





बिलासपुर। बिलासपुर जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की नियुक्ति को लेकर शिक्षा विभाग में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्राचार्य कल्याण संघ ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर हाल ही में जारी उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा, मस्तूरी के प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। संघ का आरोप है कि यह नियुक्ति वरिष्ठता के स्थापित नियमों और सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के विपरीत की गई है।
संघ के अध्यक्ष कामेश्वर बैरागी और पदाधिकारियों द्वारा भेजे गए आवेदन में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 जून 2026 को जारी आदेश के तहत रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। संघ का दावा है कि संबंधित अधिकारी को प्राचार्य पद पर मात्र छह माह की वरिष्ठता प्राप्त है, जबकि जिले में 14 से 18 वर्ष तक की वरिष्ठता रखने वाले कई प्राचार्य कार्यरत हैं।
वरिष्ठता नियमों की अनदेखी का आरोप
प्राचार्य कल्याण संघ ने अपने आवेदन में कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 14 जुलाई 2014 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभारी पदों पर नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर की जानी चाहिए। संघ का आरोप है कि उक्त आदेश में इन प्रावधानों की अनदेखी की गई है।
संघ ने यह भी दावा किया है कि इस प्रकार की नियुक्तियों को लेकर पूर्व में न्यायालय भी वरिष्ठता के सिद्धांत को महत्वपूर्ण मान चुका है। ऐसे में कनिष्ठ अधिकारी को जिले जैसे बड़े और संवेदनशील प्रशासनिक पद का प्रभार सौंपना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।
वरिष्ठ प्राचार्यों में असंतोष
ज्ञापन में कहा गया है कि जिले के इतिहास में यह संभवतः पहला अवसर है जब इतने कम अनुभव और वरिष्ठता वाले प्राचार्य को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व दिया गया है। इससे लंबे समय से सेवा दे रहे वरिष्ठ प्राचार्यों के बीच असंतोष और नाराजगी का माहौल बन गया है।
संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग ने वर्ष 2018 के बाद से उप संचालक एवं जिला शिक्षा अधिकारी जैसे पदों पर नियमित पदोन्नति नहीं की है। ऐसे में विभाग को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए थी, न कि वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारी को प्रभारी पद सौंपना चाहिए था।
आदेश निरस्त करने की मांग
प्राचार्य कल्याण संघ ने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर आदेश पर पुनर्विचार करने तथा इसे निरस्त करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह के भीतर मामले में उचित निर्णय नहीं लिया जाता है तो संगठन वैधानिक आंदोलन और न्यायालयीन कार्रवाई का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्राचार्य कल्याण संघ द्वारा लगाए गए आरोप और दावों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है। मामले पर शासन अथवा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

