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कोटा जनपद में भाजपा की ‘घर की बगावत’! अध्यक्ष की कुर्सी पर संकट, 22 जून को होगा शक्ति परीक्षण

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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अविश्वास प्रस्ताव के बाद बदल गए समीकरण, संगठन के बड़े नेताओं ने लिया संज्ञान; अध्यक्ष खेमे की दौड़-धूप तेज
बिलासपुर/करगीरोड। कोटा जनपद पंचायत की राजनीति इन दिनों उफान पर है। भाजपा समर्थित अध्यक्ष सूरज साधेलाल भारद्वाज के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने न सिर्फ जनपद की सत्ता को संकट में डाल दिया है, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही खींचतान और बगावत को भी सतह पर ला दिया है। अब पूरे घटनाक्रम का अगला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 22 जून होगा, जब अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मतदान कराया जाएगा।

अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू होते ही कोटा जनपद पंचायत राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। सत्ता बचाने और सत्ता बदलने की समानांतर कवायदें तेज हो चुकी हैं। एक ओर अध्यक्ष समर्थक खेमे ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर विरोधी सदस्य भी अपनी ताकत को एकजुट बनाए रखने में जुटे हुए हैं।

भाजपा में अंदरूनी बगावत बनी सबसे बड़ा मुद्दा
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि यह लड़ाई विपक्ष बनाम सत्ता की नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर की बगावत की कहानी बनकर उभरी है। अध्यक्ष के खिलाफ जिस तरह जनपद सदस्यों ने मोर्चा खोला है, उसने संगठन के भीतर चल रहे असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक पूरे घटनाक्रम की जानकारी भाजपा संगठन के बड़े नेताओं तक पहुंच चुकी है और मामले को गंभीरता से लिया गया है। जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक राजनीतिक गतिविधियां तेज बताई जा रही हैं। संगठन स्तर पर भी लगातार फीडबैक लिए जाने की चर्चाएं हैं।


22 जून को होगा फैसला, सदन में शक्ति परीक्षण
कलेक्टर कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें 22 जून पर टिक गई हैं। इसी दिन सदन में मतदान के जरिए तय होगा कि अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचा पाती हैं या नहीं।
जनपद पंचायत के भीतर संख्या बल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन का दावा कर रहे हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर मतदान के दौरान ही साफ होगी।
18 से 20 सदस्य संपर्क से बाहर, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा के बीच सबसे ज्यादा हलचल उस खबर ने पैदा की है, जिसमें बताया जा रहा है कि करीब 18 से 20 जनपद सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों से बाहर हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
सदस्यों की अनुपलब्धता को लेकर पंचायत क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों के समर्थक अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कुर्सी बचाने की जंग: शुक्रवार भर सक्रिय रहा अध्यक्ष खेमा
शुक्रवार को अध्यक्ष और उनके समर्थकों की गतिविधियां पूरे दिन चर्चा में रहीं। सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष खेमा लगातार संपर्क साधने और समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगा रहा। राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार बैठकों और संवाद का दौर चलता रहा।
इसी क्रम में अध्यक्ष पक्ष द्वारा कलेक्टर से मुलाकात कर कुछ विरोधी सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इस कदम को भी आगामी शक्ति परीक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
डेढ़ साल पुराना चुनाव फिर चर्चा में
मौजूदा राजनीतिक संकट ने जनपद अध्यक्ष चुनाव के उस पुराने अध्याय को भी फिर से चर्चा में ला दिया है, जब अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा के भीतर अलग-अलग राय सामने आई थीं।
जानकार बताते हैं कि भाजपा की ओर से करगी क्षेत्र से निर्वाचित जनपद सदस्य रश्मि घनश्याम दीक्षित का नाम अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रमुख माना जा रहा था। लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और निर्दलीय निर्वाचित होकर आईं सूरज साधेलाल भारद्वाज को भाजपा में शामिल कर अध्यक्ष पद के लिए आगे किया गया। बहुमत के आधार पर वे अध्यक्ष निर्वाचित हुईं।
उस समय लिया गया यह फैसला संगठन के भीतर चर्चा और असहमति का विषय भी बना था। अब अविश्वास प्रस्ताव के बाद वही पुराने राजनीतिक समीकरण और निर्णय फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के बाद बदलते समीकरण
11 जनपद सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन सौंपे जाने के बाद जनपद पंचायत की राजनीति पूरी तरह नए मोड़ पर पहुंच गई है। सत्ता पक्ष और विरोधी खेमे दोनों अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है तो अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे सामने आ सकते हैं। हालांकि फिलहाल सभी पक्ष सार्वजनिक रूप से अपने पत्ते खोलने से बच रहे हैं।
पूरे जिले की नजर कोटा पर
कोटा जनपद पंचायत का यह सत्ता संघर्ष अब केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। भाजपा के भीतर उभरी बगावत, अविश्वास प्रस्ताव, सदस्यों की सक्रियता और 22 जून को होने वाला मतदान पूरे जिले की राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा के जिला अध्यक्ष मोहित जायसवाल का कहना है कि पार्टी के उच्च पदाधिकारी ने इस पूरे मामले को संज्ञान में लिया है।

कोटा जनपद पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब 22 जून को मतदान होगा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नियमानुसार निर्धारित तिथि पर सदन में मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक निगाहें टिक गई हैं।

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