
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के नेत्र रोग विभाग ने चिकित्सा जगत में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान में हाल ही में चार मरीजों का जटिल कॉर्निया प्रत्यारोपण (Corneal Transplant) ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया, जिससे गंभीर संक्रमण और अंधत्व की कगार पर पहुंच चुकी आंखों में फिर से रोशनी लौट आई।
धान की कटाई बनी अंधत्व की वजह
सिम्स में भर्ती किए गए चारों मरीज (दो महिलाएं और दो पुरुष), जिनकी उम्र 35 से 50 वर्ष के बीच है, सभी बिलासपुर जिले के निवासी हैं। ये मरीज फंगल कॉर्नियल अल्सर से पीड़ित थे। यह संक्रमण धान की कटाई के दौरान आंखों में धान की बाली से चोट लगने के कारण हुआ। संक्रमण की गंभीरता इतनी अधिक थी कि आंखों की पुतली पूरी तरह सफेद हो चुकी थी, असहनीय दर्द बना हुआ था और आंख निकालने तक की नौबत आ गई थी।
इलाज की चुनौती और सफल प्रत्यारोपण
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह एवं डॉ. प्रभा सोनवानी (एसोसिएट प्रोफेसर) के नेतृत्व में मरीजों को पहले भर्ती कर संक्रमण नियंत्रित किया गया। इसके बाद सिम्स आई बैंक में उपलब्ध नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया की सहायता से सफल प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के बाद चारों मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आ चुकी है।
विशेष स्पेशल बॉक्स | सिम्स में कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रमुख बातें
कुल मरीज: 4 (2 महिलाएं, 2 पुरुष)
उम्र: 35 से 50 वर्ष
बीमारी: फंगल कॉर्नियल अल्सर
कारण: धान की कटाई के दौरान आंखों में चोट
उपचार: संक्रमण नियंत्रण के बाद कॉर्निया प्रत्यारोपण
सहयोग: आई बैंक से प्राप्त नेत्रदान
परिणाम: आंखों की रोशनी सफलतापूर्वक बहाल
प्रशासन और चिकित्सकों की प्रतिक्रिया
डॉ. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता, सिम्स
“सिम्स में चिकित्सा सेवाओं को निरंतर आधुनिक और सुलभ बनाया जा रहा है। नेत्र रोग विभाग की यह उपलब्धि टीम वर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है। नेत्रदान के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता के कारण हम जरूरतमंद मरीजों को नई रोशनी दे पा रहे हैं। संस्थान उन्नत तकनीक और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।”
डॉ. लखन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, सिम्स
“कॉर्निया प्रत्यारोपण जैसे जटिल ऑपरेशन का सिम्स में सफल होना संस्थान की क्षमताओं को दर्शाता है। आई बैंक के माध्यम से मिल रहे नेत्रदान इस कार्य की आधारशिला हैं। सफल ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम और सहयोगी स्टाफ बधाई के पात्र हैं।”
डॉ. सुचिता सिंह, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग
“चोट, संक्रमण या कुपोषण के कारण बड़ी संख्या में मरीज कॉर्नियल अंधत्व का शिकार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में कॉर्निया प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बचता है। कोरोना काल के बाद नेत्रदान के प्रति लोगों का बढ़ता रुझान बेहद सकारात्मक संकेत है।”
सावधानी और जागरूकता
चिकित्सकों के अनुसार धान की कटाई और मिसाई के दौरान आंखों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। मामूली चोट भी गंभीर संक्रमण का रूप ले सकती है, जिससे दृष्टि पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है।
टीमवर्क की सफलता
इस सफल चिकित्सा प्रक्रिया में डॉ. प्रभा सोनवानी, पीजी स्टूडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय का विशेष योगदान रहा। सिम्स का नेत्र रोग विभाग लगातार नेत्रदान और आधुनिक उपचार के माध्यम से अंधत्व के खिलाफ लड़ाई को मजबूती दे रहा है।



