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अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर क्रूर विडंबना : अतिथियों की आवभगत में डूबे अधिकारी, दिव्यांगजन सुबह 10 से शाम 4 बजे तक भूखे–प्यासे तड़पते रहे, खाने के पैकेट होते हुए भी समय पर नहीं दिए

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
6 Min Read

मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर, 03 दिसंबर 2025


अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस जैसे संवेदनशील दिन पर तिफरा स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय का बड़ा कार्यक्रम आज मानवीय संवेदनहीनता, अफसरशाही की बेरुखी और प्रशासनिक लापरवाही का राष्ट्रीय स्तर का बदनुमा चेहरा बनकर उभरा। समाज कल्याण विभाग द्वारा सहायक उपकरण वितरण के लिए सुबह 10 बजे से बुलाए गए दिव्यांगजन छह घंटे तक भूखे-प्यासे लाइन में बैठे रहे, जबकि कार्यक्रम स्थल पर खाने-पीने के पैकेट मौजूद थे—फिर भी अधिकारी कार्यक्रम खत्म होने का इंतजार करते रहे, और दिव्यांगजन पैकेटों की ओर टकटकी लगाए बैठे अपनी तकलीफ झेलते रहे। शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई क्योंकि अधिकारी अतिथियों के स्वागत-सत्कार, फूल-मालाओं और मंचीय औपचारिकताओं में ही मशगूल थे।
कार्यक्रम की चकाचौंध के पीछे दब गई दिव्यांगों की पीड़ा
तिफरा स्कूल के सभागार में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, भाषणों, तालियों और तस्वीरों का दौर चलता रहा, वहीं बाहर सहायक उपकरण पाने आए दिव्यांगजन कड़ी धूप और लंबी लाइन में परेशान होते रहे। कई दिव्यांगजन बार-बार कह रहे थे कि उन्हें सुबह से पानी तक नहीं मिला, लेकिन कर्मचारी यह कहकर टालते रहे कि “कार्यक्रम के बाद पैकेट मिलेगा।”
यह दृश्य देखकर आमजन भी नाराज थे कि खाना-पानी मौजूद होने के बावजूद दिव्यांगजनों को उससे वंचित रखा गया, और अधिकारी व्यवस्था संभालने की जगह वीआईपी सेवा में लगे रहे।
अतिथियों के भाषण और मंचीय औपचारिकता जारी, नीचे दिव्यांग इंतज़ार में बेहाल
मुख्य अतिथि विधायक धरमलाल कौशिक मंच से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, अवसर और आत्मनिर्भरता की बातें करते रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही महापौर पूजा विधानी ने दिव्यांगजनों की प्रतिभा, क्षमता और संघर्ष की सराहना की।
संयुक्त संचालक टी.पी. भावे ने विभागीय कैम्प, प्रमाणीकरण और चिन्हांकन गतिविधियों का बखान किया।
मंच पर योजनाओं की उपलब्धियां गिनाई जाती रहीं, जबकि नीचे बैठे दिव्यांगजन पानी, छाया और आराम की जगह तक मांग नहीं पाए—क्योंकि कोई अधिकारी सुनने ही नहीं आया।
42 उपकरण वितरित, लेकिन वितरण के लिए दिव्यांगों ने झेली अपमानजनक प्रतीक्षा
कार्यक्रम में 200 से अधिक दिव्यांगजनों को प्रमाणपत्र और मेडल दिए गए।
जिला पुनर्वास केंद्र द्वारा चिन्हांकित 42 लाभार्थियों को सहायक उपकरण वितरित किए गए—
13 मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल
11 ट्रायसाइकिल
09 व्हीलचेयर
09 बैसाखियां
लेकिन इन उपकरणों को पाने के लिए दिव्यांगजनों ने कई घंटों तक बेहाल होकर इंतजार किया।
लाइन इतनी लंबी और धीमी थी कि कई लोग बैठ भी नहीं पा रहे थे और शरीर थामते हुए खड़े रहने को मजबूर थे।
खाने के पैकेट मौजूद, फिर भी रोके गए — दिव्यांगजनों ने कहा “हमसे बड़ा मज़ाक और क्या होगा?”
स्थल पर मौजूद खाद्यान्न पैकेट कार्यक्रम समाप्ति तक बंद रखे गए।
दिव्यांगजनों ने कहा कि
“पानी तक नहीं दिया गया”
“किसी अधिकारी ने हाल नहीं पूछा”
“पैकेट सामने रखे थे, पर हमें नहीं दिए”
लोगों के बीच चर्चा थी कि यह व्यवहार किसी भी संवेदनशील समाज की पहचान नहीं हो सकता।
संगठनों की मौजूदगी, प्रशासन की नाकामी साफ़ दिखाई दी
लायंस क्लब, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, पीडब्ल्यूडी आइकॉन, सामाजिक कार्यकर्ता और विभागीय कर्मचारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर जो अव्यवस्था दिखी, उसने पूरे आयोजन की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
समारोह की चमक, तस्वीरों की राजनीति — और दिव्यांगों के हिस्से आई बेबसी
कार्यक्रम का संचालन श्री प्रशांत मोकासे ने किया।
मंच पर फूल, मालाएं, सम्मान, भाषण और फोटोग्राफी के बीच दिव्यांगजन घंटों बैठकर इस इंतजार में रहे कि शायद कोई अधिकारी उनकी पीड़ा देख ले।
अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस, जो सम्मान, संवेदना और सशक्तिकरण के लिए होना चाहिए था, आज दिव्यांगों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया।

क्या कहना है विभाग का

विषयान्तर्गत आज 03 दिसम्बर अन्तराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस वर्ष 2025 पर शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ, तिफरा, बिलासपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ सहायक उपकरण वितरण, पुरस्कार वितरण एवं दिव्यांगजनों का सम्मान कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में विभागीय अंतर्गत संस्थागत छात्रों को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रात 12 बजे प्रारंभ हुआ इस दौरान दिव्यागजनों हेतु चाय, पानी व्यवस्था एवं लंच पैकेट की व्यवस्था बनाई गई थी। लंच पैकेट का वितरण अपरान्ह 02 से प्रारंभ हो गया था। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में मुख्य कार्यकम मुख्य अतिथियों के उपस्थिति में दोपहर 03.30 बजे प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में दिव्यांग छात्र/छात्राओं द्वारा उत्साहपूर्वक सास्कृतिक कार्यकम का प्रस्तुतीकरण दिया गया। सहायक उपकरण के हितग्राहियों को जिला पुनर्वास केन्द्र के माध्यम से मुख्य कार्यक्रम के पूर्वान्ह के 02 बजे उपस्थित कराया गया था। उन्हें भी चाय, पानी एवं लंच पैकेट समय पर वितरण किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के छात्र/छात्राओं, सहायक उपकरण के हितग्राहियों एवं संस्था प्रमुखों में किसी भी प्रकार की असंतोष व्यक्त नहीं किया गया है। सम्पूर्ण कार्यक्रम माननीय अतिथियों एवं समाजसेवी की उपस्थिति में निर्धारित समय अनुसार सम्पन्न हुआ है।

इस मामले में समाज कल्याण विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर तिलकेश भावे का कहना है कि दिव्यांग जनों को किसी तरह की कोई असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा सभी को समय पर बुलाया गया था

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