छत्तीसगढ़ में भारत की अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों का ब्लूप्रिंट तैयार, AVIK हाई परफॉर्मेंस लैब का भव्य शुभारंभ


बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में गुरुवार का दिन मील का पत्थर बन गया। बिलासपुर में AVIK स्पोर्ट्स हेल्थ एंड फिटनेस द्वारा स्थापित अत्याधुनिक हाई परफॉर्मेंस लैब एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर का लोकार्पण डिप्टी सीएम श्री अरुण साव ने किया। 11,000 स्क्वायर फुट में फैली यह सुविधा सेंट्रल इंडिया में एथलेटिक डेटा और स्पोर्ट्स साइंस के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी पहल मानी जा रही है। यह कोई सामान्य फिटनेस सेंटर नहीं, बल्कि एक क्लिनिकल स्पोर्ट्स साइंस इकोसिस्टम है, जहां खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस, इंजरी प्रिवेंशन और करियर लॉन्गिविटी को वैज्ञानिक आधार पर नई दिशा दी जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बिरहा विधायक धरमलाल कौशिक ने की। विशेष अतिथियों के रूप में , विधायक तखतपुर श्री धर्मजीत सिंह, विधायक बेलतरा श्री सुशांत शुक्ला, विधायक , विधायक , नगर पालिका अध्यक्ष बिलासपुर श्री विनोद सोनी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी की उपस्थिति रही। दोपहर 12 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में खेल, प्रशासन और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
फिटनेस से आगे, साइंस की ओर मिशन
AVIK हाई परफॉर्मेंस लैब का स्पष्ट मिशन भारतीय खेलों में वर्षों से चली आ रही “ट्रायल एंड एरर” पद्धति को समाप्त कर उसकी जगह बायोमैकेनिकल प्रिसीजन और डेटा-ड्रिवन ट्रेनिंग को स्थापित करना है। यहां खिलाड़ियों को सिर्फ ताकत और स्टैमिना नहीं, बल्कि उनके मूवमेंट पैटर्न, जॉइंट एंगल्स, पावर जनरेशन और इम्पैक्ट एब्जॉर्प्शन तक का वैज्ञानिक विश्लेषण मिलेगा।
इंजरी एपिडेमिक पर सीधा प्रहार
स्पोर्ट्स साइंस से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि भारत में करीब 60 प्रतिशत प्रतिभाशाली खिलाड़ी 21 वर्ष की उम्र से पहले ही क्रॉनिक इंजरी के कारण खेल छोड़ देते हैं। ये चोटें किसी अचानक हुई दुर्घटना का नतीजा नहीं, बल्कि शरीर में मौजूद “पावर लीक्स” और अनदेखी बायोमैकेनिकल खामियों का परिणाम होती हैं। AVIK का विज़न है कि किसी भी एथलीट का करियर ऐसी प्रीवेंटेबल इंजरी के कारण खत्म न हो। हाई-ग्रेड टेक्नोलॉजी की मदद से उन “रेड फ्लैग्स” की पहचान की जाती है, जो दर्द और करियर-एंडिंग इंजरी बनने से पहले ही शरीर में मौजूद रहते हैं।
‘डॉ. अविनाश प्रोटोकॉल’ बना लैब का केंद्र
इस पूरी सुविधा के केंद्र में है DAP – डॉ. अविनाश प्रोटोकॉल, जो एक विशेष डायग्नोस्टिक और करेक्टिव सिस्टम है। इसके तहत
3D मोशन एनालिसिस के जरिए स्प्रिंटिंग या जंप के दौरान हर जॉइंट एंगल की सटीक मैपिंग की जाती है।
फोर्स प्लेट डायग्नोस्टिक्स से यह मापा जाता है कि एथलीट कितनी शक्ति पैदा कर रहा है और उसे जमीन से आने वाले इम्पैक्ट को कैसे एब्जॉर्ब कर रहा है।
न्यूरोमस्क्युलर री-पैटर्निंग के माध्यम से सिर्फ मसल्स नहीं, बल्कि दिमाग और शरीर के बीच तालमेल को ज्यादा कुशल बनाया जाता है, ताकि मूवमेंट सुरक्षित और प्रभावी हो।
प्रोजेक्ट फीनिक्स की शुरुआत, राज्य-स्तरीय असर
इस लोकार्पण के साथ ही प्रोजेक्ट फीनिक्स की शुरुआत भी हुई, जो AVIK की सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी इनिशिएटिव है। इसके तहत राज्य की विभिन्न खेल अकादमियों के साथ मिलकर 10,000 खिलाड़ियों की स्क्रीनिंग की जाएगी और हर खिलाड़ी के लिए एक डिजिटल हेल्थ पासपोर्ट तैयार होगा।
इसके साथ ही साइंटिफिक टैलेंट आइडेंटिफिकेशन के जरिए यह पहचानने में मदद की जाएगी कि किस खिलाड़ी में किस खेल के लिए प्राकृतिक बायोमैकेनिकल क्षमता मौजूद है—जैसे स्प्रिंटिंग, वेटलिफ्टिंग या क्रिकेट।
स्थानीय कोचों के लिए एजुकेशनल आउटरीच प्रोग्राम भी चलाया जाएगा, ताकि उन्हें आधुनिक इंजरी-प्रिवेंशन और परफॉर्मेंस टेक्निक की ट्रेनिंग मिल सके।
संस्थापक का विज़न
कार्यक्रम में AVIK के संस्थापक डॉ. अविनाश जायसवाल ने कहा कि लंबे समय तक एलीट स्पोर्ट्स साइंस महानगरों और विदेशी ओलंपिक सेंटर्स तक सीमित रही। आज वही टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़ तक लाई गई है। उनका लक्ष्य साफ है—अगला ओलंपिक गोल्ड मेडल यहीं, इसी लैब में गढ़ा जाए और ऐसे ‘अनब्रेकबल एथलीट’ तैयार हों, जिनका करियर इंजरी की वजह से बीच में न रुके।
खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस सेंटर के शुरू होने से बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को इंजरी ट्रीटमेंट और परफॉर्मेंस सुधार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित स्पोर्ट्स साइंस सुविधाएं अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होंगी, जिससे युवा खिलाड़ियों को समय, खर्च और संसाधनों—तीनों की बचत होगी।
स्थान और आयोजन
AVIK हाई परफॉर्मेंस लैब एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, तृतीय तल, संजय तरण पुष्कर के पीछे, मुंगेली नाका, बिलासपुर में स्थापित किया गया है। गुरुवार को हुए इस लोकार्पण के साथ छत्तीसगढ़ में खेलों के प्रशिक्षण, इलाज और परफॉर्मेंस की दिशा में एक नया अध्याय शुरू हो गया।



