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भाजपा ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, कांग्रेस पर साधा निशाना

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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प्रेमप्रकाश पाण्डेय और मुकेश शर्मा बोले- सत्ता बचाने के लिए कुचले गए नागरिक अधिकार, नई पीढ़ी को बतानी होगी लोकतंत्र की कीमत
बिलासपुर। 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। भाजपा नेताओं ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को कुचल दिया था।
भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर संविधान की धारा-352 के तहत देश में आपातकाल लागू किया था। उन्होंने कहा कि 21 महीने तक चले इस दौर में चुनाव स्थगित कर दिए गए, नागरिक स्वतंत्रताओं को समाप्त कर दिया गया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंचाई गई।
पाण्डेय ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी आपातकाल को भारतीय इतिहास का काला अध्याय बताया था। उस समय सत्ता के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं को बिना कारण जेलों में बंद कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला आने के बाद सत्ता पर संकट मंडराने लगा था, जिसके बाद आपातकाल का रास्ता चुना गया।
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों का किया जिक्र
भाजपा नेताओं ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, अरुण जेटली, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, शरद यादव सहित हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ीं।
मीडिया पर सेंसरशिप का आरोप
प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला हुआ। मीडिया पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी और अखबारों के प्रकाशन पर नियंत्रण स्थापित किया गया था। पत्रकारों की गिरफ्तारियां हुईं और विदेशी पत्रकारों पर भी प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ उस दौर में पूरी तरह दबाव में था।
भाजपा ग्रामीण ने भी आयोजित की प्रेस वार्ता
इधर भाजपा बिलासपुर ग्रामीण द्वारा आयोजित अलग प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में डालकर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया।
मुकेश शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आपातकाल की घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रही है, ताकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के प्रति जागरूकता बनी रहे।
मोदी सरकार को बताया लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आज भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

क्या था आपातकाल?
25 जून 1975 को देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया।
यह अवधि 21 मार्च 1977 तक चली।
इस दौरान मौलिक अधिकारों पर कई प्रतिबंध लगाए गए।
विपक्षी नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुईं।
प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई।
आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा।
प्रमुख चेहरे रहे मौजूद
भाजपा कार्यालय की प्रेस वार्ता में
प्रेमप्रकाश पाण्डेय
दीपक सिंह
सोमेश तिवारी
गुलशन ऋषि
अजीत सिंह भोगल
के.के. शर्मा
दुर्गेश पाण्डेय
भाजपा ग्रामीण की प्रेस वार्ता में
मुकेश शर्मा
डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी
राजा पाण्डेय
जनक देवांगन
प्रणव शर्मा
पवन कश्यप
मोनू रत्नाकर श्रीवास
शैलू गोरख
कमल पटेल

“आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय था, जिसमें नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन किया गया।” — प्रेमप्रकाश पाण्डेय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
“लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हजारों कार्यकर्ताओं का बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता।” — मुकेश शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा

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