
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में आपराधिक साजिश के खुलासे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने आरोप लगाया है कि जब सत्ताधारी दल के मंडल अध्यक्ष का नाम गंभीर प्रकरण में सामने आया है, तब नेतृत्व की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि क्षेत्र में दहशत का माहौल है, व्यापारी डरे हुए हैं और जनता असमंजस में है—ऐसी स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

मंडल अध्यक्ष पर गंभीर आरोप, सुपारी किलिंग की साजिश का दावा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकिशोर नगर वसंत विहार स्थित एक ज्वेलर्स संचालक पर हुए प्राणघातक हमले और लूटकांड की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बिलासा गुड़ी में पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि गिरोह केवल लूट और चोरी ही नहीं, बल्कि शहर के चर्चित सब्जी कारोबारी एवं नगर निगम के भाजपा पार्षद बंधु मौर्य की कथित सुपारी किलिंग की साजिश में भी शामिल था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 25 लाख रुपए में सुपारी लेने की बात स्वीकार की है, जिसमें 6 लाख रुपए एडवांस के रूप में लिए गए थे।
मामले में भाजपा के बेलतरा पूर्वी मंडल अध्यक्ष राजू सोनकर का नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में हलचल है। वे बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के करीबी माने जाते हैं।
कांग्रेस का हमला: “नेतृत्व जवाब क्यों नहीं देता?”
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बेलतरा विधानसभा में हालात गंभीर हैं। उनका आरोप है कि जब सत्ताधारी पार्टी के मंडल अध्यक्ष पर ही भाजपा के वरिष्ठ नेता की हत्या की सुपारी देने जैसी साजिश रचने का आरोप है, तब चुप्पी क्यों साधी गई है?
उन्होंने सवाल उठाया कि मंडल अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति कौन कर रहा है? पुलिस द्वारा मामले का खुलासा किए जाने के बाद क्या किसी स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश हुई? यदि नहीं, तो फिर संरक्षण किसका है? उन्होंने कहा कि जब अपराध का नाम सत्ता से जुड़े लोगों तक पहुंचे, तब चुप्पी संदेह को और गहरा करती है।
क्षेत्र में दहशत, सियासत में हलचल
घटना के बाद जिले में भय और असुरक्षा का माहौल बताया जा रहा है। व्यापारी वर्ग में चिंता है और राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र, जहां विकास के मुद्दों पर जनादेश मिला था, वहां अब कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस छिड़ गई है।



