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“103 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट, 500 करोड़ निवेश का सपना… और 3.13 करोड़ की डिजिटल डकैती”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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लंदन से आया मैसेज… स्कॉटलैंड से जुड़ा सौदा… और बिलासपुर में बिछा जाल”


व्हाट्सएप–ईमेल–फर्जी बैंकिंग के जाल में फंसा भारत, बिलासपुर से नेशनल साइबर सिंडिकेट का बड़ा खुलासा
बिलासपुर।
विदेशी निवेश, करोड़ों के डिमांड ड्राफ्ट और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के नाम पर रची गई एक खतरनाक और हाईटेक ठगी का पर्दाफाश हुआ है। थाना चकरभाठा पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने व्हाट्सएप, फर्जी ईमेल आईडी और बैंकिंग सिस्टम की बारीक जानकारी का इस्तेमाल कर 3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये की सुनियोजित ठगी को अंजाम दिया।
यह मामला केवल एक व्यक्ति से ठगी का नहीं, बल्कि देशभर में फैलते अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जिसमें विदेशी पहचान, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तीय संस्थाओं के नाम का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है।
“लंदन से आया मैसेज… स्कॉटलैंड से जुड़ा सौदा… और बिलासपुर में बिछा जाल”


पूरे घटनाक्रम की शुरुआत जनवरी–फरवरी 2024 में हुई, जब प्रार्थी के मोबाइल पर एक विदेशी नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। खुद को ग्रेट ब्रिटेन निवासी “डॉ. लोव्हीत” बताने वाले शख्स ने संपर्क साधा और कुछ ही दिनों में “ग्रेस डेविड” नाम की कथित महिला से परिचय कराया, जिसे स्कॉटलैंड का निवासी बताया गया।
इसके बाद शुरू हुआ 500 करोड़ के निवेश का सपना
भारत में कैंसर अस्पताल
ब्लाइंड इंस्टिट्यूट
रियल एस्टेट प्रोजेक्ट
लॉ कॉलेज
और प्रार्थी को इस पूरे प्रोजेक्ट में पार्टनर बनाने का प्रस्ताव
“103 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट: ठगी का मास्टरस्ट्रोक”
10 जून 2024—यह तारीख पूरे खेल का टर्निंग पॉइंट बनी।
ग्रेस डेविड के भारत आने और उसके नाम पर स्कॉटलैंड बैंक से जारी 103 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट क्लियर कराने की कहानी गढ़ी गई।
इसके बाद शुरू हुआ पैसों की मांग का सिलसिला
होटल व ठहरने का खर्च
एंबेसी क्लीयरेंस
बैंक प्रोसेसिंग
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अनुमति
आरबीआई अप्रूवल
कस्टम क्लियरेंस
हर बार एक नया बहाना… हर बार एक नई मांग।
“छोटे ट्रांजैक्शन से शुरू, करोड़ों तक पहुंची ठगी”
पहले प्रार्थी से छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन कराए गए—
31 जुलाई 2024 तक करीब 11.50 लाख रुपये RTGS और ऑनलाइन माध्यम से
फिर अचानक एंट्री होती है असली आरोपी की—
नवीन जून, निवासी सोनीपत (हरियाणा), वर्तमान में बिलासपुर
इसके खाते में अलग-अलग किश्तों में
3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये ट्रांसफर
“बैंकिंग सिस्टम का जानकार… बना साइबर ठग”
जांच में सामने आया कि आरोपी नवीन जून पहले बैंक में डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) रह चुका है।
उसे बैंकिंग प्रक्रियाओं की गहरी जानकारी थी—
और उसी ज्ञान को उसने ठगी का हथियार बना लिया।
खुद ही बनाए फर्जी ईमेल आईडी
खुद को बैंक, एंबेसी और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताया
हर स्टेप पर आधिकारिक प्रक्रिया का भ्रम पैदा किया
पूछताछ में आरोपी ने पूरा अपराध कबूल कर लिया।
“डिजिटल फ्रॉड का हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल कनेक्शन”
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से जब्त किया—


Thar
Hyundai Venue
मोबाइल फोन
लैपटॉप
टैबलेट
यह जब्ती केवल सामान नहीं, बल्कि ठगी के पैसों से खड़ी की गई लाइफस्टाइल की कहानी बयां करती है।
“नेशनल नेटवर्क के संकेत: क्या अकेला नहीं है नवीन?”
पुलिस जांच में यह साफ संकेत मिले हैं कि—
इस पूरे फ्रॉड में अन्य आरोपियों की संलिप्तता संभव है
विदेशी नाम और लोकेशन का इस्तेमाल संगठित गिरोह की ओर इशारा करता है
फर्जी ईमेल और मल्टीपल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल सिस्टमेटिक ऑपरेशन को दर्शाता है
फिलहाल पुलिस अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।
“आईटी एक्ट और BNS की गंभीर धाराओं में केस दर्ज”
इस पूरे मामले में आरोपी के खिलाफ—
BNS की धाराएं 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5)
आईटी एक्ट की धारा 66(घ)
के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
“अदालत में पेशी, न्यायिक हिरासत”
आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की प्रक्रिया जारी है।


“व्हाट्सएप से वॉलेट तक: ठगी का पूरा ब्लूप्रिंट”
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि—
साइबर ठग अब केवल मैसेज नहीं भेजते, बल्कि पूरी कहानी गढ़ते हैं
विदेशी पहचान और बड़े निवेश का लालच बन चुका है नया हथियार
बैंकिंग और सरकारी संस्थाओं के नाम पर विश्वास का शोषण किया जा रहा है

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