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मिलावटखोरी छत्तीसगढ़ियों की सेहत पर डाल रही असर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने की छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मिशन मोड में टीबी मुक्त भारत पर जोर, स्वास्थ्य सुधारों में केंद्र–राज्य समन्वय को बताया निर्णायक
आठ मेडिकल कॉलेजों के लिए पृथक अस्पताल की मांग, दवा–निदान–खाद्य सुरक्षा पर गहन मंथन
केंद्र सरकार ने देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को तेज़, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, योजनाओं की प्रगति और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक श्री रणबीर शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मिशन मोड में स्वास्थ्य सुधारों पर फोकस
बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में मिशन मोड में कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जाना है, जिसके लिए जनभागीदारी आधारित मॉडल को जमीनी स्तर तक सशक्त बनाना आवश्यक है। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जोखिमग्रस्त आबादी में एक्स-रे आधारित जांच को तेज़ी से पूरा करने और समय पर निदान सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
दवा विनियमन और निदान सेवाओं पर सख्ती
समीक्षा बैठक में दवा विनियमन को और अधिक सख्त करने, औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा निदान सुविधाओं के विस्तार पर गहन चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने टेलीमेडिसिन, रोगी-केंद्रित देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता रेखांकित की, ताकि दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं सुलभ हो सकें।
उन्होंने सभी राज्यों को निर्देशित किया कि उनके रक्तकोष (ब्लड बैंक) निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करें और उनकी नियमित निगरानी एवं निरीक्षण को और अधिक कठोर बनाया जाए।
नि:शुल्क दवा–निदान योजना और खाद्य सुरक्षा
बैठक में नि:शुल्क औषधि एवं नि:शुल्क निदान योजना के अंतर्गत अधिकतम जनसंख्या को लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया। साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की बढ़ती समस्या को गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया।
केंद्र ने खाद्य एवं औषधि नमूनों की जांच क्षमता बढ़ाने, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक नमूने लेने, और खाद्य सुरक्षा प्रयोगशालाओं के विस्तार पर सहमति जताई। इसके लिए राज्यों द्वारा आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने पर केंद्र की ओर से वित्तीय सहायता दिए जाने की बात भी बैठक में स्पष्ट की गई।
टीबी उन्मूलन और निक्षय मित्र मॉडल
क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक निक्षय मित्र जोड़ने और उनके माध्यम से टीबी मरीजों को पोषण एवं खाद्य सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि टीबी कार्यक्रम को सुदृढ़ करने के लिए 146 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें राज्यों को उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे प्रारंभिक जांच और समय पर उपचार को मजबूती मिलेगी।
मातृ–शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोग
बैठक में मातृ मृत्यु दर (MMR), शिशु मृत्यु दर (IMR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में कमी लाने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। गैर-संचारी रोगों (NCDs) की 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग को लक्ष्य आधारित तरीके से पूरा करने पर भी बल दिया गया।
इसी क्रम में कुष्ठ रोग नियंत्रण के लिए प्रत्येक तिमाही सक्रिय रोगी खोज अभियान चलाने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों पर केंद्रित निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई गई।
कैंसर उपचार और डे-केयर सेवाएं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेवाएं संचालित करने पर जोर दिया, जिससे कैंसर मरीजों को लंबी अस्पताल भर्ती के बिना उपचार उपलब्ध हो सके और जिला स्तर पर ही सेवाएं सुदृढ़ हों।
आठ मेडिकल कॉलेजों के लिए पृथक अस्पताल की मांग
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य के आठ मेडिकल कॉलेजों के लिए पृथक अस्पताल स्थापित करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि इससे चिकित्सा शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और मरीजों की उपचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रही प्रगति की सराहना करते हुए मानव संसाधन के क्षेत्र में अतिरिक्त सहयोग देने का आश्वासन दिया।
SNA प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्थाएं
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) प्रणाली ट्रस्ट मॉडल पर संचालित होती रहेगी। इसके साथ ही खाद्य एवं औषधि परीक्षण क्षमता विस्तार के लिए राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
मिलावटखोरी पर केंद्र की चिंता
बैठक में खाद्य पदार्थों में मिलावट को छत्तीसगढ़ की जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला एक गंभीर मुद्दा बताया गया। इस पर केंद्र सरकार ने गहरी चिंता जताते हुए निगरानी, सैंपलिंग और परीक्षण तंत्र को सशक्त करने की आवश्यकता रेखांकित की।
केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई यह समीक्षा बैठक छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रहे सुधारों, योजनाओं की प्रगति और भविष्य की दिशा को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में रखने वाली अहम पहल के रूप में सामने आई।

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