अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय बिलासपुर का मामला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये की खरीदी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए विश्वविद्यालयों और शासकीय महाविद्यालयों में बड़े पैमाने पर क्रय आदेश जारी किए गए। जांच में सामने आए तथ्यों के बाद शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राचार्यों और अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विभाग में लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच हुई है।
रायपुर, 12 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में शासकीय खरीदी नियमों के खुले उल्लंघन से जुड़े गंभीर प्रकरण उजागर हुए हैं। विश्वविद्यालयों और शासकीय महाविद्यालयों द्वारा बिना किसी निविदा प्रक्रिया के करोड़ों रुपये की खरीदी किए जाने की शिकायतें विभिन्न माध्यमों से शासन तक पहुंची थीं। शिकायतों के आधार पर की गई विभागीय जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच में पाया गया कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने 15 अप्रैल 2025 को एक ही दिन में लगभग 1 करोड़ रुपये के 26 क्रय आदेश बिना निविदा प्रक्रिया के जारी किए। इसी तरह शासकीय बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय, नारायणपुर द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को एक ही दिन में 35 लाख रुपये के 22 क्रय आदेश जारी किए गए। वहीं शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट (महासमुंद) ने 22 अक्टूबर 2025 को 1 करोड़ रुपये मूल्य के 36 क्रय आदेश बिना टेंडर प्रक्रिया के जारी किए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 28 नवंबर 2025 को अपर संचालक की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया। समिति ने सभी दस्तावेजों और क्रय प्रक्रियाओं की विस्तृत जांच की। रिपोर्ट में शासकीय खरीदी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट (महासमुंद) के प्राचार्य और क्रय समिति के सदस्यों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर और बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय, नारायणपुर से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई करते हुए प्राचार्य सहित चार सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया गया है।
उच्च शिक्षा आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि शासकीय खरीदी नियमों का उल्लंघन गंभीर मामला है और इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। सामने आए प्रकरणों ने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में खरीदी प्रक्रियाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।



