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दो मिनट के वायरल वीडियो से फिर खुली नगर निगम की दो साल पुरानी फाइल: पूर्व महापौर पर ₹1.15 करोड़ लेने का आरोप, संपदा अधिकारी दूसरी बार निलंबित

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
8 Min Read

बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की बेशकीमती जमीनों की बिक्री से जुड़ा करीब दो साल पुराना विवाद एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। इस बार पूरे मामले को दो मिनट के एक वायरल वीडियो ने फिर से सुर्खियों में ला दिया है। वीडियो सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया है। यह दूसरी बार है जब इसी विवाद से जुड़े मामलों में उन पर निलंबन की कार्रवाई हुई है।


नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि वायरल वीडियो, टेंडर प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति वीडियो की सत्यता, टेंडर प्रक्रिया में हुई कार्रवाई और कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों की विस्तृत जांच करेगी।

क्या कहा महापौर ने सुनिए….


दो साल पुराना जमीन बिक्री विवाद फिर चर्चा में
पूरा मामला नगर निगम की व्यापार विहार स्थित लगभग 41 हजार वर्गफीट व्यावसायिक भूमि की बिक्री से जुड़ा है। मार्च 2024 में निगम ने इस जमीन की बिक्री के लिए टेंडर जारी किया था। विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि पूरी जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित करने के बजाय एकमुश्त बेचने की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
उस समय आरोप लगे थे कि इस व्यवस्था से आम निवेशकों और छोटे खरीदारों को बाहर कर बड़े कारोबारी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
बाजार मूल्य से आधी कीमत पर जमीन बेचने का आरोप
विवाद का दूसरा बड़ा कारण जमीन की कीमत रही। उस समय व्यापार विहार क्षेत्र में व्यावसायिक भूमि का बाजार मूल्य लगभग ₹10 हजार प्रति वर्गफीट बताया जा रहा था, जबकि निगम ने टेंडर में करीब ₹4500 प्रति वर्गफीट की दर निर्धारित की थी।
यानी बाजार मूल्य से लगभग आधी कीमत पर नगर निगम की बहुमूल्य जमीन बेचने की तैयारी पर गंभीर सवाल उठे थे। इसको लेकर विपक्ष, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी।
एमआईसी से मिली मंजूरी, लेकिन बाद में टेंडर हुआ निरस्त
आरोपों के बावजूद यह प्रस्ताव तत्कालीन मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) से स्वीकृत हो गया था। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद तत्कालीन नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने पूरे टेंडर को निरस्त कर दिया था।
इसी प्रकरण में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को पहली बार निलंबित किया गया था।
वायरल वीडियो ने फिर खोली पुरानी फाइल
अब सोशल मीडिया पर वायरल हुए करीब दो मिनट के वीडियो ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
आरोप है कि वीडियो में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन कथित रूप से टेंडर दिलाने के एवज में हुए ₹1 करोड़ 15 लाख के लेन-देन का जिक्र करते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो वायरल होते ही नगर निगम प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से देवांगन को दूसरी बार निलंबित कर दिया तथा पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी।
शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप
कथित शिकायत के अनुसार करीब दो वर्ष पहले गणेश ट्रेडर्स के संचालक मोनू अग्रवाल को नगर निगम का विवादित टेंडर मिला था।
शिकायत में दावा किया गया है कि तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने मुकेश पाठक के माध्यम से मोनू अग्रवाल की मुलाकात तत्कालीन महापौर रामशरण यादव से कराई।
आरोप है कि महापौर निवास पर टेंडर को एमआईसी से मंजूरी दिलाने के बदले ₹1.15 करोड़ देने की सहमति बनी।
शिकायत के मुताबिक रकम किस्तों में दी गई—
पहली किस्त – ₹50 लाख
दूसरी किस्त – ₹50 लाख
तीसरी किस्त – ₹12 लाख
अंतिम किस्त – ₹3 लाख (महापौर के निर्देश पर मुकेश पाठक के माध्यम से)
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मुकेश पाठक मौजूद थे।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक जांच में नहीं हुई है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
बताया जा रहा है कि टेंडर को एमआईसी से मंजूरी मिलने के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद संबंधित पक्ष न्यायालय पहुंचा और मामला वर्तमान में हाईकोर्ट में लंबित बताया जा रहा है।
जांच समिति करेगी वीडियो की फॉरेंसिक पड़ताल
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।
उच्च स्तरीय समिति निम्न बिंदुओं की जांच करेगी—
वायरल वीडियो की वास्तविकता
वीडियो में छेड़छाड़ या एडिटिंग हुई या नहीं
टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं
कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों की सत्यता
संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
दूसरी बार निलंबित हुए राजेश देवांगन
राजेश देवांगन इससे पहले भी इसी जमीन आवंटन विवाद में निलंबित किए जा चुके हैं।
अब वायरल वीडियो सामने आने के बाद उन्हें दूसरी बार निलंबन का सामना करना पड़ा है, जिससे यह मामला फिर प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है।
राजेश देवांगन बोले— वीडियो फर्जी और एडिटेड
पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने वायरल वीडियो को पूरी तरह फर्जी और एडिटेड बताया है।
उन्होंने कहा कि—
“मैंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को कोई शिकायत नहीं दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पूरी तरह एडिटेड है। मेरी छवि खराब करने की साजिश की जा रही है। वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ जल्द कानूनी कार्रवाई करूंगा।”
पूर्व महापौर रामशरण यादव ने आरोपों को बताया निराधार
पूर्व महापौर रामशरण यादव ने भी अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा—
“इस मामले में लगाए जा रहे सभी आरोप दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और तथ्यहीन हैं। पहले भी पुलिस और प्रशासन स्तर पर शिकायतें हुई थीं। जांच के बाद किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार सामने नहीं आया था।”
महापौर पूजा विधानी का बड़ा बयान
वर्तमान महापौर पूजा विधानी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान जमीन और टेंडर से जुड़े कई मामलों की दोबारा जांच कराई जाएगी।
उनके अनुसार—
“पूर्ववर्ती कांग्रेस कार्यकाल में जमीन और टेंडर से जुड़े बड़े घोटाले हुए हैं। ऐसी सभी फाइलें दोबारा खोली जाएंगी। विशेष जांच टीम बनाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
अब सबसे बड़े सवाल
क्या वायरल वीडियो असली है या एडिटेड?
₹1.15 करोड़ के कथित लेन-देन के आरोपों में कितना दम है?
बाजार मूल्य से आधी कीमत पर टेंडर क्यों जारी किया गया?
पूरी जमीन एकमुश्त बेचने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया?
एमआईसी ने किन आधारों पर प्रस्ताव को मंजूरी दी?
यदि प्रक्रिया सही थी तो बाद में टेंडर निरस्त क्यों करना पड़ा?
दूसरी बार निलंबन के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी?
हाईकोर्ट में लंबित मामले पर इस नई जांच का क्या प्रभाव पड़ेगा?
फिलहाल स्थिति
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों ने आरोपों से इनकार किया है। अब सभी की निगाहें नगर निगम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि दो साल पुरानी यह फाइल केवल राजनीतिक विवाद थी या वास्तव में नगर निगम की जमीनों के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं।

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