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देश में HIV प्रबंधन का बिलासपुर मॉडल बना मिसाल, इलाज–जांच–पोषण–आधार तक ‘वन-स्टॉप सपोर्ट सिस्टम’

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, रायपुर।देश में एचआईवी नियंत्रण के प्रयासों के बीच बिलासपुर का सिम्स एआरटी सेंटर एक ऐसा मॉडल बनकर उभरा है, जहां इलाज से लेकर पोषण, जांच से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक—HIV संक्रमितों के लिए एक समग्र प्रणाली तैयार की गई है। विश्व एड्स दिवस पर यह रिपोर्ट बताती है कि किस तरह बिलासपुर संभाग न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।


एचआईवी रजिस्ट्रेशन एवं उपचार की स्थिति

सिम्स में अब तक कुल 9413 मरीज पंजीकृत हैं—

  • पुरुष: 5484
  • महिला: 3303
  • ट्रांसजेंडर: 72
  • पुरुष बालक: 300
  • बालिकाएँ: 254

वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक 578 नए मरीज पंजीकृत हुए हैं।
वर्तमान में 4885 मरीज एआरटी पर जीवित एवं उपचाररत हैं।


लिंक एआरटी सेंटरों के माध्यम से सेवाएँ

सिम्स से जुड़े लिंक एआरटी केंद्र—

  • मंगला
  • गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
  • केंद्रीय जेल बिलासपुर
  • एससीएस जिला अस्पताल आदि

इन केंद्रों पर मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध कराने की सुविधा है। वर्तमान में 562 मरीज लिंक एआरटी के माध्यम से दवा प्राप्त कर रहे हैं।


एचआईवी मरीजों में टीबी जाँच एवं उपचार

एचआईवी मरीजों में टीबी होने की संभावना अधिक रहती है। इसी उद्देश्य से टीबी विभाग के सहयोग से 2025–26 में 54 मरीजों की टीबी जाँच कर उपचार प्रारंभ किया गया।


माँ से बच्चे में संक्रमण रोकथाम (PPTCT)

एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के बच्चों में संक्रमण की संभावना लगभग 40% होती है, लेकिन समय पर उपचार से इसे लगभग 1% तक कम किया जा सकता है।
सिम्स में—

  • समय पर दवा उपलब्ध
  • नियमित HIV जांच
  • माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा सीडी4 जाँच
  • पूर्ण प्रसव सेवाएँ उपलब्ध

2025–26 में 62 गर्भवती महिलाओं को सेवाएँ प्रदान की गईं।


फ्री ड्राई राशन वितरण

छ.ग. शासन के सहयोग से 35 किलो चावल प्रति माह ईच्छुक मरीजों को उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में 165 मरीज इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं।


दूसरे जिलों से आने वाले मरीज

सिम्स एआरटी केंद्र से सेवा लेने वाले जिले—
बिलासपुर, मुंगेली, बीरगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, जशपुर, कबीरधाम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, सरगुजा, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर आदि।


नया लिंक एआरटी सेंटर – गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में प्रारंभ

बीहड़ और वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहाँ के मरीजों को बिलासपुर पहुंचने में कठिनाई होती थी।
1 दिसम्बर 2025 से नया लिंक एआरटी सेंटर प्रारंभ किया जा रहा है, जहाँ अभी 210 मरीज पंजीकृत हैं। इससे जीपीएम के साथ लगने वाले जिलों के मरीजों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

सिम्स अधिष्ठाता, डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा—

“सिम्स बिलासपुर लंबे समय से पूरे संभाग का सबसे बड़ा एआरटी केंद्र रहा है। हमारा उद्देश्य है कि एचआईवी से पीड़ित हर व्यक्ति को समय पर जाँच, उपचार और परामर्श उपलब्ध हो। हमने टीबी विभाग, माइक्रोबायोलॉजी, लेबोरेटरी एवं प्रसूति विभाग के साथ मिलकर समन्वित सेवा प्रणाली विकसित की है, ताकि मरीजों को एक ही स्थान पर संपूर्ण उपचार मिल सके। नए लिंक एआरटी केंद्र के शुरू होने से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों तक सेवाओं का विस्तार होगा, जो हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है।”

चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. लखन सिंह ने कहा—

“एचआईवी मरीजों को केवल दवाओं की ही नहीं, बल्कि पोषण, परामर्श, मानसिक सहयोग और निरंतर फॉलो-अप की आवश्यकता होती है। सिम्स में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी मरीज को दवा लेने या जांच कराने के लिए कठिनाई न हो। शासन के सहयोग से ड्राई राशन वितरण, नियमित जाँच, विशेष क्लीनिक और रेफरल सेवाएँ सुचारू रूप से चल रही हैं। हमारा प्रयास है कि हर मरीज बेहतर स्वास्थ्य के साथ सामान्य जीवन जी सके।”


5,484 रजिस्ट्रेशन, 4,885 मरीज ART पर—निगरानी और उपचार का सबसे बड़ा नेटवर्क
वित्तीय वर्ष 2025-26 में एचआईवी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 5,484 पहुंच चुका है।


इनमें पुरुष 3,303, महिलाएं 72, ट्रांसजेंडर 300 व 254 पुरुष बच्चे, 384 महिला बच्चे और 172 कुल बच्चे शामिल हैं।
ART पर जीवित मरीजों की संख्या 4,885 है, जिसमें पुरुष 2,675, महिलाएँ 1,539, ट्रांसजेंडर 37 और बच्चे 234 शामिल हैं।
ये आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि उपचार की पहुंच कितनी विस्तृत है और लगातार बढ़ती हुई चुनौती को स्वास्थ्य व्यवस्था किस तरह संभाल रही है।
चार लिंक ART सेंटर—दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के लिए जीवन रेखा
मुंगेली, जांजगीर, सेंट्रल जेल बिलासपुर और जिला अस्पताल बिलासपुर में लिंक ART सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
इनके माध्यम से 562 दूरस्थ मरीज समय पर दवा पा रहे हैं।
कैदियों से लेकर ग्रामीण जेबों तक—ART सेवाएँ बिना रूकावट पहुँच रही हैं।
HIV–TB दोहरी चुनौती: 54 मरीजों का उपचार शुरू
HIV मरीजों में टीबी संक्रमण की संभावना कई गुना अधिक होती है। इस खतरे को कम करने के लिए टीबी विभाग और एआरटी सेंटरों के बीच सशक्त समन्वय है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 54 मरीजों का टीबी उपचार शुरू किया गया, जो प्रतिबद्धता की गंभीरता दर्शाता है।
HIV संक्रमित गर्भवती महिलाओं के लिए मातृ–शिशु सुरक्षा ढाल
एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं से जन्मे बच्चों में संक्रमण का खतरा 40% तक होता है।
इसी जोखिम को शून्य के करीब लाने के लिए जिले में ICTC, PPTCT, गायनी OPD और माइक्रोबायोलॉजी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
अभी तक 62 गर्भवती महिलाएँ इस सुरक्षित मातृत्व सेवा से जोड़ी जा चुकी हैं, जिससे उनके बच्चों को जन्म से 18 वर्ष तक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
छत्तीसगढ़–एमपी–ओडिशा तक सेवाओं का प्रभाव: सिम्स ART सेंटर राष्ट्रीय मॉडल
सिम्स एआरटी सेंटर बिलासपुर संभाग ही नहीं, बल्कि–
बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर, बलौदाबाजार, जशपुर, कबीरधाम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरिया, रायगढ़, सारंगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
जैसे जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी भरोसेमंद इलाज केंद्र है।
इसे नेशनल लेवल “हब ART सेंटर” की तरह देखा जा रहा है।
SACEP से सेकेंड–थर्ड लाइन दवाएं: 235 मरीजों को मिला जीवन विस्तार
ART दवाओं के लंबे समय तक सेवन से कई मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। ऐसे मामलों में सिम्स से रिपोर्ट रायपुर मेडिकल कॉलेज स्थित ART प्लस सेंटर भेजी जाती है, जहां से सेकेंड लाइन या थर्ड लाइन थेरेपी तय होती है।
अब तक 235 मरीज इस फेज्ड व एडवांस्ड थेरेपी का लाभ ले चुके हैं।
समग्र स्वास्थ्य रेफरल—किसी भी बीमारी में तुरंत विशेषज्ञ सेवा
ART मरीजों को किसी भी अन्य बीमारी पर संबंधित विभाग में तुरंत रेफर किया जाता है।
गायनी, टीबी, डर्मेटोलॉजी, ब्लड बैंक, मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स—सभी विभाग ART सेंटर के साथ समन्वित रूप से काम कर रहे हैं।
दवा–जांच–परामर्श—सब कुछ पूरी तरह निःशुल्क
निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक सभी मरीजों की जांच, दवा, काउंसलिंग और रिकॉर्डिंग पूरी तरह नि:शुल्क होती है।
सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली का यह वह चेहरा है जो HIV मरीजों को लगातार जीवित, सुरक्षित और सामाजिक रूप से सक्षम बनाए हुए है।
बस पास और अंत्योदय अन्न योजना—इलाज के साथ पोषण और परिवहन सुरक्षा
– 180 HIV मरीजों को नियमित दवा लेने के लिए बस पास की सुविधा
– 165 बेसहारा मरीजों को अंत्योदय अन्न योजना के तहत प्रति माह 35 किलो अनाज
यह व्यवस्था HIV प्रबंधन को “सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा मिशन” में बदल देती है।
जांच–इलाज–रोकथाम की पूरी चेन एक ही संस्था में
सिम्स में HIV प्रबंधन के लिए सभी इकाइयाँ एक ही छत के नीचे मौजूद हैं—
ART सेंटर
ICTC
PPTCT
STI सेंटर
OST सेंटर
ब्लड बैंक काउंसलिंग
यह मॉडल देशभर में HIV प्रबंधन की सबसे व्यापक संरचनाओं में से एक माना जा रहा है।
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही में नया लिंक ART—वन क्षेत्र में HIV प्रबंधन की ऐतिहासिक पहल
बिलासपुर से सबसे दूर और वन क्षेत्र से घिरे GPM जिले में HIV और IDU (इंजेक्टिंग ड्रग यूजर) की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन मरीजों को बिलासपुर आना कठिन होता था।
1 दिसंबर 2025 को यहां नया लिंक ART सेंटर शुरू किया जा रहा है।
इससे 210 मरीजों को स्थानीय स्तर पर दवा और परामर्श मिलने लगेगा।
यह कदम आदिवासी–वन क्षेत्रों में HIV रोकथाम की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
लेकिन यह तस्वीर बताती है कि HIV से लड़ाई सिर्फ दवा से नहीं, व्यवस्था से जीती जाती है
देश में HIV नियंत्रण की जमीनी तस्वीर अक्सर अलग-अलग राज्यों में बिखरी मिलती है, लेकिन बिलासपुर का यह मॉडल दिखाता है कि जब विभाग, तकनीक, सामाजिक सुरक्षा और संवेदी प्रशासन एकसाथ काम करें तो HIV सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक प्रबंधनीय जीवन-स्थिती बन जाती है।

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