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सुशासन के शिविरों में फूटा गुस्सा… सत्ता के गढ़ों में बजने लगी एंटी इनकंबेंसी की घंटी!

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सावधान हो जाइए माननीयबिलासपुर जिले के भाजपा विधायकों के इलाकों से उठी नाराजगी की आवाजें, कहीं सड़क उखड़ी… कहीं तालाब पाटने की साजिश… तो कहीं पानी के लिए ‘महाभारत’
मोहम्मद इसराइल,बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार “सुशासन तिहार” के जरिए सरकार को जनता के दरवाजे तक ले जाने का दावा कर रही है, लेकिन बिलासपुर जिले के भाजपा विधायकों के इलाकों से जो तस्वीरें निकलकर सामने आ रही हैं, वे सत्ता के लिए राजनीतिक चेतावनी जैसी दिखाई देने लगी हैं। बिल्हा, तखतपुर, बेलतरा और शहर के सत्ता प्रभाव वाले इलाकों में सड़क, पानी, बिजली, अवैध कब्जा, घटिया निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर जिस तरह जनता खुलकर नाराजगी जता रही है, उसने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है—क्या भाजपा के गढ़ों में अब एंटी इनकंबेंसी की आहट सुनाई देने लगी है?
सुशासन शिविरों और कलेक्टर जनदर्शन में उमड़ती भीड़ अब सिर्फ आवेदन देने नहीं पहुंच रही, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ जमा होते गुस्से का सार्वजनिक प्रदर्शन करती नजर आ रही है। सबसे बड़ी बात यह मानी जा रही है कि शिकायतें विपक्षी इलाकों से नहीं, बल्कि उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों से सामने आ रही हैं जहां वर्षों से भाजपा का मजबूत राजनीतिक कब्जा रहा है।
धरमलाल कौशिक के गढ़ में टूटी सड़कें, सूखे नल और लो-वोल्टेज का गुस्सा
बिल्हा विधानसभा क्षेत्र, जिसे लंबे समय से वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक का मजबूत क्षेत्र माना जाता है, वहीं अब ग्रामीणों का धैर्य टूटता दिख रहा है। ग्राम पंचायत सेवार से पहुंचे ग्रामीणों ने जनदर्शन में आधा दर्जन से ज्यादा ज्ञापन सौंपकर इलाके की बदहाली की कहानी प्रशासन के सामने रख दी।
सबसे ज्यादा आक्रोश नगपुरा से झाल तक की सड़क को लेकर सामने आया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन सड़क अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बरसात में हालात और भयावह हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की स्वीकृति तक निरस्त हो चुकी है और अब लोगों को दुर्घटनाओं के डर के बीच सफर करना पड़ता है।
लेकिन मामला सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा। भीषण गर्मी में पेयजल संकट ने ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ा दिया। महिलाओं को दूर-दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। बिजली व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने लो-वोल्टेज, बार-बार कटौती और खराब ट्रांसफार्मरों की शिकायत की।
राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा का इतना बड़ा चेहरा करता हो, वहां ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। जनदर्शन में महिलाओं की भारी मौजूदगी को भी सत्ता विरोधी संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
तखतपुर में ‘गौरव पथ’ पर भ्रष्टाचार के आरोप… एक महीने में उखड़ गई 36 लाख की सड़क
तखतपुर विधानसभा क्षेत्र से सामने आया मामला सत्ता और सिस्टम दोनों के लिए असहज सवाल खड़े कर रहा है। मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के तहत ग्राम पंचायत नेवरा में बनी करीब 36 लाख रुपए की सड़क निर्माण के महज एक महीने के भीतर उधड़ने लगी।
ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया कि सड़क निर्माण में निम्न स्तरीय सामग्री का उपयोग किया गया, सड़क की गिट्टियां उखड़ रही हैं और बरसात में सड़क पूरी तरह खराब होने का खतरा है।
ग्रामीणों ने सिर्फ जांच की मांग नहीं की, बल्कि भ्रष्टाचार करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने, अधिकारियों को निलंबित करने और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई तक की मांग कर डाली।
राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो यह मामला इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि तखतपुर क्षेत्र भाजपा के वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह के प्रभाव वाले इलाके के रूप में देखा जाता है। ऐसे में “गौरव पथ” का “गड्ढा मॉडल” बन जाना विपक्ष को बड़ा हमला करने का मौका दे सकता है।
बेलतरा में तालाब पर कब्जे की आशंका… विकास बनाम संरक्षण की लड़ाई तेज
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के खमतराई में तालाब पर मलबा डंपिंग और कथित अतिक्रमण का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब को सुनियोजित तरीके से पाटा जा रहा है ताकि भविष्य में वहां प्लॉटिंग की जा सके।
ग्रामीणों ने इसे सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि इलाके की “जीवन रेखा” बचाने की लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि तालाब आसपास के इलाकों के भूजल स्तर को बनाए रखता है और सैकड़ों परिवारों की जल जरूरतों का आधार है।
सबसे ज्यादा सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि जिस तालाब के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव सीएसआर योजना के तहत पहले से मौजूद है, उसी तालाब में खुलेआम मलबा डंप होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
राजनीतिक हलकों में इसे बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के इलाके में “जमीन बनाम जनता” का नया विवाद माना जा रहा है। जल संरक्षण के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का विरोधाभास अब खुलकर चर्चा में आने लगा है।
मेयर के वार्ड में पानी पर ‘महाभारत’… पीएम आवास में महिलाएं बोलीं- अब जीना मुश्किल
शहर की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा बंधवापारा स्थित प्रधानमंत्री आवास परिसर की तस्वीरों को लेकर हो रही है। यहां रहने वाले लोगों ने पानी की समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जमकर नाराजगी जताई।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुराने और नए आवासों के बीच पानी को लेकर रोज विवाद हो रहा है। नल कनेक्शन नहीं, बोर सुविधा नहीं और साफ-सफाई की हालत खराब है। कई महिलाओं ने कहा कि पानी भरने को लेकर रोज झगड़े की नौबत आ रही है।
सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह माना जा रहा है कि यह पूरा इलाका मेयर पूजा विधानी के प्रभाव क्षेत्र में आता है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास जैसी योजना के लाभार्थियों का खुद कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध जताना सत्ता के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
भीषण गर्मी के बीच पानी को लेकर फूटता गुस्सा नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग खुलकर कह रहे हैं कि योजनाओं के बोर्ड तो लग गए, लेकिन सुविधाएं जमीन पर नहीं उतरीं।
जनदर्शन अब शिकायत मंच नहीं… सत्ता के खिलाफ ‘मूड इंडिकेटर’ बनता नजर आ रहा


बिलासपुर जिले में पिछले कुछ समय से जनदर्शन और सुशासन शिविरों में जिस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, उसने प्रशासनिक बैठकों से ज्यादा राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है।
सड़क, पानी, बिजली, अवैध प्लॉटिंग, तालाबों पर कब्जा, घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अब अलग-अलग घटनाएं नहीं माने जा रहे, बल्कि इन्हें जनता के भीतर बढ़ती नाराजगी की एक श्रृंखला के तौर पर देखा जाने लगा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में सबसे बड़ा संकेत यह है कि शिकायतें अब विपक्षी आरोपों तक सीमित नहीं रहीं। भाजपा के परंपरागत मजबूत इलाकों से ही जनता खुलकर सवाल पूछ रही है। ग्रामीणों और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने इस नाराजगी को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है।
फिलहाल सत्ता पक्ष के लिए यह सिर्फ प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि राजनीतिक तापमान का संकेत भी माना जा रहा है। सुशासन के मंचों पर जनता जिस अंदाज में अपनी नाराजगी दर्ज करा रही है, उसने यह संदेश जरूर दे दिया है कि ज़मीनी मुद्दों की अनदेखी अब सीधे राजनीतिक असर में बदलती दिखाई देने लगी है।

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