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मनरेगा के तालाब पर लगी रोक हटाने की मांग: सरपंच ने जनदर्शन में सौंपा आवेदन, रेशम पालन के लिए आरक्षित 20 हेक्टेयर भूमि निरस्त करने की उठाई मांग

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। सीपत क्षेत्र की ग्राम पंचायत दर्राभांठा में मनरेगा के तहत स्वीकृत नए तालाब निर्माण कार्य पर लगी रोक को हटाने और रेशम पालन के लिए आरक्षित भूमि को निरस्त करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।

ग्राम पंचायत दर्राभांठा के सरपंच एनल धृतलहरे ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन सौंपकर तालाब निर्माण कार्य को तत्काल पुनः शुरू कराने तथा पंचायत को भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।सरपंच द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि ग्राम पंचायत दर्राभांठा लंबे समय से जल संकट की समस्या से जूझ रही है। ग्रामीणों की मांग और क्षेत्र में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए शासन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नए तालाब निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की थी। इस परियोजना से एक ओर जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होता।


आवेदन के अनुसार स्वीकृत तालाब निर्माण कार्य को बाद में रेशम पालन परियोजना का हवाला देते हुए रोक दिया गया। सरपंच का आरोप है कि इससे न केवल जल संरक्षण की महत्वपूर्ण योजना प्रभावित हुई है, बल्कि मनरेगा के तहत काम की उम्मीद लगाए बैठे श्रमिकों में भी भारी नाराजगी और आक्रोश है।खसरा नंबर 78 की 20 हेक्टेयर भूमि को लेकर विवाद
सरपंच एनल धृतलहरे ने आवेदन में उल्लेख किया है कि रेशम पालन के नाम पर खसरा नंबर 78 की लगभग 20 हेक्टेयर भूमि आरक्षित कर दी गई है। उनका कहना है कि इस भूमि को आरक्षित रखने से पंचायत की विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि आरक्षण के कारण शासन के संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा है और ग्रामीणों की आवश्यकताओं की अनदेखी की जा रही है।


पंचायत को भूमि उपलब्ध कराने की मांग
जनदर्शन में दिए गए आवेदन के माध्यम से सरपंच ने मांग की है कि मनरेगा के तहत स्वीकृत नए तालाब निर्माण कार्य पर लगी रोक तत्काल हटाई जाए, ताकि जल संरक्षण और रोजगार सृजन से जुड़ा कार्य दोबारा शुरू हो सके। इसके साथ ही रेशम पालन हेतु आरक्षित खसरा नंबर 78 की 20 हेक्टेयर भूमि का आरक्षण निरस्त कर उक्त भूमि पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
पहले भी उठ चुका है मामला
गौरतलब है कि दर्राभांठा में तालाब निर्माण, भूमि आरक्षण और ग्रामीण हितों से जुड़े इस मामले को लेकर पूर्व में भी शिकायतें और आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों द्वारा लगातार जल संकट, मनरेगा कार्य प्रभावित होने तथा पंचायत की विकास योजनाओं में बाधा उत्पन्न होने का मुद्दा उठाया जाता रहा है। अब सरपंच द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में औपचारिक आवेदन दिए जाने के बाद एक बार फिर यह मामला प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों की नजर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि जल संकट और रोजगार से जुड़े इस मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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