Latest news

धर्म स्वातंत्र्य कानून पर बवाल, बिलासपुर से उठी आवाज, सड़क से सदन तक गूंजा विरोध

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
3 Min Read


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को लेकर सियासी हलचल अब सड़कों तक पहुंच गई है। विधानसभा से पारित इस कानून में अवैध धर्मांतरण पर कड़े प्रावधान किए गए हैं। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किए जाने के बाद प्रदेशभर में इसे लेकर बहस तेज हो गई है। कानून के समर्थन और विरोध के बीच अब बिलासपुर में सर्व समाज के लोग एक मंच पर नजर आए।


शहर के अंबेडकर चौक पर शनिवार को विभिन्न समाजों के लोगों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। रैली निकालते हुए प्रदर्शनकारियों ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इस दौरान मसीही, मुस्लिम और हिंदू समाज सहित कई वर्गों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की गई और कानून के प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए गए।


प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि कानून में झूठे आरोपों से बचाव का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे निर्दोष लोगों को परेशान किए जाने की आशंका है। उनका आरोप था कि यह विधेयक लोगों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से लाया गया है और इससे संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन हो सकता है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धर्म को अपनाना हर व्यक्ति का निजी अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप उचित नहीं है। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कानून लाए जा रहे हैं।
इससे पहले रायपुर में भी इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हो चुका है और अब बिलासपुर में हुए इस विरोध के बाद यह मुद्दा पूरे प्रदेश में तेजी से फैलता नजर आ रहा है। अलग-अलग संगठनों और समाजों द्वारा लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
मोहम्मद सिद्धिकी (जिलाध्यक्ष, इस्लामिक हिंद छत्तीसगढ़)
उन्होंने कहा कि कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका दुरुपयोग हो सकता है और इससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
लखन सुबोध (गुरुघासीदास, सेवादास)
उन्होंने विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह समाज में असंतुलन पैदा कर सकता है और लोगों के अधिकारों पर असर डाल सकता है।


श्याममूरत कौशिक (अध्यक्ष, सर्व छत्तीसगढ़िया समाज)
उन्होंने कहा कि सर्व समाज इस मुद्दे पर एकजुट है और कानून के विभिन्न पहलुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इधर, सरकार का कहना है कि यह कानून अवैध धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है और इसका मकसद किसी भी धर्म विशेष को प्रभावित करना नहीं है। वहीं, बढ़ते विरोध के बीच यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में अहम विषय बनता जा रहा है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।