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प्रतिबंधित बीयर की बिक्री पर आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: मुख्य विक्रयकर्ता सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया, प्रबंधक को नोटिस

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सोशल मीडिया वीडियो के बाद जांच में खुला मामला; लेबल बदलकर बिक्री के आरोपों पर सियासत भी तेज
रायपुर, बिलासपुर | 9 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित बीयर की बिक्री के मामले में आबकारी विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रीमियम विदेशी मदिरा दुकान राजनांदगांव में सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल बियर के विक्रय का मामला भौतिक जांच में पकड़े जाने के बाद विभाग ने मुख्य विक्रयकर्ता के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। मामले में मुख्य विक्रयकर्ता कैलाश देवांगन को सेवा से पृथक करने और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


इसी प्रकार की अनियमितता राजदीप इंटरप्राइजेस संचालित मदिरा दुकान में पाए जाने पर वहां के प्रबंधक को आबकारी विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
सोशल मीडिया वीडियो के बाद शुरू हुई जांच
प्रभारी सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल बियर कैन से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने प्रीमियम विदेशी मदिरा दुकान राजनांदगांव में संग्रहित मदिरा का भौतिक सत्यापन कराया।
जांच के दौरान मदिरा दुकान के प्रभारी अधिकारी की रिपोर्ट में सामने आया कि उक्त बियर की निर्माण तिथि 15 अक्टूबर 2025 तथा वैधता तिथि 13 अप्रैल 2026 दर्ज है।
हालांकि संबंधित कर्मचारियों को पहले ही इस बियर कैन का विक्रय नहीं करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्देशों के बावजूद इसकी बिक्री की गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए मुख्य विक्रयकर्ता कैलाश देवांगन के खिलाफ सेवा से पृथक करने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई शुरू की गई है।
राजदीप इंटरप्राइजेस के प्रबंधक को नोटिस
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि राजदीप इंटरप्राइजेस मदिरा दुकान को भी उक्त बियर के विक्रय पर रोक संबंधी निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभाग ने दुकान के प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
लेबल हटाने पर सामने आया दूसरा ब्रांड
जांच में यह भी सामने आया कि सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल बियर कैन से लेबल और रैपर हटाने पर अंदर गोल्डन प्राइड प्रीमियम लेजर बियर का लेबल प्रिंट पाया गया।
इस मामले को गंभीर मानते हुए कार्यालय आबकारी आयुक्त, नवा रायपुर ने निर्माता कंपनी मेसर्स माइकल ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कंपनी पर एक लाख रुपये की शास्ति और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। साथ ही संबंधित बियर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हुए दुकानों में बची हुई अविक्रित पेटियों को कंपनी को वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।
वीडियो के बाद सियासत भी गरमाई
इस मामले में राज्य की राजनीति भी गर्म हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के आधार पर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने वीडियो को “शराब सिंडिकेट एक्सपोज़” बताते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में शराब कारोबार में सिंडिकेट बनाकर घोटाला किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह मामला पूरे खेल की शुरुआत है और आगे भी कई खुलासे सामने आ सकते हैं।
“ब्रांड बदलकर बेचने का आरोप”
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वायरल वीडियो में बियर के कैन पर किसी दूसरी कंपनी का स्टीकर चिपकाया गया दिखाई दे रहा है, जबकि अंदर मौजूद बियर किसी और कंपनी की बताई जा रही है।
उनके अनुसार सस्ती बियर को महंगे ब्रांड के नाम पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाने का खेल चल रहा है।
राजनांदगांव से सामने आया पहला मामला
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस कथित खेल का पहला मामला राजनांदगांव जिले से सामने आया है। उनके मुताबिक इस जिले के प्रभारी मंत्री लंबे समय तक विजय शर्मा रहे हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक संरक्षण और सेटिंग के कारण ही यह पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है।
“कमीशन और संरक्षण का खेल”
कांग्रेस का आरोप है कि शराब दुकानों में ब्रांड बदलकर बेचने का यह खेल कमीशन और संरक्षण के दम पर चल रहा है। उनके अनुसार सस्ती बियर पर महंगी बियर का स्टीकर लगाकर उसे बाजार में उतारा जा रहा है और इससे करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री और गृह विभाग की चुप्पी पर सवाल
कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले में राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अफीम की खेती के आरोपों के बाद अब बियर को लेकर सामने आए वीडियो ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी नेताओं के अनुसार शराब के ब्रांड बदलकर करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है और यह सब बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है।
विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने और आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद राज्य में शराब कारोबार और सरकारी दुकानों की कार्यप्रणाली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले को लेकर प्रशासनिक जांच के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।

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