

10 करोड़ की जनसहयोग आधारित सुरक्षा क्रांति; हर चौक, हर रास्ता और हर संवेदनशील इलाके पर होगी तकनीक की पैनी निगरानी
अपराध, ट्रैफिक और महिला सुरक्षा के लिए बिलासपुर ने चुना टेक्नोलॉजी का रास्ता, देश की चुनिंदा जनभागीदारी वाली परियोजनाओं में होगा शामिल
बिलासपुर। बदलते समय के साथ अपराध का तरीका बदला है तो अब सुरक्षा का स्वरूप भी बदलने जा रहा है। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर जल्द ही एक ऐसी तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था से लैस होने जा रही है, जो न केवल अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखेगी, बल्कि यातायात व्यवस्था, महिला सुरक्षा और शहरी प्रबंधन को भी नई मजबूती देगी। जनसहयोग से शुरू की जा रही महत्वाकांक्षी ‘त्रिनेत्र’ योजना के तहत अगले छह माह के भीतर शहर में लगभग 1000 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
तारबहार स्थित एकीकृत कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) में आयोजित प्रेस वार्ता में कलेक्टर संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, त्रिनेत्र सेवा समिति के अध्यक्ष रामावतार अग्रवाल और कोषाध्यक्ष प्रवीण झा ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत जानकारी साझा की।
शहर को मिलेंगे 1000 नए ‘डिजिटल चौकीदार’
त्रिनेत्र योजना का सबसे बड़ा आकर्षण शहरभर में लगाए जाने वाले 1000 आधुनिक सीसीटीवी कैमरे हैं। ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि रियल टाइम निगरानी और अपराध की पहचान में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, मुख्य मार्गों, प्रवेश और निकास बिंदुओं, भीड़भाड़ वाले इलाकों तथा संवेदनशील क्षेत्रों को इस निगरानी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसका सीधा असर अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था पर दिखाई देगा।
अपराधियों की हर गतिविधि पर रहेगी नजर
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि त्रिनेत्र योजना प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों की सहभागिता से संचालित होने वाली एक जनहितैषी पहल है। इसका उद्देश्य अपराध की रोकथाम, अपराधियों की शीघ्र पहचान, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करना है।
योजना के तहत लगाए जाने वाले कैमरों में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इनमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे, हाई रिजोल्यूशन बुलेट कैमरे, पीटीजेड कैमरे और लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले विशेष फोकस कैमरे शामिल होंगे।
इन कैमरों की मदद से किसी भी संदिग्ध वाहन, संदिग्ध गतिविधि या आपराधिक घटनाक्रम की पहचान पहले से कहीं अधिक तेजी से की जा सकेगी।
पुलिसिंग का बदलेगा चेहरा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि तकनीक आधारित यह निगरानी तंत्र पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, त्वरित और परिणामकारी बनाएगा।
उन्होंने बताया कि कैमरों के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल नजर रखी जा सकेगी, अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध होंगे और अपराधियों की पहचान में लगने वाला समय कम होगा। चोरी, लूट, सड़क दुर्घटनाओं, असामाजिक गतिविधियों और साइबर अपराध से जुड़े मामलों की निगरानी में भी यह प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा, जिससे सड़क सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
एक कंट्रोल रूम से होगी पूरे शहर की निगरानी
त्रिनेत्र योजना का तकनीकी केंद्र एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम होगा। यहां विशाल वीडियो वॉल डिस्प्ले और आधुनिक सर्वर सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।
इस कंट्रोल सेंटर से एक साथ हजारों कैमरों की निगरानी, डेटा विश्लेषण और रिकॉर्ड प्रबंधन किया जा सकेगा। किसी भी घटना की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने और संबंधित एजेंसियों तक सूचना पहुंचाने की क्षमता भी इस केंद्र में होगी।
शहर की सुरक्षा व्यवस्था का यह केंद्रीय तंत्र चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा।
10 करोड़ की परियोजना, लेकिन सरकारी बजट से नहीं
करीब 10 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसे सरकारी बजट के बजाय जनसहयोग और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से साकार किया जा रहा है।
त्रिनेत्र सेवा समिति के अध्यक्ष रामावतार अग्रवाल ने बताया कि यह देश की उन चुनिंदा परियोजनाओं में शामिल होगी, जहां शहर की सुरक्षा के लिए समाज स्वयं आगे आ रहा है। उद्योगपति, व्यापारी, संस्थाएं और आम नागरिक इस अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज करा सकते हैं।
नागरिकों की भागीदारी से बनेगा सुरक्षा का नया मॉडल
समिति के कोषाध्यक्ष प्रवीण झा ने बताया कि नागरिक और संस्थाएं स्वैच्छिक योगदान अथवा सीएसआर के माध्यम से इस परियोजना का हिस्सा बन सकती हैं।
उन्होंने कहा कि शहर की सुरक्षा केवल प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ त्रिनेत्र योजना को जनभागीदारी का स्वरूप दिया गया है।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, स्मार्ट सिटी प्रबंधन की भी तैयारी
त्रिनेत्र योजना को केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रखा गया है। यह परियोजना शहर के समग्र प्रबंधन में भी मददगार साबित होगी।
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने, सार्वजनिक स्थलों की निगरानी, महिला एवं बाल सुरक्षा को मजबूत करने, दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने तथा शहरी व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखने में यह प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तकनीक, प्रशासन और जनसहयोग के संगम से बिलासपुर अब ऐसे मॉडल शहर की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस चौकियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि शहर का हर कैमरा एक सतर्क प्रहरी की तरह काम करेगा।



