

बिलासपुर। खरीफ सीजन से पहले खाद और डीजल की किल्लत को लेकर मंगलवार को कांग्रेस ने जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। किसान कांग्रेस और जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बैलगाड़ी में सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और किसानों की बदहाली को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए खाद, बीज, डीजल और बिजली संकट का तत्काल समाधान करने की मांग की गई।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह बैलगाड़ी यात्रा किसानों की वर्तमान स्थिति का प्रतीक है। सरकार किसानों को आधुनिक कृषि सुविधाएं देने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान खाद के लिए सोसायटियों के चक्कर काट रहा है और डीजल के लिए लंबी कतारों में खड़ा होने को मजबूर है।
बैलगाड़ी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जिस किसान की मेहनत से प्रदेश का अन्न भंडार भरता है, वही आज खाद के एक-एक कट्टे के लिए तरस रहा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि रसूखदार लोग आसानी से खाद हासिल कर लेते हैं, जबकि छोटे और सीमांत किसानों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, जिला किसान कांग्रेस (शहर) के अध्यक्ष योगेश यादव और जिला किसान कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष संतोष बघेल के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि किसान सुबह उम्मीद लेकर घर से निकलता है कि शायद आज उसे डीएपी खाद या डीजल मिल जाएगा, लेकिन दिनभर की मशक्कत के बाद उसके हिस्से में केवल इंतजार और निराशा आती है।
‘तुगलकी फरमान’ बताकर प्रति एकड़ एक बोरी खाद के नियम का विरोध
कांग्रेस ने सरकार द्वारा प्रति एकड़ एक बोरी खाद वितरण की व्यवस्था को किसान विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि खेती की जरूरत जमीन और फसल के अनुसार तय होती है, न कि सरकारी आदेशों से। ऐसे में किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
तीन किश्तों में खाद वितरण पर भी उठाए सवाल
ज्ञापन में पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन किश्तों में खाद देने की व्यवस्था का भी विरोध किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसान खेती का काम छोड़कर बार-बार सोसायटियों के चक्कर नहीं लगा सकता। इसलिए खाद एकमुश्त दी जाए और टोकन व्यवस्था समाप्त की जाए।
डीजल के लिए ट्रैक्टर लेकर पहुंचने की मजबूरी पर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ग्रामीण पेट्रोल पंपों में किसानों को डीजल लेने के लिए ट्रैक्टर लेकर पहुंचना पड़ रहा है और सीमित मात्रा में ही डीजल दिया जा रहा है। भीषण गर्मी में यह व्यवस्था किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। कांग्रेस ने जरकिन और डिब्बों में डीजल देने पर लगी रोक हटाने की मांग की।
मुफ्त बिजली, कालाबाजारी पर रोक और धान का पूरा भुगतान भी मांगों में शामिल
किसान कांग्रेस ने कृषि बिजली की बढ़ी हुई दरें वापस लेने, अघोषित बिजली कटौती बंद करने, खाद की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने और पूरे प्रदेश में एक समान दर लागू करने की मांग की। इसके अलावा कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर 40 हजार रुपए प्रति एकड़ करने, धान की राशि एकमुश्त भुगतान करने तथा कृषि और उद्यानिकी विभाग की लंबित अनुदान राशि जल्द जारी करने की भी मांग रखी गई।
कलेक्ट्रेट परिसर में गूंजे नारे, किसानों के मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं को लेकर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि खाद, डीजल और बिजली संकट का समाधान जल्द नहीं किया गया तो किसान कांग्रेस और जिला कांग्रेस पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होगी।
9 सूत्रीय प्रमुख मांगें
प्रति एकड़ एक बोरी खाद का नियम वापस लिया जाए।
सभी किसानों को एकमुश्त खाद उपलब्ध कराई जाए।
जरूरत के अनुसार खाद-बीज लेने की स्वतंत्रता मिले।
जरकिन में डीजल देने पर लगी रोक हटाई जाए।
कृषि बिजली मुफ्त की जाए और कटौती बंद हो।
खाद की कालाबाजारी पर कार्रवाई हो।
KCC ऋण सीमा 40 हजार रुपए प्रति एकड़ की जाए।
धान की राशि और बोनस का एकमुश्त भुगतान हो।
लंबित अनुदान और सब्सिडी राशि तत्काल जारी की जाए।

