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बिलासपुर रेंज में साल–अंत का सबसे सख़्त “क्राइम रिव्यू ड्राइव” : आईजी डॉ. संजीव शुक्ला ने खोल दी थानों की फाइलें, हर लंबित केस पर कसा शिकंजा — अवैध शराब, जुआ–सट्टा, NDPS से लेकर ई-साक्ष्य तक पूरे रेंज की पुलिसिंग का हाई–इंटेंसिटी ऑडिट

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर।
न तो सरकारी भाषा, न घिसी-पिटी औपचारिकताएँ — बुधवार को बिलासपुर रेंज की अपराध समीक्षा बैठक ठीक उसी अंदाज़ में हुई जैसे किसी बड़े ऑपरेशन से पहले अंतिम रणनीति बनाई जाती है। पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला की अगुवाई में रेंज के सभी पुलिस अधीक्षकों को साल 2023, 2024 और 2025 के अपराध आँकड़ों, फील्ड पुलिसिंग, नई कानून व्यवस्था और डिजिटल पोर्टल्स—सबकी परतें खोलकर सामने रखनी पड़ीं।
बैठक का केंद्र सिर्फ एक था—रेंज का हर थाना 31 दिसंबर से पहले अपनी हर लंबित फाइल का हिसाब देगा।
क्राइम, मर्ग, चालान, शिकायत—कोई फाइल 31 दिसंबर के बाद मेज़ पर नहीं बचेगी
बैठक में साफ संदेश था कि तीन साल की फाइलें साफ की जाएँ—


थानों के लंबित अपराध
मर्ग जाँच
चालान
लंबित शिकायतें
विभागीय जाँचें
अनसुलझे केस
हर श्रेणी पर जिलों को अपना रिपोर्ट-कार्ड सामने रखना पड़ा और हर एसपी को लक्ष्य तय कर दिया गया।
महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई भी खास निगरानी में रही—कोई देरी, कोई चूक स्वीकार नहीं।
ई-साक्ष्य, ई-सम्मस, क्राईमेक, नेटग्रिड—डिजिटल पुलिसिंग की बारीक जाँच
नए कानूनों के लागू होने के बाद डिजिटल पोर्टल पुलिसिंग की नई रीढ़ बन चुके हैं। बैठक में इन सभी पर अलग-अलग चर्चा हुई—
ई-साक्ष्य
ई-सम्मस
नेटग्रिड
क्राईमेक
समन्वय पोर्टल
आई.ओ. मितान
NCCRP पोर्टल
किस जिले ने कितने केस इन पोर्टल्स पर अपडेट किए, कितनी मॉनिटरिंग की, और कहाँ कमियाँ मिलीं—सबका विश्लेषण टेबल पर था।
अवैध शराब की डिमांड–सप्लाई चेन पर निगरानी—जुआ-सट्टा पर भी शून्य सहनशीलता मोड
रेंज में अवैध शराब की पूरी सप्लाई लाइन की मॉनिटरिंग और कार्रवाई की हड्डी-तोड़ समीक्षा हुई।
इसी तरह संगठित जुआ–सट्टा पैटर्न, बिंदुवार जगहें, पकड़े गए आरोपी, नेटवर्क कनेक्शन—हर चीज पर फील्ड रिपोर्ट रखी गई।
आबकारी और NDPS के मामलों में
अभ्यस्त अपराधियों की लिस्ट
पकड़े गए वाहन
और जप्त मादक पदार्थों का 31 दिसंबर से पहले नष्टीकरण
इन तीन बिंदुओं पर सबसे ज्यादा सवाल उठे।
संपत्ति संबंधी अपराध—तुरंत FIR और 100% बरामदगी पर ज़ोर
चोरी-नकबजनी जैसे अपराधों की रिपोर्ट आने पर
तुरंत FIR
टीम बनाकर खोजबीन
और बरामदगी प्रतिशत बढ़ाने
के दबाव में सभी जिलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
किस जिले में कितने केस लंबित हैं और क्यों, यह भी सामने आया।
सड़क दुर्घटनाएँ, पशु तस्करी, और निष्पादन–राजसात—हर बिंदु पर डिटेल समीक्षा
सड़क हादसों के कारण
हॉटस्पॉट
एंटी-एक्सीडेंट ड्राइव
और गाँव-कस्बों में जागरूकता
इन पर जिला-वार रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
पशु तस्करी और आबकारी अपराधों में जप्त वाहनों के राजसात की प्रगति भी जांची गई।
बाउंड ओवर, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और फील्ड पुलिसिंग—बीट से लेकर एसडीओपी तक से जवाबदही
पिछले महीनों में कौन-कौन से बाउंड ओवर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हुई—
किस जिले में वृद्धि हुई और किसमें कमी—
इस पर भी चर्चा हुई।
थानों के बीट सिस्टम की वास्तविक जमीन-स्तर की स्थिति भी एजेंडा में थी।
पासपोर्ट–चरित्र सत्यापन—वर्ष समाप्ति से पहले हर आवेदन क्लियर
पासपोर्ट और चरित्र सत्यापन के लंबित प्रकरणों की सूची टेबल पर रखवाई गई और यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष समाप्ति के पहले कोई भी फाइल लंबित नहीं रहनी चाहिए।
अच्छा काम करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान—और अनुशासनहीनों की फाइलें अलग से बनाई जाएँगी
थानों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों के नाम जिलों ने प्रस्तुत किए, जिन्हें आगे पुरस्कृत किया जाएगा।
साथ ही—ड्यूटी में कोताही, लापरवाही या अनुशासनहीनता वाले मामलों की भी अलग समीक्षा हुई।
रेंज की पूरी टॉप लाइनअप बैठक में मौजूद
बैठक में उपस्थित थे—
एसएसपी बिलासपुर रजनेश सिंह,
एसपी रायगढ़ दिव्यांग पटेल,
एसपी कोरबा सिद्धार्थ तिवारी,
एसपी सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंजनेय वार्ष्णेय,
एसपी जीपीएम सुरजन राम भगत,
एसपी सक्ती प्रफुल्ल ठाकुर,
एएसपी जांजगीर-चांपा उमेश कश्यप,
एएसपी मुंगेली नवनीत कौर छाबड़ा,
और रेंज कार्यालय की एएसपी मधुलिका सिंह
यह बैठक सिर्फ रूटीन समीक्षा नहीं थी—यह साल का सबसे कड़ा अपराध-ऑडिट था, जिसमें हर जिले की पुलिसिंग का असली ‘ग्राउंड स्कोर’ सामने आया।

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