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जंगल लूट का काला कारोबार..ट्रकों में भरकर उड़ाए जा रहे करोड़ों के पेड़, रसोई में पक रहा ‘हिरण’, बिलासपुर–मुंगेली वन अमला सवालों के घेरे में

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सभी फोटो प्रतीकात्मक।

बिलासपुर ,रायपुर, छत्तीसगढ़।

बिलासपुर–मुंगेली अंचल के जंगल इन दिनों संगठित तस्करी, अवैध कटाई और वन्यजीव शिकार के तिहरे हमले से कराह रहे हैं। ट्रकों और पिकअप में भरकर कीमती लकड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं, गांवों के घर ‘मिनी डिपो’ बन चुके हैं और रिसॉर्ट की रसोई तक में वन्यजीवों का मांस पकने के आरोप सामने आ रहे हैं। ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बीच सवाल यह भी तेज हुआ है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में वनोपज और वन्यजीव नेटवर्क कैसे सक्रिय है।


केस–1: उड़नदस्ता का शिकंजा—कहुआ (अर्जुन) की लाखों की खेप ट्रक सहित जब्त
गुरुवार देर रात बिलासपुर वन वृत्त की सीसीएफ उड़नदस्ता टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि प्रतिबंधित कहुआ (अर्जुन) लकड़ी की बड़ी खेप अकलतरा से रायपुर ले जाई जा रही है।
दर्रीडीह–पेण्ड्रीडीह मार्ग पर घेराबंदी कर रात 10 बजे CG 04 PD 1258 ट्रक को रोका गया।
ट्रक से 76 नग कहुआ, 2 नीम, 2 गंधर्व सहित अन्य प्रजाति की लकड़ियां बरामद
चालक वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका
वन अधिनियम 1927, छत्तीसगढ़ वन अधिनियम की धारा 5, 15 व परिवहन नियम 2001 के तहत कार्रवाई
वाहन जब्त कर राजसात की प्रक्रिया शुरू
जब्त ट्रक को कोटा सेल डिपो भेजा गया
कार्रवाई में उड़नदस्ता प्रभारी रामबनवास खैरवार, शिवकुमार नाग, अब्दुल हफीज खान सहित टीम शामिल रही।
केस–2: गोबरी पाट में ‘घर बना गोदाम’—1.75 लाख की लकड़ी जब्त
गांव गोबरी पाट में वन विभाग ने छापा मारकर शत्रुघन बंजारे के घर से अवैध लकड़ी का जखीरा पकड़ा।
जब्त सामग्री:
सागौन बल्ली – 27 नग
साल – 2 नग
नीलगिरी – 19 नग
मिश्रित प्रजाति – 4 नग
चिरान – 193 नग
80 चट्टा, 9 लक्खा आरा
➡️ कुल अनुमानित कीमत: ₹1,75,427
डीएफओ नवीन कुमार के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में देव सिंह मरावी, शिव पैकरा, नरेंद्र बैसवाड़े सहित टीम शामिल रही।
केस–3: कोटा परिक्षेत्र—रात में दबिश, तस्कर फरार, दो पिकअप जब्त
सेमरिया–दानोखार मार्ग, कक्ष क्रमांक P/805 में छापेमारी के दौरान तस्कर वाहन छोड़कर भाग निकले।
जब्ती:
पिकअप CG 13 L 2428 – ₹3 लाख
10 सागौन लट्ठे (0.762 घनमीटर)
पिकअप CG 10 AY 9034 – ₹5 लाख
2 सागौन लट्ठे (0.107 घनमीटर)
वनोपज कीमत: ~₹40 हजार
कार्रवाई वन विकास निगम के अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई।
केस–4: जेवरा जंगल—पुलिस रेड, 5 तस्कर गिरफ्तार
सीपत पुलिस ने 26 फरवरी की रात रेड कर पिकअप CG-11 AB-0612 से सागौन लट्ठे पकड़े।
गिरफ्तार आरोपी:
रामचंद कुर्रे (41)
संतोष कुमार (50)
जय सिंह ओगरे (62)
लिल्लू राम पटेल (56)
रघुवीर सिंह मरावी (40)
जब्ती:
16 सागौन लट्ठे – ₹65,827
डीजल आरा मशीन – ₹6,000
पिकअप – ₹1.5 लाख
➡️ कुल: ₹2,21,827
सभी आरोपी न्यायिक रिमांड पर भेजे गए।
केस–5: रिसॉर्ट की रसोई में ‘हिरण’!—मैनेजर समेत 4 गिरफ्तार
बेलगहना के पास कुरदर वैली रिसॉर्ट में वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन सामने आया।
किचन के बाहर चूल्हे पर कथित हिरण का मांस पकता मिला
पका मांस, कढ़ाई व अन्य सामग्री जब्त
गिरफ्तार: मैनेजर रजनीश सिंह
रमेश यादव
संजय वर्मा
रामकुमार टोप्पो
कुक के मुताबिक मांस जनक बैगा नामक व्यक्ति लाया था, जो फरार है।
मांस की पुष्टि के लिए सैंपल लैब भेजा गया।
जंगलों में ‘सिस्टमेटिक लूट’ का पैटर्न
इन अलग-अलग कार्रवाइयों में एक ही पैटर्न उभरकर सामने आता है—
रात में कटाई, दिन में ट्रांसपोर्ट
गांवों में अवैध स्टॉकिंग
बिना दस्तावेज खुलेआम परिवहन
छापे से पहले सूचना लीक होने की आशंका
बड़े नेटवर्क के संकेत
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक सागौन, साल और कहुआ जैसी बहुमूल्य प्रजातियों की लगातार कटाई हो रही है।
वन्यजीव भी नहीं सुरक्षित—हिरण, जंगली सूअर तक शिकार
लकड़ी तस्करी के साथ-साथ वन्यजीव शिकार के मामले भी सामने आ रहे हैं—
रिसॉर्ट में हिरण का मांस पकने का मामला
जंगलों में जंगली सूअर और अन्य जीवों के शिकार की सूचनाएं
सप्लाई चेन: शिकारी → सप्लायर → होटल/रिसॉर्ट
वन्यजीव संरक्षण कानून के बावजूद इस तरह के मामलों ने निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं।
कानून का फ्रेमवर्क
प्रमुख प्रावधान:
भारतीय वन अधिनियम 1927
छत्तीसगढ़ वन अधिनियम (धारा 5, 15)
छत्तीसगढ़ वन अधिवहन नियम 2001
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
सजा का प्रावधान:
अवैध कटाई/परिवहन: जुर्माना + कारावास
संरक्षित वन्यजीव शिकार: 3 से 7 साल तक की सजा
वाहन और उपकरण जब्ती/राजसात
हालिया घटनाओं का ट्रेंड
ट्रकों से बड़े पैमाने पर लकड़ी जब्ती
गांवों में अवैध भंडारण
रात में कटाई, दिन में ट्रांसपोर्ट
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई बढ़ी
वन्यजीव शिकार के मामले भी समानांतर
सवालों के घेरे में वन अमला
लगातार सामने आ रहे मामलों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं—
इतनी बड़ी मात्रा में कटाई बिना स्थानीय जानकारी कैसे?
परिवहन के दौरान चेकिंग क्यों नाकाम?
क्या अंदरूनी मिलीभगत की आशंका?
रिसॉर्ट तक वन्यजीव मांस पहुंचना कैसे संभव?
बिलासपुर, मुंगेली और आसपास के वन क्षेत्रों में सक्रिय तस्करी नेटवर्क की परतें अब खुलती नजर आ रही हैं, जहां जंगल, वन्यजीव और कानून—तीनों एक साथ दबाव में हैं।

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