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LaQshya मिशन के तहत सिम्स का महिला प्रसूति विभाग होगा हाईटेक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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आधुनिक लेबर ओटी, सोनोग्राफी और CTG मशीनों से मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती


बिलासपुर।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी LaQshya (Labour Room Quality Improvement Initiative) योजना के तहत छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के महिला एवं प्रसूति रोग विभाग का व्यापक उन्नयन किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत सिम्स में आधुनिक लेबर ऑपरेशन थिएटर, दो नई सोनोग्राफी मशीनें और एक अत्याधुनिक कार्डियोटोकोग्राफी (CTG) मशीन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
यह उपलब्धि सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के सतत और निरंतर प्रयासों का परिणाम बताई जा रही है, जिससे संस्थान में प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता को नई दिशा मिलेगी।
80–90 गुणवत्ता बिंदुओं पर होता है सघन मूल्यांकन
‘लक्ष्य’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रसव कक्ष और लेबर ऑपरेशन थिएटर का 80 से 90 गुणवत्ता मानकों पर गहन परीक्षण किया जाता है।
इन मानकों में प्रमुख रूप से—
स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण
आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता
प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ
दवाइयों की सतत आपूर्ति
नवजात पुनर्जीवन की सुविधा
आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था
सम्मानजनक मातृत्व देखभाल
जैसे बिंदुओं का विस्तृत मूल्यांकन शामिल रहता है।
CTG मशीन से मां-शिशु की सतत निगरानी
कार्डियोटोकोग्राफी (CTG) मशीन के माध्यम से प्रसव के दौरान शिशु की हृदय गति और मां के गर्भाशय संकुचन की निरंतर निगरानी संभव होगी। इससे जटिलताओं की समय रहते पहचान कर त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जा सकेगा, जिससे सुरक्षित प्रसव की संभावनाएं बढ़ेंगी।
मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने पर फोकस
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लागू लक्ष्य योजना का उद्देश्य प्रसव एवं प्रसवोत्तर अवधि के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाकर—
मातृ मृत्यु
नवजात मृत्यु
प्रसव जटिलताओं
मृत शिशु जन्म
जैसी घटनाओं में कमी लाना है।
योजना विशेष रूप से रक्तस्राव, प्री-एक्लेम्पसिया/एक्लेम्पसिया, अवरुद्ध प्रसव, संक्रमण और नवजात श्वास कष्ट जैसे उच्च जोखिम कारकों की रोकथाम पर केंद्रित है।
🔹 सम्मानजनक मातृत्व देखभाल पर विशेष जोर
‘लक्ष्य’ कार्यक्रम के तहत महिलाओं को—
गोपनीयता
सम्मानजनक व्यवहार
प्रसव के समय सहयोगी की उपस्थिति
प्रसव की स्थिति चुनने की स्वतंत्रता
जन्म के तुरंत बाद मां-शिशु का त्वचा-से-त्वचा संपर्क
एक घंटे के भीतर स्तनपान
जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाती हैं, जिससे संवेदनशील और मानवीय देखभाल को बढ़ावा मिलता है।
अधिष्ठाता, अधीक्षक और विभागाध्यक्ष के बयान
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा—
“लक्ष्य कार्यक्रम के तहत महिला प्रसूति विभाग का उन्नयन मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा। आधुनिक उपकरणों और मानक संचालन प्रक्रियाओं के माध्यम से सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है।”
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा—
“लेबर ओटी और प्रसव कक्षों में मानक SOPs का पालन, प्रशिक्षित मानव संसाधन और 24×7 आपातकालीन सुविधाएं मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। लक्ष्य योजना इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम है।”
महिला एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमन जोगी ने बताया—
“CTG मशीन, सोनोग्राफी और आधुनिक लेबर ओटी से उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और सुरक्षित प्रसव संभव होगा। यह कार्यक्रम चिकित्सा गुणवत्ता के साथ-साथ महिलाओं के लिए सम्मानजनक और संवेदनशील देखभाल को भी सुनिश्चित करता है।”
प्रमाणीकरण और प्रोत्साहन
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के अंतर्गत—
70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले संस्थानों को ‘लक्ष्य प्रमाणन’
उत्कृष्ट प्रदर्शन पर स्वर्ण एवं प्लेटिनम सम्मान
प्रदान किए जाते हैं।
महत्व
‘लक्ष्य योजना’ सिम्स जैसे शासकीय चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानवीय प्रसव सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में लागू की जा रही है, जिससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा और अधिक मजबूत हो रहा है।

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