रायपुर। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ इलाके में शीर्ष नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने एक बड़े सर्च ऑपरेशन की शुरुआत की। इस अभियान में नारायणपुर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), कोंडागांव डीआरजी और बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) की संयुक्त टीम ने भाग लिया। जवान जिला मुख्यालय से अलग-अलग टुकड़ियों में सर्चिंग के लिए निकले थे और जंगलों में अभियान चला रहे थे।
मुठभेड़ की शुरुआत
बुधवार दोपहर, सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच अचानक मुठभेड़ शुरू हो गई। यह मुठभेड़ पांच घंटे तक रुक-रुककर चलती रही। मुठभेड़ की तीव्रता को देखते हुए अधिक जवानों को मौके पर भेजा गया। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नक्सली के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई नक्सलियों के हताहत होने की संभावना जताई जा रही है। इस मुठभेड़ में कंकर के रहने वाले एक जवान के शहीद होने की खबर है।नारायणपुर के पुलिस ने मुठभेड़ की पुष्टि की है और बताया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में लगातार नक्सली हमले:
छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ आम हो गई है। राज्य के कई जिले, खासकर दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं।
हालिया मुठभेड़:
1. सुकमा: पिछले महीने सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन जवान शहीद हो गए थे।
2. बीजापुर: यहां पिछले कुछ हफ्तों में लगातार दो मुठभेड़ें हुईं, जिसमें सुरक्षा बलों ने कई नक्सलियों को मार गिराया।
3. दंतेवाड़ा: अप्रैल में हुए नक्सली हमले में 10 डीआरजी जवान शहीद हुए थे।
कारण:
नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन तेज होने से नक्सलियों के ठिकाने उजागर हो रहे हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा नक्सल उन्मूलन अभियान को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिसके कारण आए दिन मुठभेड़ हो रही हैं।
क्या है चुनौती
सुरक्षा बलों के लिए घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण होता है। नक्सली इन इलाकों में स्थानीय भूगोल से परिचित होते हैं, जिसका फायदा उठाकर वे सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करते हैं।
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