मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर रेल हादसे के बाद अब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। हादसे की गंभीरता ने सिस्टम को हिला दिया है — जिसके बाद रेल संरक्षा पर अब “कागज़ी मीटिंग” नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने बिलासपुर–रायगढ़ रेलखंड का विंडो निरीक्षण कर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की गहराई से जांच की। इस दौरान उन्होंने ट्रैक, सिग्नलिंग, फाटक, ब्रिज और स्टेशन लॉबी तक का बारीकी से जायजा लिया और अधिकारियों को साफ चेतावनी दी — “संरक्षा से कोई समझौता नहीं!”
बिलासपुर।
हाल ही में हुए बिलासपुर रेल हादसे ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाली इस घटना ने रेल संरक्षा पर विभागीय जिम्मेदारी और सतर्कता की पोल खोल दी थी। अब, उसी हादसे के बाद रेलवे सिस्टम ने खुद को झकझोरने वाली समीक्षा शुरू कर दी है।
मंगलवार को महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने बिलासपुर–रायगढ़ रेलखंड पर विंडो निरीक्षण किया — जिसे रेलवे की भाषा में “चलती ट्रेन से संरक्षा जांच” कहा जाता है। उन्होंने ट्रैक की स्थिति, सिग्नलिंग सिस्टम, ब्रिज, समपार फाटक और परिचालन बिंदुओं का बारीकी से मूल्यांकन किया।




निरीक्षण के दौरान जीएम ने स्पष्ट कहा —
“संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर कर्मचारी अपने दायित्व को गंभीरता से निभाए — क्योंकि रेल सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, जिम्मेदारी से चलती है।”
संरक्षा सेमिनार में कड़ा संदेश:
रायगढ़ रेलवे इंस्टीट्यूट में आयोजित SPAD (Signal Passed At Danger) से बचाव विषयक सेमिनार में जीएम ने लोको पायलटों और गार्डों से सीधी बात की। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि कोई भी चालक “अनुमान से सिग्नल” न देखे, बल्कि दृश्यता नियमों का कड़ाई से पालन करे।
उन्होंने कहा कि हादसे अक्सर तब होते हैं जब “अनुभव पर भरोसा, नियमों पर नहीं” किया जाता है — और यही घातक लापरवाही अब खत्म करनी होगी।
रेलवे के मैदान में उतरे बड़े अधिकारी:
निरीक्षण के दौरान बिलासपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक राजमल खोईवाल, प्रमुख विभागाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जीएम ने लोको पायलटों और गार्डों के परिवारों से भी मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और मनोबल बढ़ाया।
रायगढ़ स्टेशन पर रनिंग रूम, प्रतीक्षालय, लॉबी और “अमृत भारत स्टेशन योजना” के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की गई। महाप्रबंधक ने चेतावनी दी कि सभी निर्माण कार्य समयसीमा और गुणवत्ता दोनों में समझौता रहित हों।
“हादसे की गूंज अभी बाकी है” – अधिकारियों में दिखी हड़बड़ी:
बिलासपुर हादसे के बाद रेलवे के शीर्ष अफसरों में अब असामान्य सक्रियता दिख रही है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में रात के समय भी अधिकारियों ने स्टेशन पर पहुंचकर MEMU ट्रेनों की तकनीकी स्थिति और परिचालन समीक्षा की। बताया गया कि ट्रैक ओवरलोडिंग, पुराने सिग्नल सिस्टम और प्वाइंट मशीन की खराबी जैसे तकनीकी कारणों को लेकर विभाग अब “ऑपरेशनल अलर्ट मोड” पर है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद मंडल ने रात्रि निरीक्षण, आकस्मिक अलर्ट ड्रिल और “स्ट्रेस टेस्टिंग” जैसी कई नई प्रक्रियाएं भी शुरू की हैं, ताकि दोबारा बिलासपुर जैसी घटना न हो।
विंडो निरीक्षण क्या है:
विंडो या “विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण” रेलवे की वह प्रक्रिया है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी चलती ट्रेन की पिछली खिड़की से ट्रैक, सिग्नलिंग और ओवरहेड उपकरण (OHE) की स्थिति का निरीक्षण करते हैं। इसका उद्देश्य ट्रैक विफलता, सिग्नल दोष और परिचालनिक खतरे को समय रहते पहचानना है — ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।बिलासपुर हादसे ने रेलवे को यह सख्त सबक दिया है कि सुरक्षा का “पेपर प्रोटोकॉल” अब काम नहीं करेगा। अब ज़रूरत है मैदान में मौजूद मशीन, ट्रैक और मानव संसाधन की असली जांच की।
अगर यह जागरूकता अभियान महज़ कुछ हफ्तों की हड़बड़ी न होकर दीर्घकालिक सुधार बने — तभी कहा जा सकेगा कि बिलासपुर की त्रासदी ने रेलवे को झकझोर कर जिम्मेदार बनाया है।



