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उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: जया किशोरी की ‘नानी बाई का मायरो’ कथा में भक्ति, भाव और जीवन संदेशों की गूंज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा आयोजित विश्वविख्यात आध्यात्मिक प्रवक्ता जया किशोरी की ‘नानी बाई का मायरो’ कथा एवं भजन कार्यक्रम के पहले दिन मिनोचा कॉलोनी भक्ति, भाव और श्रद्धा के अद्भुत संगम में तब्दील हो गई। श्रीकृष्ण के भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए, महिलाओं ने नृत्य किया और जया किशोरी ने मायरो कथा के माध्यम से नरसिंह जी के बचपन से लेकर श्रीकृष्ण भक्ति, गोपी-भाव, रास, और जीवन के गूढ़ संदेशों को विस्तार से प्रस्तुत किया।


कथा का शुभारंभ, भजनों से सजी संध्या


श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा आयोजित इस भव्य आयोजन में जया किशोरी ने पहले दिन कथा की शुरुआत जीवन से जुड़े अनेक विषयों पर चर्चा करते हुए की। उन्होंने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण फैसले कभी दूसरों के हिसाब से नहीं लेने चाहिए, भगवान को प्रसन्न करने के लिए वापसी की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, और भगवान से मांगने के बजाय जो भी मिले उसे श्रद्धा से स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बुजुर्गों के आशीर्वाद से ही घर में शुभ कार्यों की शुरुआत करनी चाहिए, क्योंकि बुजुर्ग जीवन में सुंदर सीख देते हैं और अनुभव से मिली सीख कभी नहीं बदलती।
भक्ति गीतों में—
“श्री राधे गोविंदा मन भज ले हर का प्यारा नाम है”, “गोपाला हर का प्यारा नाम है”—
पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते दिखे। श्रीकृष्ण भक्ति गीतों के दौरान महिलाएं नृत्य करती नजर आईं और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।
नरसिंह जी के बचपन से मायरो कथा की भूमिका
जया किशोरी ने नानी बाई का मायरो कथा प्रारंभ करने से पूर्व नरसिंह जी के बचपन और उनकी दादी की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि नरसिंह जी जन्म से गूंगे और बहरे थे, माता-पिता नहीं थे और दादी के साथ रहते थे। उनकी भाभी अत्यंत ऐश्वर्यशील थीं। एक बार गांव में आए एक महाराज जी के पास दादी नरसिंह जी को लेकर पहुंचीं। महाराज जी ने नरसिंह जी के सिर पर हाथ रखते हुए कहा कि यह भगवान का बड़ा भक्त बनेगा। जैसे ही उन्होंने नरसिंह के कान में “राधे कृष्ण” कहा, चमत्कार हुआ और नरसिंह भी “राधे कृष्ण” बोलने लगे। इस चमत्कार के बाद दादी महाराज जी के साथ पूरे गांव में भ्रमण करती रहीं।
जया किशोरी ने बताया कि ठाकुर जी ने नरसिंह को धरती पर भेजते समय आशीर्वाद दिया कि इतना धन और अन्न मिलेगा कि 12 पीढ़ी बैठकर खाएंगी तो भी खत्म नहीं होगा।
नानी बाई का मायरो: लग्न पत्रिका से कथा का विस्तार
कथा को आगे बढ़ाते हुए जया किशोरी ने बताया कि नानी बाई का मायरो यहीं से प्रारंभ होता है। नरसिंह जी ने अपनी बेटी नानी बाई का विवाह किया, लेकिन विवाह के बाद उन्होंने अपनी बेटी को देखा तक नहीं। आगे चलकर नानी बाई की बेटी की शादी तय हो जाती है, रिश्ता पक्का हो जाता है, लेकिन नाना नरसिंह जी को इसकी जानकारी नहीं मिलती। जब लग्न पत्रिका लिखने का समय आता है, तो यहीं से मायरो कथा का भावनात्मक विस्तार होता है।
उन्होंने समझाया कि जब भी कोई मंगल कार्य होता है तो सभी जमीन पर बैठते हैं, पहली पत्रिका गणेश जी को लिखी जाती है और उसके बाद सबसे करीबी एवं खास व्यक्ति—यहां नरसिंह जी—को पत्रिका लिखी जाती है। जया किशोरी ने कहा कि आज के समय में लोग अमीर रिश्तों को सबको बताते हैं, गरीबों के रिश्ते छुपा लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों से वापसी की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, लेकिन ईश्वर प्रसन्न रहे—यह भाव हमेशा रखना चाहिए।
बुजुर्गों की सीख और निर्णयों का भार
कथा के दौरान जया किशोरी ने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय दूसरों के कहने से नहीं लेने चाहिए, क्योंकि यदि परेशानी आई तो उस फैसले का भार जीवन भर ढोना पड़ता है। उन्होंने बुजुर्गों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बुजुर्गों से मिली सीख अनुभव की होती है, जो जीवनभर साथ देती है।
जब नरसिंह जी को लग्न पत्रिका भेजने की बात आती है, तो कोई भेजने को तैयार नहीं होता। नानी बाई को यह पता चलता है और बुजुर्गों के कहने पर पत्रिका लिखी जाती है। ससुराल में सबको पता चलता है कि नरसिंह जी को पत्रिका भेजी जा रही है। पत्रिका कैसे पहुंचती है, नरसिंह जी मायरो की तैयारी कैसे करते हैं—इन सभी प्रसंगों को जया किशोरी ने विस्तार से गीतों के माध्यम से गाया और हिंदी में समझाया। इन प्रसंगों का अगला विस्तार आज दोपहर 3:00 बजे से कथा स्थल पर प्रस्तुत किया जाएगा।
गोपी-भाव, रास और भक्ति का दर्शन
कथा से पूर्व जया किशोरी ने श्रीकृष्ण के भजनों के माध्यम से भक्तों को भाव-विभोर किया। उन्होंने कहा कि हर भक्त ने भगवान को पाने के लिए अपने-अपने रास्ते चुने। उन्होंने गोपी-भाव को समझाते हुए कहा—
“गोपी का मतलब केवल स्त्री नहीं, गोपी का मतलब भाव है; जिसमें रास के दर्शन होते हैं।”
उन्होंने बताया कि जिसमें गोपी का भाव होता है वही रास के दर्शन कर सकता है।
जया किशोरी ने राधा-कृष्ण, गोपियों, गोकुल, तथा महादेव-पार्वती की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि जब भोले बाबा और पार्वती रास देखने कदम के पेड़ के नीचे पहुंचे, तब रास-भाव का अद्भुत प्रसंग सामने आया।
नरसिंह जी को ठाकुर जी का आशीर्वाद
जया किशोरी ने बताया कि ठाकुर जी ने नरसिंह जी पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और कहा कि उनकी तपस्या से वे प्रसन्न हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जितनी बार केदार का रास्ता जाओगे, सारे काम छोड़कर मैं आ जाऊंगा। भगवान ने नरसिंह जी को 12 पीढ़ियों तक अन्न और धन का वरदान दिया, लेकिन बेटी की शादी के बाद नरसिंह जी ने प्राप्त धन और अन्न लोगों में बांट दिया।
आयोजन, सम्मान और उपस्थिति
कार्यक्रम से पूर्व श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा आरती की गई और जया किशोरी का सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और आरती में सहभागिता की। मिनोचा कॉलोनी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मायरो कथा एवं भजन कार्यक्रम में शामिल हुए।
शाम 3:00 बजे से 7:00 बजे तक जया किशोरी की नानी बाई का मायरो कथा एवं भजन का क्रम चला। आयोजन पूर्णतः निशुल्क रहा और श्रद्धालुओं के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की गई।
बिलासपुर में हिंदी में कथा
जया किशोरी ने बताया कि उन्होंने देश के कई राज्यों में यह कथा मारवाड़ी भाषा में भी प्रस्तुत की है, लेकिन बिलासपुर में हिंदी में कथा सुनाई गई और मारवाड़ी के अनेक शब्दों का हिंदी रूपांतरण भी किया गया। उन्होंने बिलासपुर के श्रद्धालुओं की सराहना करते हुए कहा कि आज के व्यस्त जीवन में समय निकालना कठिन हो रहा है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग भक्ति, भजन और मायरो कथा सुनने पहुंचे हैं।

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