बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन द्वारा 29 से 31 दिसंबर 2025 तक आयोजित काम बंद–कलम बंद आंदोलन के दौरान भी छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में चिकित्सा सेवाएँ पूरी तरह सुचारू, व्यवस्थित और निर्बाध रहीं। सिम्स प्रशासन की समय पर की गई ठोस योजना, कड़े प्रबंधन और विभागीय समन्वय के चलते किसी भी मरीज को इलाज, जांच या देखभाल में आंशिक प्रभाव परेशानी हुई।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के नेतृत्व में सुबह ही समस्त विभागाध्यक्षों, प्रभारी चिकित्सकों और नर्सिंग अधिकारियों की आपात समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अस्पताल की ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी, जांच सेवाओं एवं अन्य आवश्यक चिकित्सा व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए कि मरीजों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
प्रशासन की इस अग्रिम तैयारी का परिणाम यह रहा कि आंदोलन के दौरान भी सिम्स की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 2000 मरीजों का नियमित उपचार किया गया, जबकि आईपीडी में 120 भर्ती मरीजों को पूरी चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई गई। गंभीर एवं आपातकालीन मामलों में भी सेवाएँ सामान्य दिनों की तरह जारी रहीं।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सिम्स नोडल अधिकारी
डॉ. भूपेंद्र कश्यप,
एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति,
रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह,
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अमित ठाकुर,
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओ.पी. राज सहित सभी विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने विभागों की वैकल्पिक एवं सतत कार्य योजनाएँ प्रस्तुत कीं, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर आंशिक प्रभाव पड़ा। सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल से स्टाफ बुलाकर कार्य लिया गया |
बैठक में नर्सिंग सुपरीटेंडेंट स्वाति कुमार डीएनस राजकुमारी उपस्थिति रही
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा,
“सिम्स एक प्रमुख तृतीयक चिकित्सा संस्थान है। किसी भी परिस्थिति में मरीजों के इलाज से समझौता नहीं किया जाएगा। मरीजों की सुरक्षा, सुविधा और समयबद्ध उपचार हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।”
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया,
“डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों एवं प्रशासनिक टीम के समन्वय से सभी आवश्यक सेवाएँ निर्बाध रूप से संचालित की जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन हर स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रहा है।”
काम बंद–कलम बंद आंदोलन के बीच भी सिम्स की यह कार्यशैली आम जनता के लिए भरोसे का संदेश बनकर सामने आई है। सिम्स ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों की सेहत और जीवन सर्वोपरि है।



