19,489 सीटों का प्रकटीकरण; अनियमितताओं पर लगाम, पारदर्शिता पर शासन का जोर
रायपुर, बिलासपुर।20 फरवरी 2026।
शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत राज्य शासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश के लिए केवल कक्षा पहली को ही एकमात्र एंट्री पॉइंट घोषित किया गया है। इस फैसले के साथ सीटों के प्रकटीकरण में हो रही गड़बड़ियों पर रोक लगने का दावा किया गया है। नए नियम के लागू होते ही आरटीई सीटों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
राज्य सरकार ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत यह निर्णय लिया है। शासन का कहना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग समूह के बच्चों को अधिनियम का पूरा लाभ मिलेगा।
तीन एंट्री क्लास की व्यवस्था से हो रहा था खेल
अब तक नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली—तीनों को प्रवेश कक्षा माना गया था। इसी व्यवस्था का कुछ निजी स्कूलों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की बात सामने आई।
कई बड़ी और नामी निजी स्कूल नर्सरी को एंट्री क्लास घोषित कर उसकी सीट क्षमता कम दर्शाते थे।
25% आरटीई सीटें उसी कम संख्या के आधार पर घोषित की जाती थीं।
जबकि वास्तविकता में वही स्कूल कक्षा पहली में 4 से 5 सेक्शन संचालित कर सामान्य विद्यार्थियों को अधिक संख्या में प्रवेश देते थे।
इसका परिणाम यह हुआ कि आरटीई सीटों का प्रकटीकरण वास्तविक क्षमता के अनुरूप नहीं हो पाता था और वंचित वर्ग के बच्चों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता था।
छोटे स्कूलों में भी गड़बड़ी का अलग तरीका
कुछ छोटे निजी स्कूल नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली में से दो कक्षाओं को एंट्री पॉइंट घोषित कर अपनी वास्तविक क्षमता से अधिक सीटें प्रदर्शित करते थे। इससे वे अधिक संख्या में आरटीई प्रवेश लेते थे।
इन स्कूलों का संचालन मुख्यतः शासन की शुल्क प्रतिपूर्ति राशि पर निर्भर रहता था। शैक्षणिक स्तर अपेक्षाकृत निम्न होने के कारण सामान्य वर्ग के विद्यार्थी अन्य स्कूलों में स्थानांतरित हो जाते थे, जिससे वहां आरटीई विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो जाती थी। बार-बार स्कूल बदलने से कमजोर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी।
अब UDISE डेटा से तय होंगी सीटें
शासन ने सत्र 2026-27 से केवल कक्षा पहली को प्रवेश कक्षा घोषित किया है।
अब आरटीई सीटों का निर्धारण यू-डाइस (UDISE) पोर्टल पर दर्ज पिछले वर्ष की कक्षा पहली की प्रविष्ट संख्या के आधार पर किया जा रहा है।
इस बदलाव से:
नोडल अधिकारियों को दी जाने वाली गलत या भ्रामक जानकारी पर अंकुश लगा है।
स्तरहीन निजी स्कूलों के संचालन पर नियंत्रण की स्थिति बनी है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ा है।
आरटीई सीटों में अभूतपूर्व वृद्धि
नए निर्णय का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है—
गत वर्ष कक्षा पहली में केवल 9,375 आरटीई सीटों का प्रकटीकरण हुआ था।
सत्र 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 19,489 हो गई है।
वर्ष 2025-26 में निजी स्कूलों में आरटीई के तहत केजी-2 में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या 35,335 है, जो अगले सत्र 2026-27 में कक्षा पहली में प्रवेश करेंगे।
इस प्रकार सत्र 2026-27 में कक्षा पहली में कुल 54,824 बच्चों को प्रवेश मिलेगा।
यह संख्या गत वर्ष की कुल 53,325 आरटीई सीटों से अधिक है।
फैसले से कुछ निजी स्कूलों में असंतोष
पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने वाले इस निर्णय से कुछ बड़ी और छोटी निजी शालाओं में असंतोष देखा जा रहा है। कारण यह बताया जा रहा है कि अब सीट प्रकटीकरण में की जा रही अनियमितताओं की संभावना समाप्त हो गई है।
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि दुर्बल एवं वंचित वर्ग समूह के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है और शिक्षा के अधिकार को वास्तविक रूप में लागू करना ही उद्देश्य है।
राज्य में शिक्षा व्यवस्था के ढांचे में यह बदलाव सीधे तौर पर प्रवेश प्रणाली, सीट निर्धारण और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा। आंकड़ों में दर्ज बढ़ोतरी इस निर्णय के तत्काल प्रभाव को दर्शा रही है।

