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*रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में न्यूरो–यूरो–नेफ्रो विशेषज्ञों की एंट्री… पर छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा मेडिकल कॉलेज सिम्स बिलासपुर अब भी स्पेशल ‘डॉक्टरलेस’

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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जनता पूछ रही — स्वास्थ्य व्यवस्था या क्षेत्रीय पक्षपात?

मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर, रायपुर।



छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के कटघरे में है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जन, यूरोसर्जन और नेफ्रोलॉजिस्ट की नियमित सेवाएं शुरू कर दी गई हैं, जबकि राज्य का दूसरा सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज — सिम्स बिलासपुर — अब भी इन विशेषज्ञ सेवाओं से खाली पड़ा है। रायगढ़ को मिली सुविधा का स्वागत जरूर हो रहा है, लेकिन बिलासपुर की जनता इसे सीधा ‘सौतेला व्यवहार’ बता रही है। लोग पूछ रहे हैं—जब अस्पतालों का विकास ‘सबकी पहुंच के पास’ लाने का दावा किया जा रहा है, तो बिलासपुर जैसे बड़े मेडिकल हब को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है
प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के दावे एक ओर हैं और मौके पर हकीकत दूसरी। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में दिवंगत अधिष्ठाता डॉ. विनीत जैन के प्रयासों के बाद शहर के तीन मशहूर विशेषज्ञ—
न्यूरोसर्जन डॉ. नितीश नायक,
यूरोसर्जन डॉ. के.डी. खरे,
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मीना पटेल
—अब सप्ताह में निर्धारित दिनों पर मरीजों को परामर्श देंगे। शहर और आसपास के इलाकों के मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
लेकिन दूसरी तरफ बिलासपुर में स्थित राज्य का दूसरा सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज सिम्स, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज पहुंचते हैं, वहां अभी तक न न्यूरोसर्जन, न यूरोसर्जन और न ही नेफ्रोलॉजिस्ट की स्थायी उपलब्धता है।
यही वजह है कि रायगढ़ की खुशखबरी, बिलासपुर के लोगों में गुस्से की वजह बन गई है। सोशल प्लेटफॉर्म, OPD की लाइनों और स्थानीय जनचर्चाओं में एक ही सवाल गूंज रहा है —
“रायगढ़ को सब, बिलासपुर को कब?”
बिलासपुर मेडिकल कॉलेज की पीड़ा: जनता का गुस्सा खुलकर सामने
बिलासपुर मेडिकल कॉलेज में इन विशेषज्ञ सेवाओं की कमी से मरीजों को मजबूरी में रायपुर, रायगढ़ या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जो इलाज सरकारी मेडिकल कॉलेज में होना चाहिए, उसके लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
बिलासपुर के कई मरीजों का कहना है कि रायगढ़ में विशेषज्ञ सेवाएं शुरू होते ही सरकार की प्राथमिकता का फर्क साफ दिखने लगा है।
स्थानीय लोगों की तकरार—
“हमारा मेडिकल कॉलेज राज्य का दूसरा सबसे बड़ा… फिर भी विशेषज्ञ नहीं!”
“क्या स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ राजनीतिक मानचित्र देखकर तय होती है?”
“रायगढ़ में सब उपलब्ध… बिलासपुर में सिर्फ वादे!”
एक तरह से देखें तो बिलासपुर की जनता अब इसे ‘धीमी हत्या’ जैसा स्वास्थ्य संकट मानने लगी है।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान—लेकिन सवाल जस के तस
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की तैनाती को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को उनके शहरों और गांवों के आसपास ही उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य है।
लेकिन बिलासपुर के लोग पूछ रहे हैं—अगर यही लक्ष्य है, तो फिर हर साल हजारों मरीजों को विशेषज्ञ सेवाओं की कमी में मरहम की बजाय इंतजार क्यों मिल रहा है?
बेलगाम भीड़, बढ़ते मरीज, और बिना विशेषज्ञों के ओपीडी—यह तस्वीर किसी भी “बेहतर स्वास्थ्य सुविधा” की परिभाषा से मेल नहीं खाती।
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज—विशेषज्ञ सेवाओं का टाइम टेबल
(—लोगों की जानकारी के लिए पूरा डिस्प्ले—)
न्यूरोसर्जन — डॉ. नितीश नायक
मस्तिष्क एवं रीढ़ की बीमारियों के विशेषज्ञ
हर मंगलवार
समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे
यूरोसर्जन — डॉ. के.डी. खरे
मूत्ररोग एवं पुरुष प्रजनन संबंधी विशेषज्ञ
हर शुक्रवार
स्थान: भूतल, सर्जरी विभाग, OPD कक्ष क्रमांक 01
नेफ्रोलॉजिस्ट — डॉ. मीना पटेल
किडनी एवं गुर्दा रोग विशेषज्ञ
हर शुक्रवार
स्थान: प्रथम तल, मेडिसिन विभाग, OPD कक्ष क्रमांक 01
समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे
1: डॉ. नितीश नायक किन गंभीर बीमारियों का इलाज करेंगे
ब्रेन ट्यूमर
मस्तिष्क की गांठ
स्पाइनल इंजरी
स्ट्रोक व रक्त का थक्का
साइटिका
मस्तिष्क का संक्रमण
लकवा
कमर, गर्दन, रीढ़ का दर्द
मांसपेशियों/नसों का दबाव
मिर्गी, चक्कर, सिरदर्द
2: यूरो सर्जरी से जुड़ी बीमारियां
गुर्दे की पथरी
UTI
प्रोस्टेट की समस्याएं
मूत्र असंयम
पुरुष बांझपन
किडनी/प्रोस्टेट/मूत्राशय कैंसर
इरेक्टाइल डिसफंक्शन
3: नेफ्रोलॉजी — किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD)
किडनी फेलियर
हाई ब्लड प्रेशर
डायलिसिस
किडनी स्टोन
मधुमेह से जुड़ी किडनी समस्याएं
4: बिलासपुर मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की कमी से बढ़ते संकट
गंभीर मरीजों को रायपुर/निजी अस्पतालों की ओर भेजना
आपातकालीन मामलों में ‘गोल्डन आवर’ का नुकसान
खर्च बढ़ने से गरीब मरीजों पर डबल मार
रेफरल सिस्टम बोझिल
क्षेत्रीय असमानता की तेज होती बहस
बिलासपुर भी अपना हक मांग रहा
रायगढ़ में विशेषज्ञ सेवाओं की शुरुआत स्वागत योग्य है, लेकिन बिलासपुर में वही तस्वीर आज भी अधूरी है। छत्तीसगढ़ की मेडिकल व्यवस्था में दो शहरों की दो तस्वीरें—एक विकसित, दूसरा इंतजार में…

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