बिलासपुर/मस्तुरी। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में सरकारी धान खरीदी व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मस्तुरी क्षेत्र के गतौरा धान खरीदी केंद्र में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन जिम्मेदार पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 919.96 क्विंटल धान का हिसाब नहीं मिला, जिसकी कीमत 28 लाख 51 हजार रुपये आंकी गई है। यह मामला सिर्फ एक केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
कैसे खुली परतें: रिकॉर्ड बनाम हकीकत
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, मस्तुरी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया कि सेवा सहकारी समिति मर्यादित, गतौरा के धान खरीदी केंद्र (पंजीयन क्रमांक 1294) में अनियमितता की आशंका पर संयुक्त जांच दल गठित किया गया।
भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आया कि दस्तावेजों में दर्ज धान की मात्रा और वास्तविक भंडारण में 919.96 क्विंटल का अंतर है। यह अंतर महज लेखा त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित हेरफेर की ओर इशारा करता है।
कौन हैं आरोपी और क्या है भूमिका
पुलिस जांच में जिन पर जिम्मेदारी तय हुई, वे सीधे खरीदी और प्रबंधन से जुड़े पदों पर थे—
कोमल प्रसाद चंद्रकार (46) – संस्था प्रबंधक
राजेन्द्र राठौर (64) – प्राधिकृत अध्यक्ष
हुलेश्वर धीरही (38) – कंप्यूटर ऑपरेटर
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि धान खरीदी प्रभारी लव कुमार यादव की भूमिका भी संदिग्ध है, हालांकि फिलहाल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
किस कानून में हुई कार्रवाई
मामले में थाना मस्तुरी में अपराध क्रमांक 213/2025 के तहत धारा 316(5) बीएनएस के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने धान उपार्जन नीति 2025-26 के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए सरकारी संपत्ति का गबन किया, जिससे शासन को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ।
पुलिस की कार्रवाई: दबिश, पूछताछ और गिरफ्तारी
विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने आरोपियों के निवास पर दबिश दी। हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें आरोपियों ने गड़बड़ी स्वीकार की। इसके बाद 3 अप्रैल 2026 को विधिवत गिरफ्तारी कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
सिस्टम पर सवाल: कहां चूक गया निगरानी तंत्र?
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या धान खरीदी केंद्रों पर डिजिटल और भौतिक स्टॉक का मिलान नियमित रूप से नहीं हो रहा था?
इतनी बड़ी मात्रा में धान का अंतर एक दिन में नहीं, बल्कि लंबे समय में हुआ—तो निगरानी एजेंसियां कहां थीं?
सहकारी समिति, बैंक और प्रशासन के बीच जवाबदेही की श्रृंखला कितनी मजबूत है?
धान खरीदी व्यवस्था पर असर
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सिर्फ आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि किसानों की आय का मुख्य आधार है। ऐसे में इस तरह की गड़बड़ी—
किसानों के भरोसे को कमजोर करती है
सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है
और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने के संकेत देती है
आगे क्या?
फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं। संभावना जताई जा रही है कि जांच का दायरा बढ़ सकता है और अन्य जिम्मेदारों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
यह मामला एक केंद्र से शुरू जरूर हुआ है, लेकिन इसके असर और संकेत पूरे सिस्टम तक जाते दिख रहे हैं।

