब्रजेश पटेल ने लोगों से स्वास्थ्य को जीवन की पहली प्राथमिकता बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि “पहला सुख निरोगी काया” केवल कहावत नहीं बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। स्वस्थ शरीर होने पर व्यक्ति अपने सभी लक्ष्य प्राप्त कर सकता है, जबकि स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद जीवन की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। उन्होंने नियमित व्यायाम, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण तथा मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार स्वस्थ समाज ही समृद्ध राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव होता है।
चिकित्सा सेवा के प्रति समर्पण दोहराया
डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से चिकित्सकों ने चिकित्सा सेवा को मानवता की सेवा बताते हुए मरीजों के प्रति समर्पण, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी निभाने के अपने संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम में चिकित्सा सेवा, जनस्वास्थ्य, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता और समाज के प्रति डॉक्टरों की भूमिका को केंद्र में रखते हुए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।



