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सुशासन तिहार के मंच पर कांग्रेस का धावा: धरमलाल कौशिक के पहुंचते ही भड़का गुस्सा, नारेबाजी से गूंजा शिविर; पुलिस-कांग्रेसियों में धक्का-मुक्की

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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“सुशासन नहीं, जनसमस्याओं पर जवाब दो”— लक्ष्मीनाथ साहू के नेतृत्व में कांग्रेस का हंगामा, भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने
सिरगिट्टी में सरकारी शिविर बना सियासी रणक्षेत्र, मंच पर चढ़े कांग्रेसी; विधायक धरमलाल कौशिक को घेरने की कोशिश से बढ़ा तनाव


बिलासपुर। सरकार के बहुप्रचारित “सुशासन तिहार” कार्यक्रम को लेकर शनिवार को सिरगिट्टी में उस समय जबरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तिफरा-सिरगिट्टी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिविर स्थल पर पहुंचकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। देखते ही देखते सरकारी कार्यक्रम विरोध प्रदर्शन में बदल गया। मंच पर चढ़कर नारेबाजी, भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस, विधायक के खिलाफ आक्रोश और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की ने पूरे आयोजन को सियासी संघर्ष का अखाड़ा बना दिया।
नगर निगम प्रशासन द्वारा आयोजित सुशासन शिविर में स्थानीय लोग अपनी समस्याओं और शिकायतों के आवेदन जमा कर रहे थे। इसी दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू और सिरगिट्टी मंडल कांग्रेस अध्यक्ष अजय मनहरे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता शिविर स्थल पहुंच गए।


मंच पर चढ़े कांग्रेसी, सुशासन के दावों को बताया छलावा
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीधे मंच की ओर कूच किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार “सुशासन” के नाम पर केवल प्रचार कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है।


कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि वास्तव में सुशासन होता तो लोगों को अपनी समस्याएं लेकर बार-बार सरकारी शिविरों का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ता। मंच पर पहुंचकर किए गए विरोध ने पूरे आयोजन की दिशा बदल दी और प्रशासनिक अमले के सामने स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई।
भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, बढ़ा सियासी तापमान
कांग्रेसियों के मंच पर पहुंचने और नारेबाजी शुरू करने के बाद वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार कुछ देर के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे और माहौल लगातार गरमाता गया। सरकारी कार्यक्रम में सियासी टकराव ने पूरे आयोजन को विवादों के केंद्र में ला दिया।
पुलिस और कांग्रेसियों में तीखी धक्का-मुक्की
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस बल को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने प्रदर्शनकारी कांग्रेसियों को मंच और शिविर स्थल से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे, जबकि पुलिस उन्हें बाहर निकालने में जुटी थी। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ समय तक शिविर परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही और पुलिस को हालात नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।
लक्ष्मीनाथ साहू के तीखे तेवर, सरकार पर सीधा हमला
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लक्ष्मीनाथ साहू ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सुशासन तिहार केवल एक दिखावटी आयोजन बनकर रह गया है।
उन्होंने कहा कि जो सरकार आम लोगों को बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही है, उसे सुशासन का दावा करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उनके बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने और अधिक आक्रामक अंदाज में नारेबाजी शुरू कर दी।
धरमलाल कौशिक के पहुंचते ही भड़का आक्रोश
घटनाक्रम उस समय और ज्यादा गर्मा गया जब क्षेत्रीय विधायक धरमलाल कौशिक शिविर स्थल पर पहुंचे। विधायक के पहुंचते ही प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ता उनकी ओर बढ़ने लगे।
कांग्रेसियों ने क्षेत्र की समस्याओं, मूलभूत सुविधाओं और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर विधायक से जवाब मांगने की कोशिश की। स्थिति को भांपते हुए पुलिस ने तत्काल सुरक्षा घेरा बनाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया।
विधायक तक पहुंचने से रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। शिविर स्थल सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन तथा भाजपा नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सरकारी मंच से सड़क तक पहुंची राजनीतिक लड़ाई
कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान नहीं बल्कि सरकारी उपलब्धियों का प्रचार करना है। वहीं भाजपा समर्थकों ने कांग्रेस के विरोध को राजनीतिक नौटंकी करार दिया।
इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच सिरगिट्टी का सरकारी शिविर पूरी तरह राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गया, जहां प्रशासनिक कार्यक्रम से अधिक चर्चा विरोध प्रदर्शन, हंगामे और सियासी टकराव की होती रही।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जुटे कांग्रेसी


विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से पार्षद पुष्पेंद्र साहू, पवन साहू, महेश ठाकुर, सुनील पांडेय, नागेश ध्रुव, बंटी सोनी, अरुण नथानी, गोविंद यादव, रामू राव, संजीव पाल, सचिन भवानी, अक्षय नवरंग, वेद रात्रे, अरविंद ओझा, रवींद्र डाहरे, गोविंद मानिकपुरी, लक्ष्मण ध्रुव, विनोद साहू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल रहे।
सरकारी शिविर में हुए इस घटनाक्रम ने सुशासन तिहार को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। मंच पर विरोध, विधायक को घेरने की कोशिश, भाजपा-कांग्रेस टकराव और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की पूरे दिन शहर की राजनीति का सबसे चर्चित घटनाक्रम बना रहा।

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