00 आमरण अनशन की चेतावनी
बिलासपुर। अपने आशियानों को बचाने के लिए शहर के लिंगियाडीह क्षेत्र में पिछले 70 दिनों से महिलाएं, बच्चे, बुज़ुर्ग और गरीब परिवार शांतिपूर्ण महा आंदोलन कर रहे हैं। दशकों से बसे इन परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन आंदोलन के इतने लंबे समय बाद भी शासन-प्रशासन की चुप्पी लोगों के गुस्से और पीड़ा को और गहरा कर रही है। इस संघर्ष में वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल मजबूती से जनता की आवाज़ बनकर सामने आए हैं।
लिंगियाडीह क्षेत्र में नगर निगम द्वारा गार्डन और परिसर निर्माण के नाम पर वर्षों से बसे मकानों को हटाने की तैयारी की जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे 40 से 50 वर्षों से इसी इलाके में रह रहे हैं और उनके पास बिजली कनेक्शन, पानी की सुविधा, राशन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा बना हुआ है।
70 दिनों से जारी इस महा आंदोलन में महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग लगातार धरने पर बैठे हैं। लोगों का आरोप है कि अब तक न तो कोई ठोस संवाद हुआ और न ही किसी तरह का लिखित आश्वासन दिया गया, जिससे क्षेत्रवासियों में भय और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इस पूरे आंदोलन में वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल संघर्षरत परिवारों की सबसे मजबूत आवाज़ बनकर उभरे हैं। वे लगातार आंदोलन स्थल पर पहुंचकर लोगों से संवाद कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को निगम व प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। पार्षद पाटिल ने साफ शब्दों में कहा—
“विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर गरीबों की छत उजाड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने मांग की कि यदि नगर निगम को विकास कार्य करना ही है, तो पहले स्थायी पुनर्वास नीति बनाई जाए और वर्षों से रह रहे परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रशासन से आग्रह किया कि आंदोलनरत लोगों से सीधे संवाद कर मानवीय समाधान निकाला जाए।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि लिंगियाडीह कांग्रेस-बहुल वार्ड होने के कारण यहां चुनिंदा और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई की जा रही है। इस पर पार्षद दिलीप पाटिल ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा—
“कार्रवाई अगर करनी है तो समानता के आधार पर हो, राजनीति के आधार पर नहीं।”
इसी बीच आंदोलन में शामिल महिलाओं ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला पर भी गंभीर आरोप लगाए। महिलाओं का कहना है कि विधायक अमीर वर्ग के साथ मिलीभगत कर गरीबों के आशियाने उजाड़ने में भूमिका निभा रहे हैं।
जहां कई जनप्रतिनिधि इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, वहीं पार्षद दिलीप पाटिल की सक्रियता और ज़मीनी जुड़ाव लिंगियाडीह के लोगों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। आंदोलनकारी महिलाओं और गरीब परिवारों ने खुले तौर पर पार्षद पाटिल के समर्थन और सहयोग की सराहना की है।



