अवैध निर्माण : पार्ट 1
मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर।
स्मार्ट सिटी घोषित बिलासपुर में अवैध निर्माणों का जाल शहर की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक नैरेटिव पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। शहर के भीतर से आउटर बेल्ट तक जी+4 इमारतें, कॉम्प्लेक्स, दुकानें और सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा कथित रूप से खुलेआम जारी है। वहीं, जब नगर निगम कार्रवाई के लिए निकलता है तो मौके पर “शहर विधायक का नाम लेकर कार्रवाई रोकने की कोशिश” किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

करबला रोड स्थित वार्ड 33 में निगम ने आवासीय नक्शे पर बनी जी+4 बिल्डिंग और चार दुकानों को सील कर दिया। यह संरचना हेमा भगतानी के नाम दर्ज है। यह वही निर्माण है, जिसे लेकर पिछले कई महीनों से शिकायतें थीं और तीन बार नोटिस जारी करने के बाद अब यह कार्रवाई की गई है।
करबला रोड की सीलिंग कार्रवाई — विवाद, दबाव और प्रशासनिक उलझन
जगह: सिंधी धर्मशाला, करबला रोड
निर्माण: जी+4 अवैध भवन + 4 दुकानें
मालिकाना विवरण: हेमा भगतानी
निगम सूत्रों के अनुसार निर्माण के दौरान लगातार नियम विरुद्ध बदलाव किए जा रहे थे और इसके बावजूद जवाब नहीं दिया गया। निगम अधिकारियों का दावा है कि एक भाजपा नेता बार-बार दबाव बना रहे थे।
शिकायत यह भी है कि यह दबाव सीधे तौर पर शहर विधायक के नाम के सहारे डाला जा रहा था। जबकि शहर विधायक सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि अवैध निर्माण पर किसी तरह की राजनीति नहीं होगी और कार्रवाई होगी।
लेकिन सवाल वही है—
जिसका नाम लेकर धमकी दी जा रही है, वह बचा क्यों है? और अधिकारी डर क्यों रहे हैं?
“एक पर कार्रवाई, दूसरे पर चुप्पी” — सवालों के घेरे में सिस्टम
इसी इलाके में प्रकाश आडवाणी के नाम दर्ज एक बड़े निर्माण को लेकर भी विवाद है। आरोप है कि भवन को आवासीय अनुमति मिली थी, लेकिन निर्माण व्यावसायिक स्वरूप में बदल दिया गया।
निगम द्वारा इस पर कोई कठोर कदम न उठाना अब चर्चा का प्रमुख मुद्दा बन चुका है।


स्पॉट फोकस: भाजपा पार्षद पति का कब्ज़ा तोड़ा गया
विवरणजानकारीकिसका नामराजेंद्र टंडन (पार्षद किरण टंडन के पति)स्थानउसलापुर स्कूल के पीछेजमीन7 डिसमिल सरकारी भूमिकार्रवाईअतिक्रमण ढहाया गया
निगम ने मौके पर पहुंचकर यह निर्माण तोड़ दिया और दावा किया कि यह सरकारी भूमि पर गैरकानूनी कब्ज़ा था।
दूसरी कार्रवाई
महेश जांगड़े द्वारा जवाली नाले के पास किए गए अवैध प्लॉटिंग और दुकानों को भी हटाया गया।
शहर की तस्वीर — सवालों में विकास मॉडल
मुद्दास्थितिअवैध निर्माणलगातार बढ़ रहेराजनीतिक हस्तक्षेपशिकायतें जारीनक्शा नियमबार-बार बदले और अनदेखेनागरिक विश्वासगिरावट का आरोपस्मार्ट सिटी इमेजसवालों के घेरे में
सार्वजनिक चर्चा में अब दो वाक्य सबसे ज़्यादा चल रहे हैं:
“किसका संरक्षण मिल रहा है?”
“किसकी बिल्डिंग पर हथौड़ा चलता है और किसकी पर रुकता है?”
बिलासपुर की यह स्थिति अब केवल निर्माण का मसला नहीं है।



