बिलासपुर/तिफरा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने और नियमों में किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल भावना को समाप्त कर ग्रामीण मजदूरों से उनका संवैधानिक अधिकार छीन लिया है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिफरा रोड पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ हल्ला बोला।
मनरेगा का नाम बदले जाने के बाद कांग्रेस लगातार इसका विरोध कर रही है, जबकि भाजपा नेता जिलों में जाकर मनरेगा के नए नाम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण के फायदे गिना रहे हैं। भाजपा का दावा है कि बदलाव से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे, वहीं कांग्रेस इसे ग्रामीण गरीबों के हक पर सीधा हमला बता रही है।
तिफरा में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी के ग्राम स्वरोजगार के सपने को साकार करने के लिए मनरेगा कानून पारित किया था। 2006 से लागू इस योजना के तहत अब तक 180 करोड़ से अधिक कार्य दिवस सृजित किए जा चुके हैं और 10 करोड़ से अधिक परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी और कोविड काल में भी मनरेगा ने देश की अर्थव्यवस्था को संभाला। इस योजना की सबसे बड़ी ताकत थी काम की संवैधानिक गारंटी, जिसके तहत मजदूरों को 15 दिन के भीतर रोजगार देना अनिवार्य था, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता था।
लक्ष्मीनाथ साहू ने आरोप लगाया कि नई योजना में सबसे पहले काम मांगने के अधिकार को समाप्त किया गया है। साथ ही ग्राम पंचायतों से काम स्वीकृत करने का अधिकार भी छीन लिया गया है और अब यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहेगा कि कहां काम होगा और कहां नहीं। नए नियमों में न्यूनतम मजदूरी की गारंटी समाप्त होने और मजदूरी तय करने का अधिकार भी सरकार को मिलने की बात कही गई।
उन्होंने बजट प्रावधानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य सरकारों पर बोझ डाला जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों में मनरेगा प्रभावित होगी।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिफरा रोड पर धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल करने की मांग की।



