मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, पर ज़मीनी तस्वीर सरकार के दावों से बिल्कुल उलट है। मुख्यमंत्री भले 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत का ऐलान कर चुके हों, मगर हकीकत यह है कि समितियों में तालाबंदी, पंजीयन की गड़बड़ियाँ, आंदोलनरत कर्मचारी और फंड-रहित केंद्र — सब मिलकर इस बार के उपार्जन को विवादों में घसीट रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि सब कुछ तय समय पर होगा, जबकि किसान कह रहे हैं — “धान तो पक गया, पर व्यवस्था कच्ची है।”
रायपुर/बलौदाबाजार/सूरजपुर/बिलासपुर
राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू करने की औपचारिक घोषणा की है। दावा है कि समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल रहेगा और किसानों को भुगतान समय-बद्ध रूप से किया जाएगा। मगर, इस ऐलान के बीच सच्चाई यह है कि पूरे प्रदेश में धान खरीदी अमला आंदोलन पर है, समितियाँ बंद हैं, और कई जगहों पर कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
समीक्षा बैठकें और हकीकत का फर्क


अपर मुख्य सचिव एवं रायपुर जिले की प्रभारी सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने रेडक्रॉस सभाकक्ष में अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर तैयारियों का खाका खींचा। उन्होंने निर्देश दिए कि “उपार्जन केंद्रों में किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आनी चाहिए, अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जाए और गुणवत्ता पर समझौता न हो।”
पर ज़मीनी रिपोर्ट बताती है कि केंद्रों पर बारदाने की कमी, माप-तौल मशीनों की मरम्मत अधूरी है। कई जगहों पर पंजीकृत किसानों के नाम अब तक अपडेट नहीं हुए हैं। रायपुर जिले में ही 1,34,037 किसान और 1,26,921 हेक्टेयर धान रकबा पंजीकृत है, लेकिन तैयारी का प्रतिशत 70 फीसदी से अधिक नहीं बताया जा रहा।
अवैध धान पर कार्रवाई, मगर खरीद प्रक्रिया पर सन्नाटा
धान खरीदी से पहले प्रशासन ने अवैध भंडारण पर नकेल कसने का दावा किया है।
सूरजपुर जिले में संयुक्त टीम ने 250 बोरा (100 क्विंटल) अवैध धान जब्त किया।
बलौदाबाजार जिले में कार्रवाई कर 345 कट्टा धान पकड़ा गया।
पाँच चेकपोस्ट और उड़नदस्ता दल गठित किए गए हैं ताकि कोचियों और बिचौलियों पर नजर रखी जा सके।
लेकिन खुद खाद्य विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि “अवैध परिवहन और खरीद पर कार्रवाई तो हो रही है, मगर खरीदी-व्यवस्था की जमीनी मशीनरी अभी तैयार नहीं है।”


किसानों की दिक्कतें — पंजीकरण, भुगतान और अव्यवस्था
कई किसानों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल बार-बार ठप हो रहा है, जिससे हजारों किसान सूची से बाहर रह गए हैं।
कई समितियों में तालाबंदी के चलते बारदानों की आपूर्ति रुक गई है।
कर्मचारियों का आंदोलन जारी है — चार प्रमुख मांगों पर सरकार और संघ के बीच टकराव बना हुआ है।
भुगतान को लेकर पिछली खरीदी के बकाया अब तक निपटे नहीं हैं।
सरकारी फ्रेमवर्क बनाम फील्ड रियलिटी
सरकार का दावाज़मीनी सच्चाई15 नवंबर से खरीदी तयसमितियाँ बंद, अमला हड़ताल परकिसानों को ₹3,100 / क्विंटलपिछली खरीदी के भुगतान बाकीचेकपोस्ट और उड़नदस्ता सक्रियबारदाने और गोदामों की कमीकॉल सेंटर नंबर चस्पाकई केंद्रों पर टेलीफोन ही नहीं चालू
किसान संगठनों की नाराज़गी
राज्य किसान सभा और अन्य संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार “धान खरीदी का शो-पीस बना रही है।”
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 नवंबर तक सभी केंद्रों में खरीदी शुरू नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
उनका कहना है कि “धान की नमी और भंडारण की सीमा का हवाला देकर सरकार खरीदी टालने की कोशिश कर रही है।”
संकेत साफ़
धान खरीदी की तारीख तय है, लेकिन माहौल अस्थिर है। सरकारी दावे एक ओर हैं, और जमीनी हालात दूसरी ओर — धान पक चुका है, पर खरीदी-प्रक्रिया अधपकी। सवाल यह है कि 15 नवंबर को जब किसान समर्थन मूल्य पर धान लेकर केंद्रों में पहुंचेंगे, तो क्या वाकई खरीदी शुरू होगी या फिर फिर से “तैयारी” का राग दोहराया जाएगा?



