कोटा/बिलासपुर। जनपद पंचायत कोटा में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के खिलाफ शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई अब भाजपा संगठन के भीतर अनुशासन और सत्ता संघर्ष के बड़े विवाद में बदलती दिखाई दे रही है। अध्यक्ष श्रीमती सूरज साधेलाल भारद्वाज के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद भारतीय जनता पार्टी जिला ग्रामीण संगठन ने अपने ही तीन जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल ने जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मनोहर सिंह राज, सभापति रघुबीर आर्मो और सभापति उर्मिला प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा ने कहा- पार्टी को विश्वास में लिए बिना उठाया गया कदम
जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित जनप्रतिनिधियों ने विपक्षी दलों के साथ समन्वय स्थापित कर जनपद अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बिलासपुर कलेक्टर को 10 सदस्यों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपा। भाजपा संगठन ने इसे पार्टी अनुशासन के विरुद्ध माना है।
मोहित जायसवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि लगभग एक वर्ष पूर्व हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान पार्टी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति से अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का निर्वाचन कराया गया था। ऐसे में संगठन को विश्वास में लिए बिना अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना पार्टी अनुशासन का उल्लंघन माना गया है।
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कठोर संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जानकारी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय, संभाग प्रभारी रामू रोहरा, जिला संगठन प्रभारी प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा विधानसभा प्रभारी रामसेवक पैकरा को भी भेज दी गई है।
इस कदम को भाजपा संगठन द्वारा आंतरिक असंतोष और बगावती गतिविधियों पर नियंत्रण की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
22 जून को होगा फैसला, मतदान से तय होगी कुर्सी की किस्मत
कलेक्टर कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन जमा होने के बाद अब राजनीतिक नजरें 22 जून पर टिक गई हैं। इसी दिन सदन में मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी और यह तय होगा कि अध्यक्ष सूरज साधेलाल भारद्वाज अपनी कुर्सी बचा पाती हैं या नहीं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पुष्टि की है कि नियमानुसार निर्धारित तिथि पर मतदान कराया जाएगा।
जनपद पंचायत के भीतर संख्या बल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अध्यक्ष समर्थक और विरोधी खेमा दोनों अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक तस्वीर मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगी।
18 से 20 सदस्य संपर्क से बाहर, बढ़ी राजनीतिक हलचल
अविश्वास प्रस्ताव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उस जानकारी की हो रही है जिसमें बताया जा रहा है कि लगभग 18 से 20 जनपद सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों से बाहर हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
इस घटनाक्रम ने पंचायत राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में सदस्यों की मौजूदगी और अनुपस्थिति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सत्ता पक्ष और विरोधी खेमा दोनों अपने-अपने दावे कर रहे हैं, हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अध्यक्ष खेमा पूरे दिन रहा सक्रिय
शुक्रवार को अध्यक्ष और उनके समर्थकों की गतिविधियां राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी रहीं। सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष समर्थक लगातार संपर्क साधने और समर्थन बनाए रखने की कोशिशों में जुटे रहे।
दिनभर बैठकों और राजनीतिक संवाद का दौर चलता रहा। पंचायत के भीतर बदलते समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए सक्रिय प्रयास किए गए।
इसी बीच अध्यक्ष पक्ष द्वारा कलेक्टर से मुलाकात कर कुछ विरोधी सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी शक्ति परीक्षण से जोड़कर देख रहे हैं।
डेढ़ साल पुराना अध्यक्ष चुनाव फिर चर्चा में
मौजूदा विवाद ने जनपद अध्यक्ष चुनाव के पुराने राजनीतिक अध्याय को भी फिर से चर्चा में ला दिया है।
जानकारों के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के भीतर शुरुआत में करगी क्षेत्र से निर्वाचित जनपद सदस्य रश्मि घनश्याम दीक्षित का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था। लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और निर्दलीय निर्वाचित होकर आईं सूरज साधेलाल भारद्वाज को भाजपा में शामिल कर अध्यक्ष पद के लिए आगे किया गया।
बहुमत के आधार पर सूरज भारद्वाज अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। हालांकि उस समय भी यह फैसला संगठन के भीतर चर्चा और असहमति का विषय बना था। अब अविश्वास प्रस्ताव के बाद वही निर्णय और पुराने राजनीतिक समीकरण फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के बाद नए समीकरणों की तलाश
11 जनपद सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन सौंपे जाने के बाद कोटा जनपद पंचायत की राजनीति पूरी तरह नए मोड़ पर पहुंच गई है।
दोनों खेमे अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव सफल होता है तो अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे सामने आ सकते हैं।
हालांकि फिलहाल कोई भी पक्ष सार्वजनिक रूप से अपने राजनीतिक पत्ते खोलने को तैयार नहीं है।
भाजपा के सामने अनुशासन बनाम सत्ता का सवाल
कोटा जनपद पंचायत का यह विवाद अब केवल अध्यक्ष की कुर्सी तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ भाजपा संगठन अनुशासन का संदेश देने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर उभरे मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं।
कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद यह लड़ाई केवल सदन के संख्या बल की नहीं बल्कि संगठनात्मक नियंत्रण और राजनीतिक संदेश की भी बन गई है।
पूरे जिले की निगाहें कोटा पर
अविश्वास प्रस्ताव, भाजपा के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई, सदस्यों की सक्रियता, संपर्क से बाहर बताए जा रहे जनप्रतिनिधि और 22 जून को प्रस्तावित मतदान ने कोटा जनपद पंचायत को जिले की राजनीति का केंद्र बना दिया है।
आने वाले दिनों में राजनीतिक बैठकों, जोड़-तोड़ और रणनीतिक गतिविधियों के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सभी की नजरें 22 जून को होने वाले शक्ति परीक्षण पर टिकी हैं, जहां सदन का फैसला कोटा जनपद पंचायत की अगली राजनीतिक दिशा तय करेगा।



