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लिवर में छिपा था 12 सेंटीमीटर का ‘साइलेंट खतरा’, सिम्स ने दूरबीन से कर दिखाया वह कारनामा जो बड़े सेंटरों में भी चुनौती; 15 वर्षीय किशोर को मिली नई जिंदगी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि, एक लीटर परजीवी द्रव से भरी विशाल हाइडेटिड सिस्ट का पहली बार सफल लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन
बिलासपुर। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सिम्स चिकित्सालय ने चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए ऐसी जटिल सर्जरी को सफल बनाया है, जिसे विशेषज्ञ भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानते हैं। सिम्स के चिकित्सकों ने लिवर के सबसे ऊपरी और अंदरूनी हिस्से में स्थित लगभग 12 सेंटीमीटर आकार की विशाल हाइडेटिड सिस्ट (Hydatid Cyst) को अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से सफलतापूर्वक निकालकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर छोटी हाइडेटिड सिस्ट का उपचार भी सावधानी और विशेषज्ञता की मांग करता है, लेकिन लिवर के गहरे हिस्से में स्थित इतनी बड़ी सिस्ट को दूरबीन पद्धति से निकालना बेहद जटिल और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इस सर्जरी की सफलता ने सिम्स की सर्जिकल क्षमता और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की प्रभावशीलता को एक बार फिर सामने ला दिया है।
एक साल तक दर्द सहता रहा किशोर, निजी अस्पतालों में भटकने के बाद सिम्स में मिली राहत
सरगांव क्षेत्र के उमरिया निवासी 15 वर्षीय होमराज मिरी पिछले लगभग एक वर्ष से लगातार पेट दर्द की समस्या से परेशान था। दर्द की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण परिजन उसे उपचार के लिए विभिन्न निजी अस्पतालों में लेकर गए। लंबे समय तक इलाज और जांच के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
लगातार उपचार के प्रयासों के कारण परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। अंततः होमराज को उपचार के लिए सिम्स चिकित्सालय लाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसकी विस्तृत जांच कराई।
सीटी स्कैन में सामने आया चौंकाने वाला सच, लिवर में मिली विशाल सिस्ट
सिम्स में चिकित्सकीय परीक्षण और सीटी स्कैन के दौरान डॉक्टरों को जो जानकारी मिली, उसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। जांच में पता चला कि मरीज के लिवर में लगभग 12 सेंटीमीटर आकार की विशाल हाइडेटिड सिस्ट मौजूद है।
चिकित्सकों के अनुसार यह सिस्ट केवल आकार में ही बड़ी नहीं थी, बल्कि इसकी स्थिति भी अत्यंत जटिल थी। सिस्ट लिवर के सबसे ऊपरी और अंदरूनी हिस्से में स्थित थी, जहां तक पहुंचना और सुरक्षित सर्जरी करना किसी भी सर्जन के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।
सिस्ट के भीतर भरा था करीब एक लीटर परजीवी द्रव
जांच के दौरान यह भी पता चला कि सिस्ट के भीतर लगभग एक लीटर परजीवी द्रव भरा हुआ था। यही द्रव मरीज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाइडेटिड सिस्ट के ऑपरेशन में सबसे बड़ा जोखिम इसके भीतर मौजूद द्रव का शरीर में फैलना होता है। यदि ऑपरेशन के दौरान यह द्रव शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाए तो संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। यही कारण है कि इस तरह की सर्जरी में अत्यधिक सावधानी और उच्च स्तरीय तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है।
डॉ. ओम प्रकाश राज और टीम ने स्वीकार की चुनौती
मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश राज के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम गठित की गई। टीम में डॉ. शुभा इक्का सहित अन्य चिकित्सक शामिल थे।
सर्जरी टीम ने मरीज की स्थिति, सिस्ट के आकार और उसकी जटिल लोकेशन का विस्तृत अध्ययन किया और इसके बाद लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
दूरबीन तकनीक से सफल ऑपरेशन, सुरक्षित निकाला गया पूरा परजीवी द्रव
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए सिस्ट तक पहुंच बनाई। इसके बाद सिस्ट के भीतर भरे लगभग एक लीटर परजीवी द्रव को अत्यंत सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।
सर्जरी के दौरान विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया कि सिस्ट का द्रव शरीर के अन्य हिस्सों में न फैले। इसके बाद संक्रमणग्रस्त हिस्से का उपचार कर पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी और जटिल स्थिति वाली हाइडेटिड सिस्ट का दूरबीन पद्धति से सफल ऑपरेशन अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
ऑपरेशन थिएटर में एनेस्थीसिया टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस जटिल सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में डॉ. मिल्टन और उनकी टीम ने मरीज की लगातार निगरानी की।
ऑपरेशन के दौरान मरीज की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। सर्जरी की सफलता में उनके योगदान को भी चिकित्सकों ने अहम बताया।
नर्सिंग स्टाफ का भी रहा अहम योगदान
पूरी प्रक्रिया में सिस्टर इंचार्ज योगेश्वरी एवं नर्सिंग स्टाफ ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। ऑपरेशन से पहले की तैयारी, ऑपरेशन के दौरान सहयोग तथा बाद की देखभाल में नर्सिंग टीम की सक्रिय भूमिका रही।
तेजी से स्वस्थ हुआ मरीज, सामान्य स्थिति में अस्पताल से मिली छुट्टी
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया। चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद होमराज पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर चिकित्सकों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी। वर्तमान में मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है।
क्या है हाइडेटिड रोग, कैसे बनती है यह सिस्ट?
विशेषज्ञों के अनुसार हाइडेटिड सिस्ट एक परजीवी जनित बीमारी है, जो डॉग टेपवर्म नामक परजीवी के संक्रमण से उत्पन्न होती है।
संक्रमित कुत्तों और पशुओं के संपर्क में आने से यह परजीवी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसके बाद रक्त प्रवाह के माध्यम से यह लिवर, फेफड़ों और अन्य अंगों तक पहुंच जाता है, जहां धीरे-धीरे सिस्ट का निर्माण होता है।
समय रहते पहचान और उपचार नहीं होने पर यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता जरूरी : डॉ. रमणेश मूर्ति


सिम्स के अधिष्ठाता एवं माइक्रोबायोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि हाइडेटिड रोग के प्रति विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संक्रमित पशुओं और कुत्तों के संपर्क से फैलने वाली इस बीमारी की समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने सर्जरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी हाइडेटिड सिस्ट का सफल लेप्रोस्कोपिक उपचार सिम्स की विशेषज्ञ चिकित्सा क्षमता और आधुनिक तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रदेश और संभाग के मरीजों का भरोसा होगा और मजबूत : डॉ. लखन सिंह


सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इस उपलब्धि पर पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि सिम्स में जटिल एवं दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है। यह सफलता मरीज-केंद्रित चिकित्सा सेवा, विभागीय समन्वय और तकनीकी दक्षता का परिणाम है। इससे प्रदेश और संभाग के मरीजों का सिम्स पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
एक ऑपरेशन, कई संदेश: तकनीक, टीमवर्क और विशेषज्ञता का सफल संगम
15 वर्षीय किशोर के लिवर में छिपी 12 सेंटीमीटर की विशाल हाइडेटिड सिस्ट, उसके भीतर भरा करीब एक लीटर परजीवी द्रव, जटिल लोकेशन और उच्च जोखिम वाली सर्जरी—इन सभी चुनौतियों के बीच सिम्स की चिकित्सकीय टीम ने जिस दक्षता और सावधानी से ऑपरेशन को सफल बनाया, वह संस्थान की चिकित्सा क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है। यह उपलब्धि न केवल सिम्स बल्कि पूरे संभाग के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा सफलता मानी जा रही है।

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