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लिंगियाडीह की बस्ती पर फिर मंडराया ख़तरा: 50 साल से बसे गरीब परिवारों पर बुलडोज़र का साया, 113 घर तोड़ने की तैयारी से दहशत—महिलाओं ने कहा, “हमारे घर नहीं टूटने देंगे”, पूर्व विधायक शैलेश पांडे के समर्थन से बढ़ा हौसला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर ,रायपुर।

बिलासपुर के लिंगियाडीह–दुर्गा नगर क्षेत्र की 50 साल पुरानी बस्ती इन दिनों गहरी असुरक्षा और अनिश्चितता में जी रही है। 2019 में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत सरकारी सर्वे, प्रीमियम वसूली और पट्टा वितरण के बाद राहत महसूस करने वाले गरीब परिवार आज अपने ही घरों पर मंडराते बुलडोज़र को लेकर भयभीत हैं। नगर निगम द्वारा 113 मकान तोड़कर गार्डन और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी ने पूरे इलाके को तनाव में डाल दिया है।


निवासियों का कहना है कि चार महीनों में तीसरी बार अलग-अलग योजनाओं—कभी सड़क चौड़ीकरण, कभी नाले पर सड़क निर्माण और अब कॉम्प्लेक्स—का हवाला देकर मकान खाली कराने की चेतावनी दी गई है। बार-बार बदलती परियोजनाओं ने लोगों में अविश्वास पैदा कर दिया है। इससे पहले भी लगभग 150 से अधिक मकान और दुकानें तोड़ी जा चुकी हैं, जिनका निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हुआ।
महिलाओं का संघर्ष और हौसला, शैलेश पांडे बने ढाल
मौजूदा तनाव के बीच क्षेत्र की महिलाओं ने बेघर होने के डर के बावजूद खुलकर आवाज उठाना शुरू कर दिया है। अन्न–जल छोड़कर अपने घरों की रक्षा करने मैदान में उतरी महिलाओं का कहना है—
“हमने खून-पसीने से ये घर बनाए हैं, अब इन्हें टूटने नहीं देंगे।”
महिलाओं के इस आंदोलन को पूर्व विधायक शैलेश पांडे का सीधा समर्थन मिलने से उनका मनोबल और भी बढ़ गया है। शैलेश पांडे लगातार क्षेत्र के लोगों से संपर्क में हैं और महिलाओं के संघर्ष को शक्ति देने के लिए उनके बीच मौजूद रहने की बात कही है। उनके समर्थन ने इलाके में प्रशासनिक दबाव से घिरी महिलाओं को साहस दिया है, जिससे आंदोलन और अधिक मजबूत हो गया है।
पट्टा, भुगतान और फिर भी असुरक्षा
2019 में छत्तीसगढ़ सरकार ने लिंगियाडीह की 2.46 एकड़ भूमि को आबादी भूमि मानकर लोगों को पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू की थी। अतिरिक्त तहसीलदार ने नामों की सूची बनाई और नगर निगम ने 10 रुपये प्रति वर्गफुट प्रीमियम राशि लेकर पट्टे की मंजूरी दी। अब उन्हीं मकानों को तोड़ने की तैयारी ने परिवारों को झकझोर दिया है।
“लगातार सर्वे—लगातार डर”
स्थानीयों का कहना है कि पिछले चार महीनों में विभिन्न बहानों पर लगातार सर्वे और नोटिस देकर बेदखली की कोशिश की गई, जिससे परिवारों का मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संतुलन बिगड़ चुका है। लोग अभी तक पहली तोड़फोड़ की त्रासदी से उबर नहीं पाए थे, और अब एक बार फिर वही खतरा सामने है।
निवासियों ने सौंपा ज्ञापन
दुर्गा नगर व लिंगियाडीह के प्रभावित परिवारों ने तहसील कार्यालय को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि प्रस्तावित तोड़फोड़ पर तत्काल रोक लगाई जाए और लगातार बदलते प्रोजेक्टों की जांच कराई जाए, ताकि गरीब परिवारों को बार-बार अस्थिरता और भय का सामना न करना पड़े।

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