आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क ऑपरेशन, मरीज अगले दिन ही अपने पैरों पर खड़ा हुआ


बिलासपुर, 13 नवम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सिम्स) ने एक बार फिर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के अस्थि रोग विभाग ने 75 वर्षीय हाई-रिस्क मरीज गणेश राम निराला (निवासी नगरीदिह, सक्ती) का सफल घुटना प्रत्यारोपण (Total Knee Replacement) किया है। यह ऑपरेशन न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया गया, जो गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बना।
ऑपरेशन का विवरण
6 नवम्बर 2025 को किया गया यह ऑपरेशन वरिष्ठ अस्थि विशेषज्ञ डॉ. ए.आर. बेन (विभागाध्यक्ष) और डॉ. तरुण सिंह ठाकुर (सहायक प्राध्यापक) के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। मरीज को पहले से ही शुगर और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी, बावजूद इसके पूरी टीम ने सावधानीपूर्वक तैयारी कर ऑपरेशन को सफल बनाया।
ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज दर्दमुक्त होकर स्वयं चलने लगे — यह चिकित्सकों के कौशल और टीमवर्क की शानदार मिसाल है।
ऑपरेशन टीम
इस सर्जरी में अस्थि रोग विभाग के डॉ. ए.आर. बेन, डॉ. तरुण सिंह ठाकुर, डॉ. रवि महोबिया, डॉ. सोमेश शुक्ला, डॉ. सागर कुमार, सिस्टर सुधा और पीजी रेजिडेंट्स शामिल रहे।
एनेस्थिसिया विभाग से डॉ. मधुमिता मूर्ति (विभागाध्यक्ष), डॉ. मिल्टन देव बर्मन, डॉ. श्वेता काजूर, डॉ. भावना रॉयजादा और उनकी टीम ने उत्कृष्ट सहयोग दिया। नर्सिंग स्टाफ में योगेश्वरी, सिस्टर सुधा और उनकी टीम की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही।
प्रबंधन और सहयोग
ऑपरेशन के लिए जरूरी इम्प्लांट और उपकरण सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के मार्गदर्शन में उपलब्ध कराए गए। पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द प्रबंधन में एनेस्थिसिया टीम का योगदान सराहनीय रहा।
उल्लेखनीय उपलब्धि
अब तक सिम्स के अस्थि रोग विभाग द्वारा 30 कूल्हा प्रत्यारोपण और 22 घुटना प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में सिम्स की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति का विचार
“हमारा लक्ष्य है कि हर गरीब और जरूरतमंद मरीज को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा मिले। आयुष्मान भारत योजना के तहत किए जा रहे ये ऑपरेशन सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में नई शुरुआत हैं। सिम्स समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक उम्मीद पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह का विचार
“हमारे अस्पताल में हर मरीज के इलाज को सर्वोत्तम बनाने का प्रयास किया जाता है। यह सफल घुटना प्रत्यारोपण इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों में भी टीम भावना और प्रतिबद्धता से उत्कृष्ट परिणाम संभव हैं।”
सकारात्मक पहल, नई उम्मीद
सिम्स बिलासपुर लगातार ऐसे सफल ऑपरेशनों के माध्यम से न केवल चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि सरकारी चिकित्सा संस्थान भी गुणवत्ता, संवेदनशीलता और मानवता के उच्च मानक स्थापित कर सकते हैं।



