
वार्ड-62 और 63 में पानी-नाली संकट ने खोली नगर निगम सरकार की पोल, टैंकर के इंतजार में तपती दोपहरी, बरसात में घर बनते तालाब
बिलासपुर। शहर में विकास, अमृत मिशन और स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावों के बीच सरकंडा के वार्ड-62 और वार्ड-63 की तस्वीर भाजपा की नगर निगम सरकार पर सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है। एक तरफ गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं, तो दूसरी तरफ बरसात में नाली और जलनिकासी की बदहाली ऐसी है कि गंदा पानी घरों के भीतर कमर तक भर जाता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह हाल किसी दूरस्थ गांव का नहीं, बल्कि नगर निगम सीमा के उस इलाके का है जहां भाजपा पार्षदों की जिम्मेदारी वाले वार्डों में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे
1 : वार्ड-63 में बारिश आते ही घर बन जाते हैं ‘तालाब’
सरकंडा के वार्ड क्रमांक-63 स्थित बंधवापारा की गीतारजक गली में रहने वाले लोगों ने कलेक्टर को आवेदन देकर अपनी पीड़ा बताई है। रहवासियों के मुताबिक गर्मियों में पानी की किल्लत आम बात हो चुकी है। कई घरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता और लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान रहते हैं।
लेकिन असली मुसीबत बरसात में सामने आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में नाली व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। हल्की बारिश होते ही पूरा मोहल्ला जलमग्न हो जाता है और गंदा पानी घरों के भीतर तक घुस जाता है। कई घरों में कमर तक पानी भरने की स्थिति बन जाती है।
रहवासियों का आरोप है कि पार्षद को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है और गंदगी के बीच बीमारी फैलने का खतरा लगातार बना रहता है।
आवेदन देने वालों में शारदा यादव, सरिता यादव, अनुस्का केवट, मानमती केंवट, गनभा केंवट, राधेश्याम साह, सोनम यादव और बसंत केवट सहित अन्य स्थानीय लोग शामिल हैं।
2 : वार्ड-62 में पानी के लिए हाहाकार, दोपहर में पहुंचा टैंकर
दूसरी तस्वीर वार्ड-62 से सामने आई है, जहां पीने के पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच लोग सुबह से पानी का इंतजार करते रहे और दोपहर में टैंकर पहुंचने के बाद लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड आज तक अमृत मिशन के पानी से वंचित है। इलाके के दो बोर खराब हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने समस्या दूर करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर निगम केवल कागजों में योजनाओं का प्रचार कर रहा है, जबकि जमीन पर लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
‘स्मार्ट सिटी’ के दावे और जमीन पर सड़ांध भरी सच्चाई
शहर में करोड़ों रुपए के विकास कार्यों, स्मार्ट रोड और सौंदर्यीकरण के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन वार्ड-62 और 63 की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयान कर रही है। एक तरफ लोग पीने के पानी के लिए टैंकर का इंतजार कर रहे हैं, दूसरी तरफ बरसात में घरों के भीतर गंदा पानी भरने की नौबत आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अब बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
भाजपा पार्षदों के वार्ड में क्यों फेल हो रही मूलभूत व्यवस्था?
सवाल जो लोगों के बीच चर्चा में हैं
अमृत मिशन के दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहे?
नाली निर्माण और जलनिकासी के नाम पर खर्च हुआ पैसा कहां गया?
हर साल जलभराव के बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
पानी संकट के बावजूद खराब पड़े बोर सुधारने में देरी क्यों?
क्या नगर निगम की प्राथमिकताओं में आम लोगों की बुनियादी जरूरतें शामिल नहीं हैं?
टैंकर, जलभराव और गंदगी… यही है ‘विकास’?
गर्मी में टैंकर और बारिश में जलभराव अब वार्डों की पहचान बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर भाजपा की नगर निगम सरकार में जनता को राहत कब मिलेगी।
शहर के इन वार्डों की तस्वीर फिलहाल यही कह रही है कि विकास के दावों के बीच आम लोग अब भी पानी और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

वार्ड नंबर 63 के पार्षद श्याम साहू का कहना है कि समस्या के निराकरण की कोशिश जल्द की जाएगी।

