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सर्पदंश से होने वाली मौतों पर फोकस, बिलासपुर में राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सिम्स, जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी स्तर तक के डॉक्टर, नर्स और फार्मासिस्ट हुए शामिल

बिलासपुर।
देशभर में सर्पदंश से होने वाली मृत्यु और गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय सर्पदंश विषाक्तता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत बिलासपुर में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न संवर्गों को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया, जिसमें शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सिम्स, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े चिकित्सक, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हुए।

कार्यक्रम का आयोजन बिलासपुर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गढेवाल के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण सत्रों में सर्पदंश की पहचान, समय पर उपचार, विष के प्रभाव और अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा प्रबंधन से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की गई।


“अधिकांश सांप विषैले नहीं, लेकिन सर्पदंश को हल्के में नहीं लिया जा सकता”

प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिला अस्पताल के डॉ. प्रधान ने सर्पदंश से जुड़े आंकड़ों और चिकित्सकीय अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत सांप विषैले नहीं होते, इसके बावजूद सर्पदंश की स्थिति में चिकित्सकीय हस्तक्षेप को लेकर गंभीरता बरतना आवश्यक माना जाता है। सत्र में सर्पदंश के बाद प्रारंभिक समय की भूमिका और अस्पताल स्तर पर किए जाने वाले उपचार की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।


“देरी से पहुंचने पर ज़हर का असर मस्तिष्क तक पहुंच सकता है”

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सिम्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने प्रशिक्षण के दौरान सर्पदंश के मामलों में समय की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में मरीजों को अस्पताल लाने में देरी होने पर सर्प के ज़हर का प्रभाव शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क तक पहुंच जाता है, जिससे उपचार की जटिलता बढ़ जाती है। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर ऐसे मामलों में देखी गई चिकित्सकीय चुनौतियों की जानकारी दी।


एंटीवेनम की उपलब्धता और सर्विलांस व्यवस्था पर चर्चा

कार्यक्रम में जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ. रक्षित जोगी ने सर्पदंश से जुड़े मामलों में दवाओं की उपलब्धता और निगरानी तंत्र से संबंधित पहलुओं पर जानकारी साझा की। सत्र के दौरान एंटीवेनम की उपलब्धता, रिपोर्टिंग प्रणाली और स्वास्थ्य संस्थानों में मामलों के पंजीकरण जैसे बिंदुओं पर चर्चा हुई। सर्पदंश से जुड़े मामलों में प्रचलित सामाजिक व्यवहार और उपचार पद्धतियों का भी उल्लेख किया गया।


फील्ड अनुभव साझा, उपचार प्रक्रियाओं पर जानकारी

प्रशिक्षण सत्र में डॉ. कौशिक ने अपने कार्यस्थल पर सामने आए सर्पदंश के मामलों का उल्लेख करते हुए मरीजों की स्थिति, लक्षण और उपचार प्रक्रिया से संबंधित अनुभव साझा किए। उन्होंने अस्पताल स्तर पर अपनाई जाने वाली चिकित्सकीय प्रक्रिया और प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को प्रतिभागियों के सामने रखा।


आयोजन में इन अधिकारियों की रही प्रमुख भूमिका

इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में

  • जिला प्रबंधक (ईजी.) श्याम मोहन दुबे,
  • जिला महामारी रोग विशेषज्ञ पंकज सिंह,
  • सेकेट्रीयल असिस्टेंट सौरभ शर्मा
    का सक्रिय योगदान रहा।

कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से आए प्रतिभागियों की उपस्थिति दर्ज की गई और सर्पदंश से संबंधित चिकित्सा प्रबंधन पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए।

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