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राज्यपाल के हाथों ब्रेल पुस्तकों और 3,000 से अधिक ऑडियो बुक्स का विमोचन, अमरदीप भोगल सहित शिक्षकों को मिला सम्मान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर, बिलासपुर।
दिव्यांगजनों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल के अंतर्गत रायपुर स्थित लोकभवन, सिविल लाइन में एक गरिमामय राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए तैयार विशेष शैक्षणिक सामग्री का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर “दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी” तथा “छत्तीसगढ़ के वीर” शीर्षक से प्रकाशित ब्रेल पुस्तकों का विधिवत विमोचन महामहिम राज्यपाल के कर कमलों से संपन्न हुआ। साथ ही दृष्टिबाधित बच्चों के अध्ययन हेतु तैयार की गई 3,000 से अधिक ऑडियो बुक्स का भी एक मंच से लोकार्पण किया गया।
शिक्षा की नई पहल के रूप में प्रस्तुत इन ऑडियो बुक्स में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के सभी विषयों की सामग्री शामिल की गई है। इसके अतिरिक्त प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष प्लेलिस्ट भी तैयार की गई हैं। अध्ययन सामग्री में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विषय, कॉम्पिटिटिव एग्जाम से संबंधित कंटेंट, सरगुजिया कहानियां, छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में सामान्य ज्ञान, हल्बी, पंजाबी एवं छत्तीसगढ़ी भाषाओं में अलग-अलग प्लेलिस्ट उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए सहायक संसाधन, महिला सशक्तिकरण तथा दिव्यांगों और महिलाओं को मिलने वाली सरकारी योजनाओं से संबंधित उपयोगी ऑडियो प्लेलिस्ट भी इसमें सम्मिलित हैं। इस पहल के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर संपूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
इस अभियान की प्रेरणा दुर्ग जिले की शिक्षिका सुश्री के. शारदा को वर्ष 2024 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त होने के पश्चात मिली। दृष्टिबाधित व्यक्तियों के एक समूह से जुड़ने के दौरान उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई कि दृष्टिबाधित बच्चे मुख्य रूप से ऑडियो फॉर्मेट के माध्यम से अध्ययन करते हैं। इसी अनुभव से दृष्टिबाधित बच्चों के लिए शिक्षा को सरल और सुलभ बनाने का विचार सामने आया।
इस विचार को मूर्त रूप देते हुए 25 अक्टूबर 2024 से इस कार्य की औपचारिक शुरुआत की गई। प्रारंभिक चरण में सुश्री के. शारदा ने स्वयं 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। इसके पश्चात राज्य के विभिन्न जिलों के शिक्षकों को इस अभियान से जोड़ा गया, जिनके सामूहिक प्रयासों से ऑडियो बुक्स की संख्या 3,100 से अधिक तक पहुंच गई। इन सभी प्लेलिस्ट को “वर्ल्ड ऑडियो बुक” यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराया गया है। यह संपूर्ण कार्य सेवा भावना और स्वैच्छिक सहभागिता के आधार पर किया गया।
कार्यक्रम के दौरान इस पुनीत कार्य में योगदान देने वाले शिक्षकों को महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा सम्मानित किया गया। इस अभियान में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य का भी उल्लेखनीय योगदान रहा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी सुश्री के. शारदा एवं श्रीमती प्रीति शांडिल्य द्वारा संयुक्त रूप से ब्रेल पुस्तकों का निर्माण कर छत्तीसगढ़ के 20 ब्रेल स्कूलों को 100-100 प्रतियां स्वयं के व्यय पर निःशुल्क उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
राज्य के विभिन्न जिलों के उत्कृष्ट शिक्षकों का एक समूह बनाकर इन ऑडियो बुक्स का निर्माण किया गया है, जिसमें सभी स्तर की विषयवस्तु और सामान्य जानकारी को स्पष्ट और सहज आवाज में रिकॉर्ड कर दृष्टिबाधित बच्चों तक पहुंचाने का कार्य किया गया है।
इस अभियान में शामिल कुल 30 शिक्षकों में से बिलासपुर जिले के चार शिक्षकों — श्रीमती शांति सोनी (व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद), सुश्री चानी एरी (शिक्षक, सेजस पंधी), श्रीमती अमरदीप भोगल (सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला जांजी) तथा श्री सुशील पटेल (व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मिट्ठूनवागांव) को महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा सम्मानित किया गया।

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