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25 साल का भरोसा, लाखों मरीजों का सहारा.. सिम्स बिलासपुर की गौरवशाली यात्रा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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क्या कहना है अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर लखन सिंह का….

न्यूज़ डॉन छत्तीसगढ़ डॉट कॉम पर सिम्स की 25 वर्षीय यात्रा, उपलब्धियों, चुनौतियों, स्वास्थ्य सेवाओं, व्यवस्थागत खामियों, मरीजों के अनुभवों, चिकित्सा शिक्षा, संसाधनों और भविष्य की संभावनाओं पर आधारित 25 एपिसोड की विशेष श्रृंखला प्रस्तुत की जाएगी। इस विशेष श्रृंखला में सिम्स के गौरवशाली सफर से लेकर जमीनी हकीकत तक हर पहलू को तथ्यों और जनसरोकार के साथ सामने लाया जाएगा।

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मानचित्र पर यदि किसी संस्थान ने बीते 25 वर्षों में अपनी अलग पहचान बनाई है, तो वह है सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान), बिलासपुर। चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक उपचार, गरीब मरीजों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के कारण सिम्स आज न केवल बिलासपुर संभाग बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक भरोसेमंद चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है।
सिम्स की स्थापना के समय जहां प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या लगभग 300 के आसपास थी, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 2000 से अधिक मरीज प्रतिदिन तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल संख्या नहीं, बल्कि आम जनता के बढ़ते विश्वास और संस्थान की सेवाओं की स्वीकार्यता का प्रमाण भी है।
लाखों मरीजों का बना जीवनदाता
बीते 25 वर्षों में लाखों मरीजों ने सिम्स से उपचार प्राप्त किया है। संभाग के दूरस्थ गांवों, आदिवासी अंचलों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह संस्थान स्वास्थ्य सेवा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
आयुष्मान भारत योजना और अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को महंगे उपचार की सुविधा बिना आर्थिक बोझ के प्राप्त हुई है। गंभीर बीमारियों से लेकर जटिल सर्जरी तक की सेवाएं यहां उपलब्ध होने से मरीजों को महानगरों की ओर पलायन की आवश्यकता कम हुई है।
ओपीडी से जांच तक कई गुना बढ़ी क्षमता
सिम्स में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार लगातार हुआ है। जहां एक समय विभिन्न जांचों की संख्या प्रतिदिन लगभग 200 के आसपास थी, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा 1500 के करीब पहुंच गया है।
संस्थान में 200 से अधिक प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और विशेष जांचों की उपलब्धता ने मरीजों को एक ही परिसर में समग्र चिकित्सा सुविधा प्रदान की है।
आधुनिक तकनीक से सुसज्जित चिकित्सा सेवाएं
स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ सिम्स ने भी अपने संसाधनों का निरंतर विस्तार किया है। संस्थान में आधुनिक सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, आईसीयू सुविधाएं, मॉनिटरिंग सिस्टम, उन्नत ऑपरेशन थिएटर और विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं।
इन संसाधनों के माध्यम से जटिल रोगों की पहचान और उपचार अधिक प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता ने सिम्स को प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की श्रेणी में स्थापित किया है।
चिकित्सा शिक्षा का मजबूत केंद्र
सिम्स केवल अस्पताल ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। संस्थान ने वर्षों में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
जहां शुरुआत स्नातक स्तर की शिक्षा से हुई, वहीं आज विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। विभिन्न विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और व्यवहारिक अनुभव प्रदान कर रही है।
भविष्य के चिकित्सकों को तैयार करने में सिम्स की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। यहां से शिक्षा प्राप्त कर चुके अनेक चिकित्सक प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों का समर्पण
सिम्स की सफलता के पीछे चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशासनिक अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों की उपलब्धता ने मरीजों को बेहतर उपचार विकल्प प्रदान किए हैं।
आपातकालीन चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, हड्डी रोग, हृदय रोग सहित अनेक विभागों में लगातार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
शोध और अकादमिक गतिविधियों में भी पहचान
चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान गतिविधियों को भी संस्थान में प्रोत्साहित किया गया है। विभिन्न विभागों द्वारा शोध कार्य, वैज्ञानिक प्रस्तुतियां और अकादमिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में नवीन जानकारियों का आदान-प्रदान होता है।
जनस्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान
कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सिम्स ने अग्रिम पंक्ति में रहकर अपनी भूमिका निभाई। महामारी के दौरान उपचार, जांच, निगरानी और जनजागरूकता में संस्थान की सेवाएं उल्लेखनीय रहीं।
इसके अलावा विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों, जागरूकता कार्यक्रमों और विशेष चिकित्सा अभियानों के माध्यम से भी सिम्स ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
25 वर्षों की उपलब्धियों का प्रतीक
सिम्स की 25 वर्षों की यात्रा केवल एक संस्थान की विकास गाथा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के विश्वास, चिकित्सकों के समर्पण और चिकित्सा शिक्षा की निरंतर प्रगति की कहानी है।
300 मरीजों की ओपीडी से 2000 से अधिक मरीज प्रतिदिन तक पहुंचना, सीमित जांच सुविधाओं से 200 से अधिक प्रकार की जांचों तक विस्तार, यूजी से पीजी शिक्षा का विकास और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता इस गौरवशाली यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
आज सिम्स बिलासपुर स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और जनविश्वास का एक सशक्त केंद्र बनकर अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है।

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