Latest news

नवोदय छात्र की मौत ने प्रदेश को झकझोरा: अस्पताल ले जाने को गाड़ी नहीं, प्राचार्य वाहन लेकर बाहर… गुस्से में फूटा कैंपस

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

मोहम्मद इसराइल बबलू


“अगर समय पर इलाज मिलता तो मेरा बेटा ज़िंदा होता” — एक पिता की चीख और एक संस्थान की शर्मनाक हकीकत



बिलासपुर, रायपुर।बिलासपुर के मल्हार स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में 10वीं के छात्र हर्षित यादव की मौत ने पूरे प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर नवोदय स्कूलों की सुरक्षा, प्रबंधन और छात्र कल्याण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज में देरी, वाहन उपलब्ध न होना, प्राचार्य का सरकारी वाहन लेकर तीन दिन बाहर जाना, हॉस्टल की बदहाल स्थिति—इस हादसे ने देशभर के आवासीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा दी है।
मंगलवार को हर्षित की मौत के बाद बुधवार को स्कूल के बाहर हालात विस्फोटक हो गए। सैकड़ों छात्राएं और छात्र धरने पर बैठ गए, प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि—“हमने कई बार शिकायत की, पर किसी ने सुना ही नहीं
**एक मौत… और उजागर हो गई व्यवस्था की सड़ांध।


एक छात्र… और खुल गई नवोदय सिस्टम की पोल।
जहां बच्चों के सपने संवारने थे, वहां लापरवाही ने एक जिंदगी छीनी—और अब पूरा कैंपस सवाल पूछ रहा है।**

➡️ मौत से पहले 48 घंटे: स्कूल से अस्पताल तक की शर्मनाक देरी
➡️ वाहन नहीं—प्राचार्य गाड़ी लेकर मीटिंग में; छात्र को बाइक पर बैठाकर ले गए पिता
➡️ हॉस्टल में गंदगी, सीलन, टूटे दरवाज़े, ठंड में 5 बजे नहलाना—छात्रों का खुलासा
➡️ दाल की जगह पीला पानी, सब्जी में सिर्फ आलू—भोजन पर भी छात्रों का गुस्सा
➡️ छात्राओं का मोर्चा: “हम भी डरते हैं… कोई भी हर्षित बन सकता है”
➡️ कलेक्टर ने लिया संज्ञान, SDM जांच शुरू
कैसे एक 15 वर्षीय छात्र को लापरवाही ने मौत की ओर धकेला — पूरा घटनाक्रम
शनिवार 22 नवंबर | सुबह 10:30 बजे | पहला झटका
पिता जयप्रकाश यादव को नवोदय से फोन आया—
“आपके बेटे की तबीयत खराब है… जल्दी आएं।”
बेलगहना से 90 किलोमीटर दूर स्कूल पहुंचकर पिता ने जो देखा, उससे हिल गए।
हॉस्टल की हालत—मानो छोड़ा हुआ भवन
पिता के शब्द—
“कमरे में बदबू, चारों ओर सीलन।”
“खिड़कियां टूटीं… दरवाजे बंद नहीं होते।”
“सांप-बिच्छू आ चुके हैं।”
“नाली का पानी खाने की जगह तक बह रहा था।”
“छात्रों को ठंड में सुबह 5 बजे नहलाया जाता है।”
गंभीर हालत… फिर भी वाहन नहीं
जब पिता ने स्कूल से एंबुलेंस या गाड़ी मांगी तो जवाब मिला—
“वाहन नहीं है… प्राचार्य तीन दिन से गाड़ी लेकर मीटिंग में गए हैं।”
स्टाफ ने कहा—
“बाइक से ले जाइए… और कोई तरीका नहीं है।”
पिता ने बताया—
“वह बैठने की भी हालत में नहीं था… लेकिन मुझे मजबूरी में बाइक पर ले जाना पड़ा।”
शाम—निजी अस्पताल में जांच
डॉक्टरों ने कहा—
“गंभीर न्यूमोनिया है… बहुत देर से आया है।”
दवा देकर घर भेज दिया गया।
रविवार—स्थिति बिगड़ती गई, पर नवोदय प्रबंधन गायब
किसी अधिकारी ने फोन तक नहीं किया।
सोमवार सुबह—बच्चा बेहोश
अस्पताल में भर्ती, आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा—
“पहले लाया जाता तो बच सकता था।”
सोमवार देर रात—लड़ाई हार गया
हर्षित की इलाज के दौरान मौत हो गई।
पिता का दर्द — “यह मौत नहीं, हत्या है”
बिलखते हुए पिता बोले—
“समय पर इलाज होता तो मेरा बेटा नहीं मरता।”
“स्कूल ने हाथ खड़े कर दिए।”
“एक ही बेटा था… मेरा सब कुछ।”
नवोदय कैंपस में विस्फोट — छात्राएं और छात्र धरने पर
बुधवार सुबह से ही कैंपस में उबाल
बड़ी संख्या में छात्राएं धरने पर बैठ गईं
कहा— “हर्षित की मौत से हम सब हादर गए हैं।”
कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग
भोजन, सुरक्षा, साफ-सफाई पर गंभीर आरोप
दाल में पीला पानी, सब्जी में सिर्फ आलू
छात्रों ने बताया—
“खाना नाकाबिल-ए-खाना है।”
“सब शिकायत बेअसर रही।”
नवोदय हॉस्टल की असल तस्वीर
समस्यास्थितिभोजनदाल की जगह पीला पानी, सब्जी में केवल आलूसुरक्षासांप-बिच्छू तक आएस्वच्छतानाली का गंदा पानी भोजन कक्ष तकइमारतटूटे दरवाजे, टूटी खिड़कियांस्वास्थ्यनर्स नाममात्र, गंभीर बीमारी का कोई प्रबंध नहींशोषणठंड में सुबह 5 बजे नहलाना
जिम्मेदार कौन?
प्राचार्य 3 दिन वाहन लेकर बाहर
कोई एंबुलेंस/ स्कूल गाड़ी मौजूद नहीं
मेडिकल एस्कॉर्ट सिस्टम नहीं
शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं
स्टाफ ने गंभीर छात्र को बाइक पर ले जाने की सलाह दी
कलेक्टर की प्रतिक्रिया
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए
एसडीएम को जांच के आदेश दे दिए हैं।
इस दर्दनाक हादसे ने देशभर के नवोदयों पर सवाल खड़े कर दिए
हर्षित 6वीं से नवोदय में पढ़ रहा था।
सपने बड़े थे…
मंज़िल बड़ी थी…
लेकिन इंतज़ाम की बेपरवाही उससे उसकी जान ले गई।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।