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PG मेडिकल सीटों में बड़े बदलाव पर छत्तीसगढ़ में उबाल: MBBS छात्रों का राज्यव्यापी विरोध, कोटा 50% से घटाकर 25% करने पर नाराजगी तेज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, रायपुर। मेडिकल PG सीटों के आवंटन में बदलाव को लेकर छत्तीसगढ़ में MBBS छात्रों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। रायपुर के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र जुटे और काली पट्‌टी बांधकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि नई नीति के तहत राज्य कोटा घटाए जाने से स्थानीय अभ्यर्थियों के सामने चुनौती कई गुना बढ़ जाएगी।
क्या है विवाद की जड़?
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अनुसार, अब तक मेडिकल PG सीटों का राष्ट्रीय ढांचा इस प्रकार था—
50% सीटें अखिल भारतीय कोटे (AIQ) में जाती थीं
50% सीटें राज्य कोटे के तहत उसी राज्य के MBBS छात्रों को प्राथमिकता से मिलती थीं
फेडरेशन का दावा है कि हाल ही में लागू व्यवस्था में राज्य कोटा 50% से घटाकर 25% कर दिया गया है और AIQ को 50% से बढ़ाकर 75% किया गया है। बदलाव के बाद स्थानीय छात्रों की उपलब्ध PG सीटों में भारी कटौती होने का आकलन किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में कितनी सीटें प्रभावित?
राज्य में PG की कुल 405 सीटें हैं। नई व्यवस्था लागू होने पर:
303 सीटें अब अखिल भारतीय कोटे में शामिल होंगी
सिर्फ 102 सीटें राज्य के MBBS छात्रों के हिस्से आएंगी
छात्र संगठनों का कहना है कि यह अनुपात किसी भी राज्य में लागू मॉडल से अलग है।
ग्राउंड पर विरोध की तस्वीर: “हमारे हिस्से की PG सीटें छिन रही हैं”
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर कहा कि MBBS के दौरान राज्य कोटे के आधार पर PG में प्राथमिकता मिलने की उम्मीद थी।
एक छात्र नेता ने कहा
“देश के किसी भी राज्य में राज्य कोटा 25% नहीं है। यह फैसला छत्तीसगढ़ के छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।”
छात्रों ने यह भी कहा कि हर साल हजारों विद्यार्थी छत्तीसगढ़ में MBBS पूरा करते हैं और ज्यादातर यहीं PG करना चाहते हैं, पर सीटों की संख्या कम होने से प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की PG सीटों में कटौती से स्थानीय युवाओं की दावेदारी प्रभावित होगी। PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि “किसी अन्य राज्य में ऐसा मॉडल लागू नहीं है।”
कांग्रेस ने इस नीति की समीक्षा की मांग रखी है।
PG के बाद बॉन्ड का मुद्दा भी उठा
छात्रों ने यह भी तर्क रखा कि PG के बाद दो साल की बॉन्ड पोस्टिंग होती है।
अन्य राज्यों से आए विद्यार्थी PG के बाद बॉन्ड पूरा किए बिना अपने राज्यों में लौट जाते हैं
स्थानीय डॉक्टरों की संख्या पर इसका असर पड़ता है
छात्रों का कहना है कि अधिकतर ओपन कोटा वाले डॉक्टर भविष्य में अपने गृह राज्यों में ही प्रैक्टिस करते हैं।
कितनी सीटें, कहाँ-कहाँ? (कॉलेज–वाइज ब्रेकअप)
KNM रायपुर – 74
सिम्स – 42
रिम्स – 54
शंकराचार्य – 86
बालाजी – 82
जगदलपुर – 15
अंबिकापुर – 23
कोरबा – 15
रायगढ़ – 07
राजनांदगांव – 07
कोर्ट का संदर्भ भी आया सामने
डॉक्टर हीरा सिंह लोधी ने बताया कि कोर्ट में लगाई गई याचिका पर केवल 11(क) हटाने का निर्देश दिया गया था।
फेडरेशन का कहना है कि इस आदेश की आड़ में ओपन कोटा को 50% से बढ़ाकर 75% कर दिया गया है, जिससे राज्य कोटे में वास्तविक कमी उत्पन्न हुई है।
स्वास्थ्य ढांचे पर असर की चर्चा
छत्तीसगढ़ के 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बताई जाती रही है।
मेकाहारा, डीकेएस जैसे बड़े अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों के खाली पदों की संख्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
छात्र संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था से स्थानीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
आंदोलन और आगे बढ़ सकता है
छात्र समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो विरोध और तेज किया जाएगा।
एक वर्ग का कहना है कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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